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खंजर, ब्लेड, झंडा दूध...के मायने खंगाल रही सेना
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Sun, 17 Jan 2016 01:23 AM IST
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ए-फोर साइज के सफेद कागज पर खंजर, ब्लैड, झंडा, दूध, बीड़ा, चाकू, मडला, पतंग सहित 45 आकृत्तियां ऐसी बनी हुई हैं, जो अपने आप में कुछ बयां करती है। इन आकृत्तियों के मायने क्या हैं, वो भी चिन्ह भाषा में दूसरे पेज पर अंकित है। आखिर चिन्हों की ये भाषा क्या है और येकिस ओर इशारा कर रही है। इसी को लेकर अंबाला की लोकल मिलट्री अथॉरिटी और अंबाला पुलिस छानबीन में जुटी है।
आर्मी के अति संवेदनशील इलाके से काबू किए गए संदिग्ध व्यक्ति से 14 जनवरी को विशेष चिन्ह अंकित पेज और कुछ संदिग्ध सामान बरामद हुआ था। लोकल मिलट्री अथॉरिटी की माने तो संदिग्ध व्यक्ति से काबू किए गए ये पेज एक तरह का सिंबोलिक ग्रिड है। अक्सर जासूस अपने किसी मैसेज को आकाओं तक पहुंचाने के लिए इसी तरह के चिन्हों की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। लोकल मिलट्री अथॉरिटी के एक अफसर के अनुसार जासूस खुद इस तरह के सिंबोलिक ग्रिड तैयार करते हैं। एक पेज पर वे कई तरह के चिन्हों को बनाते हैं और दूसरे पेजों पर वह चिन्हों की भाषा से ही ये समझाने का काम करते हैं कि संबंधित सिंबल के क्या मायने निकाले जाएं। सैन्य अफसर के अनुसार एक्सपर्ट जासूस के इस सिंबल ग्रिड को समझ जाते हैं और इस तरह से वे अपना मैसेज अपने आकाओं तक पहुंचा देते हैं।
उधर, सेना के विशेषज्ञों के साथ-साथ अंबाला पुलिस के विशेषज्ञ भी सिंबोलिक ग्रिड की पहेली को सुलझाने में लगे हुए हैं। इसके लिए संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है। हालांकि उसने अब तक मुंह नहीं खोला है। उल्लेखनीय है कि 14 जनवरी को सेना की विशेष टीम ने इस संदिग्ध व्यक्ति को सेना के अति संवेदनशील इलाके में घूमते पकड़ा था।
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कुछ सिंबल संदिग्ध
संदिग्ध व्यक्ति के पास से मिले इस सिंबोलिक ग्रिड में खंजर, ब्लैड, झंडा, दूध, बीड़ा, चाकू, मडला, पतंग, चरखा, हथौड़ी, टब, शुज, कलम, गेंद, गाजर, शुज, झूला, हुक्का, पत्ता, तख्ती समेत कई सिंबल मौजूद है। डीसीपी जश्रदीप सिंह रंधावा कहते हैं कि सेना के साथ-साथ पुलिस भी इसी सिंबोलिक ग्रिड की पहेली को सुलझाने में लगी है।
जांच एजेंसियों को भरोसा नहीं
पूछताछ में संदिग्ध ने अपना नाम अफजर मोमिन खान और वेस्ट बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहने वाला बताया है। बाद में उसने राजकोट का भी नाम लिया। इसलिए जांच एजेंसियों को फिलहाल उस पर भरोसा नहीं है। इसलिए दूसरे राज्यों की मदद से उसकी वेरीफिकेशन का काम जारी है।
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आर्मी के अति संवेदनशील इलाके से काबू किए गए संदिग्ध व्यक्ति से 14 जनवरी को विशेष चिन्ह अंकित पेज और कुछ संदिग्ध सामान बरामद हुआ था। लोकल मिलट्री अथॉरिटी की माने तो संदिग्ध व्यक्ति से काबू किए गए ये पेज एक तरह का सिंबोलिक ग्रिड है। अक्सर जासूस अपने किसी मैसेज को आकाओं तक पहुंचाने के लिए इसी तरह के चिन्हों की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। लोकल मिलट्री अथॉरिटी के एक अफसर के अनुसार जासूस खुद इस तरह के सिंबोलिक ग्रिड तैयार करते हैं। एक पेज पर वे कई तरह के चिन्हों को बनाते हैं और दूसरे पेजों पर वह चिन्हों की भाषा से ही ये समझाने का काम करते हैं कि संबंधित सिंबल के क्या मायने निकाले जाएं। सैन्य अफसर के अनुसार एक्सपर्ट जासूस के इस सिंबल ग्रिड को समझ जाते हैं और इस तरह से वे अपना मैसेज अपने आकाओं तक पहुंचा देते हैं।
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उधर, सेना के विशेषज्ञों के साथ-साथ अंबाला पुलिस के विशेषज्ञ भी सिंबोलिक ग्रिड की पहेली को सुलझाने में लगे हुए हैं। इसके लिए संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है। हालांकि उसने अब तक मुंह नहीं खोला है। उल्लेखनीय है कि 14 जनवरी को सेना की विशेष टीम ने इस संदिग्ध व्यक्ति को सेना के अति संवेदनशील इलाके में घूमते पकड़ा था।
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कुछ सिंबल संदिग्ध
संदिग्ध व्यक्ति के पास से मिले इस सिंबोलिक ग्रिड में खंजर, ब्लैड, झंडा, दूध, बीड़ा, चाकू, मडला, पतंग, चरखा, हथौड़ी, टब, शुज, कलम, गेंद, गाजर, शुज, झूला, हुक्का, पत्ता, तख्ती समेत कई सिंबल मौजूद है। डीसीपी जश्रदीप सिंह रंधावा कहते हैं कि सेना के साथ-साथ पुलिस भी इसी सिंबोलिक ग्रिड की पहेली को सुलझाने में लगी है।
जांच एजेंसियों को भरोसा नहीं
पूछताछ में संदिग्ध ने अपना नाम अफजर मोमिन खान और वेस्ट बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहने वाला बताया है। बाद में उसने राजकोट का भी नाम लिया। इसलिए जांच एजेंसियों को फिलहाल उस पर भरोसा नहीं है। इसलिए दूसरे राज्यों की मदद से उसकी वेरीफिकेशन का काम जारी है।