{"_id":"5dd599db8ebc3e54c14c46f1","slug":"civic-ambala-news-knl123997104","type":"story","status":"publish","title_hn":"..सड़कों की धूल साफ करने के लिए हायर की गई स्वीपिंग मशीन पर ही फांक रही धूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
..सड़कों की धूल साफ करने के लिए हायर की गई स्वीपिंग मशीन पर ही फांक रही धूल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर परिषद ने स्वीपिंग मशीन हायर तो सड़कों पर जमी धूल साफ करने के लिए की थी। परंतु इस पर खुद ही धूल जम गई। यह मशीन पिछले दस दिन से सड़क किनारे खड़ी है। जबकि सेनेटरी इंस्पेक्टर मशीन से रोज सड़कों की सफाई करवाने का दावा कर रहे हैं। उनकी मानें तो सफाई के बाद मशीन को रोज सड़क किनारे उसी जगह खड़ा किया जाता है जहां वह अभी खड़ी है। इसी वजह से मामले में बड़ा खेल होने की बात कही जा रही है।
दरअसल नगर परिषद की ओर से सदर जोन की सड़कों की सफाई के लिए स्वीपिंग मशीन हायर की थी। अक्सर रात के समय इस मशीन से सड़कों की सफाई करवाई जाती थी। काफी दिन तक मशीन सड़कों पर चलती भी देखी गई। परंतु अब पिछले दस दिनों से मशीन फायर ब्रिगेड ऑफिस के सामने ही अंबाला-जगाधरी नेशनल हाईवे के किनारे खड़ी धूल फांक रही है। मशीन के एक ही जगह खड़े होने के कारण इस पर काफी धूल जम चुकी है। इससे साफ जाहिर है कि मशीन तकनीकी खराबी के कारण सड़क किनारे खड़ी की गई है। हालांकि नगर परिषद के एसआई इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं।
600 रुपये किलोमीटर से होता है भुगतान
सड़कों की सफाई के लिए हायर की गई मशीन के मालिक को नगर परिषद 600 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जा रहा है। मशीन रोज कितने किलोमीटर तक सड़क की सफाई कर रही है इसका अभी किसी के पास रिकार्ड नहीं है। जिस कारण लोग सड़कों की सफाई के मामले में बड़ा खेल होने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन
सफाई के नाम सरकार को लग रहा मोटा चूना: राणा
मनीष राणा ने कहा कि सफाई के नाम पर नगर निगम की तरह नगर परिषद की सेनिटेशन ब्रांच सरकार को मोटा चूना लगा रही है। राणा ने कहा कि उसने कभी स्वीपिंग मशीन से सड़कों की सफाई होते नहीं देखी। मशीन भी काफी दिन से सड़क किनारे खड़ी है। राणा ने शक जताया कि खड़ी मशीन के जरिए भी ब्रांच के कर्मचारी अपनी जेब भर रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है।
आपको कोई गलतफहमी है। स्वीपिंग मशीन से तो रोज सफाई हो रही है। उन्होंने कहा कि रात को मशीन चलाई जाती है। इसके बाद उसे वहीं खड़ा कर दिया जाता है जहां वह अभी खड़ी है। उन्होंने कहा कि 600 रुपये प्रति किलोमीटर सड़कों की सफाई करने की एवज में मालिक को भुगतान किया जाता है।
विनोद बैनीवाल, ब्रांच के सेनेटरी इंस्पेक्टर
विज्ञापन
दरअसल नगर परिषद की ओर से सदर जोन की सड़कों की सफाई के लिए स्वीपिंग मशीन हायर की थी। अक्सर रात के समय इस मशीन से सड़कों की सफाई करवाई जाती थी। काफी दिन तक मशीन सड़कों पर चलती भी देखी गई। परंतु अब पिछले दस दिनों से मशीन फायर ब्रिगेड ऑफिस के सामने ही अंबाला-जगाधरी नेशनल हाईवे के किनारे खड़ी धूल फांक रही है। मशीन के एक ही जगह खड़े होने के कारण इस पर काफी धूल जम चुकी है। इससे साफ जाहिर है कि मशीन तकनीकी खराबी के कारण सड़क किनारे खड़ी की गई है। हालांकि नगर परिषद के एसआई इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं।
विज्ञापन
600 रुपये किलोमीटर से होता है भुगतान
सड़कों की सफाई के लिए हायर की गई मशीन के मालिक को नगर परिषद 600 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जा रहा है। मशीन रोज कितने किलोमीटर तक सड़क की सफाई कर रही है इसका अभी किसी के पास रिकार्ड नहीं है। जिस कारण लोग सड़कों की सफाई के मामले में बड़ा खेल होने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन
सफाई के नाम सरकार को लग रहा मोटा चूना: राणा
मनीष राणा ने कहा कि सफाई के नाम पर नगर निगम की तरह नगर परिषद की सेनिटेशन ब्रांच सरकार को मोटा चूना लगा रही है। राणा ने कहा कि उसने कभी स्वीपिंग मशीन से सड़कों की सफाई होते नहीं देखी। मशीन भी काफी दिन से सड़क किनारे खड़ी है। राणा ने शक जताया कि खड़ी मशीन के जरिए भी ब्रांच के कर्मचारी अपनी जेब भर रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है।
आपको कोई गलतफहमी है। स्वीपिंग मशीन से तो रोज सफाई हो रही है। उन्होंने कहा कि रात को मशीन चलाई जाती है। इसके बाद उसे वहीं खड़ा कर दिया जाता है जहां वह अभी खड़ी है। उन्होंने कहा कि 600 रुपये प्रति किलोमीटर सड़कों की सफाई करने की एवज में मालिक को भुगतान किया जाता है।
विनोद बैनीवाल, ब्रांच के सेनेटरी इंस्पेक्टर