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Ambala News: ठंड में चिकन पॉक्स ने भी दी दस्तक, रोजाना चार से पांच मरीज, बच्चे अधिक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jan 2026 02:49 AM IST
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Chicken pox also knocked in the cold, four to five patients daily, more children
ठंड में चिकन पॉक्स ने भी दी दस्तक, रोजाना चार से पांच मरीज, बच्चे अधिक - फोटो : ठंड में चिकन पॉक्स ने भी दी दस्तक, रोजाना चार से पांच मरीज, बच्चे अधिक
- बच्चों में संक्रमण अधिक, रोजाना के लगभग छह मरीजों में चार बच्चे, ठंडे-शुष्क मौसम में वायरस हो रहा ज्यादा सक्रिय
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में ठंड बढ़ने के साथ ही चिकन पॉक्स के मामले बढ़ गए हैं। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना 5 से 6 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें 4 से 5 बच्चे शामिल हैं। नागरिक अस्पताल से त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप मान ने बताया कि सर्दियों में बच्चे अधिक समय घर और स्कूल में एक-दूसरे के पास रहते हैं। ऐसे में खांसने, छींकने और सीधे संपर्क के जरिये वायरस तेजी से फैलता है। उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिसका फायदा चिकन पॉक्स वायरस उठाता है इसलिए बच्चों में यह संक्रमण जल्दी फैल रहा है।

90 फीसदी बच्चे चपेट में आ रहे
चिकन पाॅक्स की चपेट में सबसे अधिक बच्चे आ रहे हैं। डॉ. प्रदीप के अनुसार, बंद कमरे और कम हवादार जगह और सर्दी संक्रमण को बढ़ा रही है। कई मामलों में एक बच्चे के संक्रमित होने के बाद कुछ समय तक पता नहीं होता उसके बाद कक्षाओं में चले जाते हैं। साथ ही अगर परिवार के किसी सदस्य को हुआ है तो 90 प्रतिशत तक अन्य सदस्यों के चपेट में आने के आसार बन जाते हैं जिससे यह फैल जाता है। इससे बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति से थोड़ा दूरी बनाकर रखना जरूरी है। चिकन पाॅक्स एक संक्रामक बीमारी है, जिसके लक्षण आमतौर पर संपर्क में आने के 10 से 21 दिन बाद शुरू हो जाते हैं और 4 से 7 दिन तक रहते हैं, जो बहुत ज्यादा खुजली का कारण बनते हैं। वेरिसेला-जोस्टर वायरस के कारण चिकन पाॅक्स होता है जिसमें पूरे शरीर पर खुजली वाले लाल दाने निकलते हैं, जो पहले छोटे उभार, फिर पानी के छाले और अंत में पपड़ी में बदल जाते हैं। साथ ही मरीज को हल्का बुखार, थकान, सिरदर्द और भूख न लगने जैसे लक्षण होते हैं।
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प्रमुख लक्षण-
तेज खुजली।
बुखार और थकान।
शरीर पर लाल दाने व फफोले।
सिरदर्द और कमजोरी।



बचाव के उपाय
डॉ. प्रदीप ने बताया कि चिकन पॉक्स के लक्षण दिखते ही चिकित्सीय उपचार लेना जरूरी है। थोड़े समय के लिए जब तक शरीर पर पानी वाले निशान हैं और उनकी सूखकर पपड़ी नहीं बन जाती तब तक उपचार लेना चाहिए और जब तक जरूरी न हों घर से बाहर न निकलें और दूसरे व्यक्ति के संपर्क में भी न आएं। खासकर बच्चों को पूरी तरह ठीक होने तक स्कूल न भेजें। खांसते-छींकते समय मुंह ढकें और हाथों की साफ-सफाई रखें।
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