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ट्विन सिटी में भी अस्थायी दुकानों में चल रहा स्कूलों का खेल
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Fri, 31 Mar 2017 11:44 PM IST
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जिलेभर में एडमिशन के दौर में नियम कानून ताक पर रखते हुए प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें अभिभावकों पर थोपी जा रही हैं। निजी स्कूलों की किताबें अस्थायी दुकानों पर बेची जा रही हैं, जबकि इस में नियम कानून पूरी तरह से ताक पर रखकर यह किताबें बिक रही हैं। दूसरी ओर अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग इसे लेकर आंखें मूंदे बैठा है, जबकि जिला भर में यह खेल खेला जा रहा है। डीईओ उमा शर्मा ने कहा कि यदि ऐसा कुछ है, तो अभिभावक शिकायत करें, स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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अंबाला सिटी में एक नामी निजी स्कूल की किताबें बाल भवन के नजदीक बेची जा रही हैं। इसी को लेकर अभिभावकों को बताया जा रहा है कि वे एडमिशन के साथ किताबें इसी दुकान से लें। अभिभावकों के लिए इस जगह पर विभिन्न कक्षाओं की रेट लिस्ट तक दी जा रही है, जिसमें किताबें, स्टेशनरी आदि के रेट दिए गए हैं, जबकि इस पर छूट भी दी जा है। बताया जाता है कि यह सब प्राइवेट पब्लिशरों की किताबें हैं और एक कक्षा का सेट हजारों रुपये का दिया जा रहा है, जबकि इसकी कीमत कहीं कम है। यदि विरोध करते हैं, तो किताबें बेचने वाले मनमानी और दुर्व्यवहार करते हैं।
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दूसरी ओर नारायणगढ़ में भी इसी तरह से खेल खेला जा रहा है। निजी स्कूलों ने इस बार स्कूल की बजाय स्कूल के बाहर किताबें बेचने के लिए बंदोबस्त किया है। स्कूल द्वारा लिस्ट जारी की जा रही है, जिसके बाद इस दुकान से आकर किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। सभी किताबें प्राइवेट पब्लिशर्स की हैं, जबकि इनके दाम भी काफी ज्यादा हैं।
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अभिभावकों में कपिल कुमार, हरजीत सिंह, मलकीत सिंह, रजनीश जैन, महेंद्र बख्शी, दीपक अग्रवाल का कहना है कि शिक्षा विभाग को सब कुछ पता है, लेकिन जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है। विभाग चाहे तो यह सब बंद हो सकता है, लेकिन विभाग शिकायत का इंतजार करता है और हर साल मामला कागजों में उलझा दिया जाता है।