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दिव्यांगता दरकिनार, जला रही शिक्षा की मशाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 May 2022 12:39 AM IST
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Bypassing disability, torch of education is burning
अंबाला। कुछ करने का जज्बा हो तो सौ बाधाएं भी बौनी साबित हो जाती हैं। विश्वास और हौसलों की उड़ान दम भरती हो तो शारीरिक दुर्बलता भी सफलता में बदल जाया करती है। यह पंक्तियां छावनी के सेक्टर- 34 हुड्डा कॉलोनी निवासी रामकुमारी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। 24 वर्षीय रामकुमारी भले ही अब एक टांग के कारण ठीक से चलने में असमर्थ हों, लेकिन वे खुद के साथ-साथ दूसरों के जीवन को भी रोशन करने की ठान चुकी हैं। इस सोच के साथ वह सेक्टर-34 के करीब 12 जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क कोचिंग दे रही हैं।
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रोजाना दो से तीन घंटे तक उन्हें शिक्षा का पाठ पढ़ा रही हैं। छावनी के आर्य गर्ल्स कॉलेज में खुद भी बीए की फाइनल ईयर की पढ़ाई कर कर हैं। पिछले तीन साल से अपने घर में जरूरतमंद बच्चों को एकत्रित कर उनमें ज्ञात की लौ जगा रही हैं। रामकुमारी की मानें तो यह बच्चे सरकारी स्कूलों में भी पढ़ाई करते हैं और शाम के समय कोचिंग लेते हैं ताकि वह अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सके। यहीं कारण है कि अपनी कक्षाओं में यह बच्चे दूसरे छात्रों से भी पढ़ाई में आगे हैं।
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पांच माह की उम्र में गलत इंजेक्शन लगने पर हुई थी पोलियो ग्रस्त
रामकुमारी ने बताया कि वह पांच माह की थी जब उसे तेज बुखार हो गया था। डॉक्टर द्वारा गलत इंजेक्शन लगवाने पर वह पोलियो ग्रस्त हो गई थी। जब से होश संभाला है तो कभी भी दिव्यांगता को अपने ऊपर हावी होने नहीं दिया। जीवन का मकसद केवल इतना है कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों के काम आ सके। रामकुमारी ने बताया कि उसके पिता केहर सिंह मजदूरी करते हैं और मां ज्ञानवती गृहिणी हैं। दो बडे़ व एक छोटा भाई है। रामकुमारी ने बताया कि जीवन में आई हर मुश्किल का डट कर सामना किया और कभी भी किसी पर बोझ नहीं बनी। अपनी प्रतिभा के बल पर कंप्यूटर भी सीखा है।
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योग के साथ करवाती हैं तरह-तरह की प्रतियोगिताएं
रामकुमारी ने बताया कि अक्सर यह समस्या रहती है कि बच्चे आते तो थे, लेकिन कुछ दिनों बाद ही आना बंद कर देते थे। ऐसे में उन्हें शिक्षा से जोड़े रखने के लिए योग के साथ-साथ तरह-तरह की प्रतियोगिताएं करवाती हैं। यहीं कारण है कि बच्चे पर लगातार उनके कोचिंग ले रहे हैं।
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