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जेल भरो आंदोलन : पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प, जमीन पर लिटाकर घसीटा
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- फोटो : Ambala
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अंबाला सिटी। प्रदर्शन के 61 वें दिन नौकरी बहाली को लेकर परिवार के साथ जेल भरो आंदोलन के लिए पहुंचे पीटीआई व अन्य कर्मचारी संघ के कार्यकर्ताओं की डीसी ऑफिस के प्रवेश द्वार पर ही पुलिस कर्मचारियों के साथ जमकर धक्का मुक्की हुई। हालातों ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब गाली गलौज के बाद प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच झड़प हो गई। इस बीच कई प्रदर्शनकारियों को जमीन पर लिटाकर घसीटा गया। वहीं कई प्रदर्शनकारियों के कपड़े तक इस झड़प में फट गए। अपने साथियों के साथ झड़प होती देख प्रदर्शनकारी भी उग्र हो गए। जिससे की डीसी ऑफिस के बाहर माहौल तनाव पूर्ण हो गया। इसके बाद मौके पर पहुंचे पुलिस उच्चाधिकारियों ने मामला शांत करवाया और सभी प्रदर्शनकारी डीसी ऑफिस के सामने एकत्रित हुए। जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर बवाल काटा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीटीएम अशोक कुमार ने हाथ जोड़कर प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखते हुए मांग पत्र देने अपील की। परंतु प्रदर्शनकारी जेल भरने की जिद पर अड़े रहे। अधिकारियों के आदेश पर प्रदर्शनकारियों को बसों में भरने का सिलसिला शुरू हुआ। इसके बाद बसें डीसी ऑफिस से निकलकर सेंट्रल जेल के लिए रवाना हुई। परंतु बसों को सिविल अस्पताल से वापस सेक्टर 10 स्टेडियम के लिए रवाना कर दिया। जहां सभी प्रदर्शनकारियों को उतारकर स्टेडियम का गेट बंद कर दिया गया।
प्रशासन की बद इंतजामी: न महिलाओं को संभालने के लिए महिला पुलिस बल, न मिली बसें
पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए डीसी ऑफिस प्रवेश द्वार को रस्सियां लगाकर बंद तो कर दिया। परंतु महिला प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वहां पर एक भी महिला पुलिस कर्मी तैनात नहीं थी। जिसका नतीजा यह हुआ कि जब महिला प्रदर्शनकारी रस्सी पार करने की कोशिश करने लगी तो उन्हें रोकने के लिए पुरुष पुलिस कर्मियों को ही आगे आना पड़ा। जिन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों को पकड़ने का प्रयास किया। परंतु इस बीच प्रदर्शनकारी महिलाएं डीसी ऑफिस के सामने पहुंचने में कामयाब रही। बता दें कि तब जाकर महिला पुलिस बल पहुंची। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारियों को शांति पूर्ण तरीके से बसों में बैठने की बात कहने लगे तो पुलिस द्वारा पर्याप्त बसें ही नहीं मंगवाई गई। जिस कारण प्रदर्शनकारियों ने बसों के आगे बैठकर प्रशासन के खिलाफ जमकर बवाल काटा।
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डीसी पर भी लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
इस बीच प्रदर्शनकारी मौजूदा डीसी पर भ्रष्टाचार के आरोप भी जड़ दिए। इस दौरान कर्मचारियों ने बताया कि जो रजिस्ट्रियों में धांधली हो रही है। वह भी डीसी की ही देन है। साथ ही कोरोना काल में दुकानदारों के साथ किए गए भेदभाव पूर्ण रवैये को भी कर्मचारियों ने जमकर उठाया। उन्होंने कहा कि कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद कांपलेक्स को न बंद करने के बारे में बहाने ढूढे़ गए। जबकि कई मार्केट को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया।
पीटीआई अध्यापकों ने कहा हमारे हाथ में कलम तुम्हारे हाथ में डंडा
नौकरी बहाली और पेपर रद्द करने की मांगों को लेकर पीटीआई व सर्व कर्मचारी संघ का शांति पूर्वक तरीके से जेल भरो आंदोलन हंगामे में तब्दील हो गया। इस दौरान पुलिस की बांछे चढ़ने पर पीटीआई अध्यापकों ने कहा कि कमी हमारी ही है जिन्होंने तुम्हें (पुलिस) स्कूल में सही शिक्षा नहीं दी। उसी का नतीजा है कि आज कुछ पुलिस कर्मी अध्यापकों की पीटाई के लिए बार बार अपनी वर्दी व रुतबे की धौंस दिखा रहे हैं। लेकिन याद रखो तुम्हारे हाथ में डंडा है, तो हमारे हाथ में कलम है। 15 अगस्त को देश आजादी मना रहा है। वहीं 1983 पीटीआई को प्रशासन जेल में डालने का काम कर रहा है। बता दें कि जेल भरो आंदोलन के चलते बहुत से पीटीआई परिवार सहित इस आंदोलन में भाग लेने पहुंचे थे।
150 प्रदर्शनकारियों ने दी गिरफ्तारियां
