फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   Close competition between BJP and Congress in the city

Ambala News: सिटी में भाजपा-कांग्रेस में कांटे की टक्कर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Oct 2024 06:08 AM IST
विज्ञापन
Close competition between BJP and Congress in the city
अंबाला सिटी। अंबाला की चारों विधानसभा क्षेत्रों में से एक शहर विधानसभा सीट पर सभी की निगाहें टिकी हैं। अब मतदान की बेला आ गई है तो आखिरी दो दिनों में सभी पार्टियां प्रचार में एड़ी चोटी का जोर लगाती दिख रही हैं।
विज्ञापन

माैजूदा हालत देखें तो इसी सीट पर भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर दिखाई देती है। इससे पहले के विधानसभा चुनावाें में भी इसी प्रकार की स्थिति दिखाई दी थी। भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। दोनों दलों में सामाजिक संस्थाओं का समर्थन लेने की होड़ सी दिखाई दे रही है। दोनों ही पार्टियों के दफ्तरों में देर रात्रि तक कार्यकर्ताओं की भीड़ दिख रही है जो क्षेत्रों के हिसाब से नेताजी के साथ समीकरण साझा कर रहे हैं।
विज्ञापन

एक तरफ भाजपा से दो बार के विधायक और परिवहन राज्य मंत्री रहे असीम गोयल हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस से पूर्व मंत्री निर्मल सिंह हैं। शहरी क्षेत्र में जहां भाजपा आश्वस्त है कि उन्हें जीत मिलेगी और वह ग्रामीण क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रहे हैं तो कांग्रेस को ग्रामीण क्षेत्र की वोटों पर भरोसा है वह सिटी में ध्यान अधिक लगा रहे हैं। ऐसे में अगर देखा जाए तो भाजपा को पहले लोकसभा में भी शहरी वोट अच्छी मिली थी। अंबाला में 100 से अधिक गांव आते हैं, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र इस बार सिटी सीट का विधायक निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन




छोटे दलों को साधने की कोशिश



शहर सीट पर आजाद समाज पार्टी और जजपा गठबंधन, बसपा और इनेलो गठबंधन सहित कुछ और छोटे दल मैदान में हैं। यह दल जातीय समीकरणों के आधार पर सबसे अधिक कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं। क्योंकि इनमें से अधिकांश दलों के कोर वोटर पहले से ही निर्धारित हैं। ऐसे में यह दल चोट पहुंचाने का काम करेंगे। इसके साथ ही जो लोग कांग्रेस और भाजपा दोनों में नहीं जाना चाहते हैं तो उनको भी यह दल प्रभावित करने का काम करेंगे। दोनों दलों के लिए चुनौती यही है कि यहां 10-10 साल भाजपा और कांग्रेस ने बारबर का राज किया है। कई क्षेत्रों के लोगों को तो दोनों ही दलों से अधिक आस नहीं है।



कांग्रेस दिखा रही लहर, भाजपा गिना रहा काम



सिटी सीट पर भाजपा और कांग्रेस के प्रचार की स्थिति देखें तो यहां भाजपा अपने एक-एक गांव में किए कार्यों को गिनवा रही है। इसके लिए बाकायदा एक बुकलेट भी प्रकाशित कराई है। वहीं कांग्रेस लोगों को दिखा रही है कि प्रदेश में उनकी लहर चल रही है और सत्ता में आने के बाद वह लोगों की समस्याएं अच्छे से दूर कर सकते हैं। हालांकि दोनों की दलों में किसी एक के पक्ष में साफ मत नहीं है।

