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ब्रह्मज्ञानी होकर बनें प्रभु का भक्त : गरिमा भारती
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नगर खेड़ा मंदिर में श्री कृष्ण कथामृत के दौरान लोगों को संबोधित करतीं साध्वी गरिमा। संस्थां
संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणगढ़। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से नगर खेड़ा मंदिर में पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथामृत का भव्य शुभारंभ हुआ। पहले दिन कथा व्यास गरिमा भारती ने प्रभु कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह कथा शाश्वत शांति और आत्मिक जागृति प्रदान करती है।
गरिमा भारती ने बताया कि प्रत्येक मनुष्य श्रेय मार्ग और प्रेय मार्ग के दोराहे पर खड़ा है। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के भक्त माधव दास का प्रसंग सुनाया। गरिमा भारती ने कहा, मन और आत्मा के बीच सही चयन न कर पाने की असमंजस की स्थिति ही आज के समाज में तनाव, उदासी और मनोवैज्ञानिक व्याधियों का मुख्य कारण है।
उन्होंने समझाया कि अंतरात्मा की आवाज सुनकर इन समस्याओं का समाधान संभव है। इसके लिए ब्रह्मज्ञानी संत की शरण में जाकर आत्म-साक्षात्कार करना अनिवार्य है। ब्रह्मज्ञानी बनकर ही मनुष्य सच्चा भक्त बनता है और जाति-पाति के संकीर्ण दायरों से ऊपर उठ पाता है। उन्होंने कहा कि इस अंतःकरण को जागृत करने के लिए पूर्ण सद्गुरु के सान्निध्य में प्रभु भक्ति से जुड़ना अति आवश्यक है।
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नारायणगढ़। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से नगर खेड़ा मंदिर में पांच दिवसीय श्री कृष्ण कथामृत का भव्य शुभारंभ हुआ। पहले दिन कथा व्यास गरिमा भारती ने प्रभु कथा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह कथा शाश्वत शांति और आत्मिक जागृति प्रदान करती है।
गरिमा भारती ने बताया कि प्रत्येक मनुष्य श्रेय मार्ग और प्रेय मार्ग के दोराहे पर खड़ा है। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के भक्त माधव दास का प्रसंग सुनाया। गरिमा भारती ने कहा, मन और आत्मा के बीच सही चयन न कर पाने की असमंजस की स्थिति ही आज के समाज में तनाव, उदासी और मनोवैज्ञानिक व्याधियों का मुख्य कारण है।
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उन्होंने समझाया कि अंतरात्मा की आवाज सुनकर इन समस्याओं का समाधान संभव है। इसके लिए ब्रह्मज्ञानी संत की शरण में जाकर आत्म-साक्षात्कार करना अनिवार्य है। ब्रह्मज्ञानी बनकर ही मनुष्य सच्चा भक्त बनता है और जाति-पाति के संकीर्ण दायरों से ऊपर उठ पाता है। उन्होंने कहा कि इस अंतःकरण को जागृत करने के लिए पूर्ण सद्गुरु के सान्निध्य में प्रभु भक्ति से जुड़ना अति आवश्यक है।
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