सिटी थाना एसएचओ राम कुमार ने बताया कि अधिकारियों के आदेश पर सेक्टर 10 के स्टेडियम को जेल में तब्दील कर दिया गया था। जहां सभी प्रदर्शनकारियों के नाम नोट किए हैं। जिसके बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट स्टेडियम में पहुंचे। जहां प्रदर्शनकारियों ने अपनी ड्यूटी मजिस्ट्रेट को बताई। ड्यूटी मजिस्ट्रेट सर्व कर्मचारी संघ के प्रदर्शनकारियों को रिहा करने के आदेश जारी कर दिए। इस बीच 150 के करीब प्रदर्शन कारी रिहा हो गए।
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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीटीएम अशोक कुमार ने हाथ जोड़कर प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखते हुए मांग पत्र देने अपील की। परंतु प्रदर्शनकारी जेल भरने की जिद पर अड़े रहे। अधिकारियों के आदेश पर प्रदर्शनकारियों को बसों में भरने का सिलसिला शुरू हुआ। इसके बाद बसें डीसी ऑफिस से निकलकर सेंट्रल जेल के लिए रवाना हुई। परंतु बसों को सिविल अस्पताल से वापस सेक्टर 10 स्टेडियम के लिए रवाना कर दिया। जहां सभी प्रदर्शनकारियों को उतारकर स्टेडियम का गेट बंद कर दिया गया।
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प्रशासन की बद इंतजामी: न महिलाओं को संभालने के लिए महिला पुलिस बल, न मिली बसें
पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए डीसी ऑफिस प्रवेश द्वार को रस्सियां लगाकर बंद तो कर दिया। परंतु महिला प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वहां पर एक भी महिला पुलिस कर्मी तैनात नहीं थी। जिसका नतीजा यह हुआ कि जब महिला प्रदर्शनकारी रस्सी पार करने की कोशिश करने लगी तो उन्हें रोकने के लिए पुरुष पुलिस कर्मियों को ही आगे आना पड़ा। जिन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों को पकड़ने का प्रयास किया। परंतु इस बीच प्रदर्शनकारी महिलाएं डीसी ऑफिस के सामने पहुंचने में कामयाब रही। बता दें कि तब जाकर महिला पुलिस बल पहुंची। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारियों को शांति पूर्ण तरीके से बसों में बैठने की बात कहने लगे तो पुलिस द्वारा पर्याप्त बसें ही नहीं मंगवाई गई। जिस कारण प्रदर्शनकारियों ने बसों के आगे बैठकर प्रशासन के खिलाफ जमकर बवाल काटा।
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डीसी पर भी लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
इस बीच प्रदर्शनकारी मौजूदा डीसी पर भ्रष्टाचार के आरोप भी जड़ दिए। इस दौरान कर्मचारियों ने बताया कि जो रजिस्ट्रियों में धांधली हो रही है। वह भी डीसी की ही देन है। साथ ही कोरोना काल में दुकानदारों के साथ किए गए भेदभाव पूर्ण रवैये को भी कर्मचारियों ने जमकर उठाया। उन्होंने कहा कि कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद कांपलेक्स को न बंद करने के बारे में बहाने ढूढे़ गए। जबकि कई मार्केट को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया।
पीटीआई अध्यापकों ने कहा हमारे हाथ में कलम तुम्हारे हाथ में डंडा
नौकरी बहाली और पेपर रद्द करने की मांगों को लेकर पीटीआई व सर्व कर्मचारी संघ का शांति पूर्वक तरीके से जेल भरो आंदोलन हंगामे में तब्दील हो गया। इस दौरान पुलिस की बांछे चढ़ने पर पीटीआई अध्यापकों ने कहा कि कमी हमारी ही है जिन्होंने तुम्हें (पुलिस) स्कूल में सही शिक्षा नहीं दी। उसी का नतीजा है कि आज कुछ पुलिस कर्मी अध्यापकों की पीटाई के लिए बार बार अपनी वर्दी व रुतबे की धौंस दिखा रहे हैं। लेकिन याद रखो तुम्हारे हाथ में डंडा है, तो हमारे हाथ में कलम है। 15 अगस्त को देश आजादी मना रहा है। वहीं 1983 पीटीआई को प्रशासन जेल में डालने का काम कर रहा है। बता दें कि जेल भरो आंदोलन के चलते बहुत से पीटीआई परिवार सहित इस आंदोलन में भाग लेने पहुंचे थे।
150 प्रदर्शनकारियों ने दी गिरफ्तारियां
सिटी थाना एसएचओ राम कुमार ने बताया कि अधिकारियों के आदेश पर सेक्टर 10 के स्टेडियम को जेल में तब्दील कर दिया गया था। जहां सभी प्रदर्शनकारियों के नाम नोट किए हैं। जिसके बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट स्टेडियम में पहुंचे। जहां प्रदर्शनकारियों ने अपनी ड्यूटी मजिस्ट्रेट को बताई। ड्यूटी मजिस्ट्रेट सर्व कर्मचारी संघ के प्रदर्शनकारियों को रिहा करने के आदेश जारी कर दिए। इस बीच 150 के करीब प्रदर्शन कारी रिहा हो गए।

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