अंबाला शहर के यह हैं मुद्दे
अंबाला शहर में 10 साल भाजपा ने राज किया है। मगर इसके बावजूद यहां की जलभराव की सबसे बड़ी समस्या का आज तक समाधान नहीं हो सका है। चुनाव कार्यक्रम के दौरान ही बारिश से शहर में जलभराव हो गया तो सत्ता पक्ष की सांसें फूल गईं थी। वहीं शहर में वर्षों से अधूरी पड़ी परियोजनाएं भी एक अहम मुद्दा हैं। इसमें कुछ तो सीएम की घोषणाएं ही हैं जिनको लेकर उच्चाधिकारियों से लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों तक हर माह समीक्षा की जाती है। इसके साथ ही सीवरेज, सेक्टरों की बुरी हालत, स्कूलों की स्थिति आदि समस्याएं भी लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। अग्रवाल सभा के प्रधान धनराज बताते हैं कि इस बार के विधायक से उम्मीद रहेगी कि वह जलभराव की समस्या को दूर कराएं ताकि व्यापारियों को दिक्कत न हो। सैनी सभा के प्रधान सतीश सैनी बताते हैं कि भाजपा के समय में बेरोजगारी, जलभराव जैसी समस्याओं से लोग परेशान हैं। महंगाई को झेलना मुश्किल हो रहा है। उद्योगों पर संकट है। इस बार परिवर्तन की ओर बढ़ेंगे।
अंबाला शहर सीट पर यह रहे हैं जीते वाले प्रत्याशी
- वर्ष 1967 के चुनाव में अखिल भारतीय जन संघ के फकीर चंद अग्रवाल को 15 हजार 887 वोट और कांग्रेस के एजी खान को 8 हजार 973 वोट मिले। फकीर चंद अग्रवाल 6 हजार 914 वोट से जीते।
- वर्ष 1968 में कांग्रेस की लेखवती जैन को 14 हजार 552 वोट और अखिल भारतीय जन संघ के फकीर चंद अग्रवाल को 9 हजार 482 वोट मिले। लेखवती जैन 5 हजार 70 वोट से जीती।
- वर्ष 1972 में कांग्रेस की लेखवती जैन को 16 हजार 932 वोट और अखिल भारतीय जन संघ के लक्ष्मी नारायण को 16 हजार 170 वोट मिले। लेखवती जैन 762 वोट से जीती।
- वर्ष 1977 में जनता पार्टी के शिव प्रसाद को 28 हजार 237 वोट और कांग्रेस की लेखवती जैन को 8 हजार 279 वोट मिले। शिव प्रसाद 19 हजार 958 वोट से जीते।
- वर्ष 1982 में भाजपा के शिव प्रसाद को 21 हजार 847 वोट और कांग्रेस के सुमेर चंद को 18 हजार 646 वोट मिले। शिव प्रसाद 3 हजार 201 वोट से जीते।
- वर्ष 1987 में भाजपा के शिव प्रसाद को 25 हजार 73 व कांग्रेस केे रामयश को 19 हजार 632 वोट मिले। शिव प्रसाद 5 हजार 441 वोट से जीते। - वर्ष 1991 में कांग्रेस के सुमेर चंद को 20 हजार 489 वोट और भाजपा के फकीर चंद अग्रवाल को 19 हजार 388 वोट मिले। सुमेर चंद 1 हजार 101 वोट से जीते।


- वर्ष 1996 में भाजपा के फकीरचंद अग्रवाल को 28 हजार 570 वोट और कांग्रेस के सुमेर चंद को 24 हजार 900 वोट मिले। फकीर चंद 3 हजार 670 वोट से जीते।
- वर्ष 2000 में भाजपा की वीना छिब्बर को 29 हजार 949 वोट और कांग्रेस की किरनबाला को 23 हजार 840 वोट मिले। छिब्बर 6 हजार 109 वोट से जीती।
- वर्ष 2005 में कांग्रेस के विनोद शर्मा को 50 हजार 618 वोट और इनेलो के सुरजीत सिंह को 15 हजार 302 वोट मिले। विनोद शर्मा 35 हजार 316 वोट से जीते।
- वर्ष 2009 में कांग्रेस के विनोद शर्मा को 69 हजार 435 व शिअद की बीबी चरणजीत कौर मलौर को 33 हजार 885 वोट मिले। विनोद शर्मा 35 हजार 550 वोट से जीते।
- वर्ष 2014 में भाजपा के असीम गोयल को 60 हजार 216 और हरियाणा जनचेतना पार्टी के विनोद शर्मा को 36 हजार 964 वोट मिले। असीम गोयल 23 हजार 252 वोट से जीते।
- वर्ष 2019 में असीम गोयल को 64 हजार 896 वोट और निर्दलीय निर्मल सिंह को 55 हजार 944 वोट मिले। असीम गोयल 8 हजार 952 वोट से जीते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed