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नगर निगम : 100 दिन पूरे, विकास के एक कदम भी नहीं
अंबाला
Updated Tue, 17 Sep 2013 09:12 PM IST
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अंबाला नगर निगम चुनाव के सौ दिन से ऊपर हो गए लेकिन अब तक जनता की बुनियादी सुविधाओं के लिए एक कदम तक नहीं उठाए गए।
चुनाव के दौरान प्रत्याशियों ने जनता से हजार वादे किए लेकिन धरातल पर एक भी नहीं दिख रहा है। लोग गंदगी, स्ट्रीट लाइट, जलभराव और सीवरेज समस्याओं से परेशान है। लेकिन पार्षदों और मेयर ने सिर्फ ‘दौरे’ के सिवाय कुछ नहीं किया है। लोग रोज पार्षदों के घर व निगम दफ्तर में समस्याओं को लेकर भटक रहे हैं।
कब शुरू होंगे विकास कार्य
दो जून 2013 को नगर निगम के पार्षद के चुनाव संपन्न हुए। चार जून को परिणाम घोषित हुए और ट्विनसिटी के 20 वार्डों के लोगों को सवा तीन साल बाद फिर से पार्षद मिल गए। दो जुलाई को मेयर का चुनाव हुआ। इसके बाद एक अगस्त को सीनियर डिप्टी मेयर और मेयर का चुनाव हुआ। अब जनता का यही सवाल है कि पार्षदों को बने 100 दिन से ऊपर हो चुके हैं मगर लोगों को राहत देने के लिए विकास कार्य कब शुरू होेंगे।
समस्याएं जस की तस
शहर और छावनी की दो सौ से अधिक कालोनियों में जलभराव
पानी निकासी के लिए अब तक पंप का इंतजाम नहीं
आठ सौ से अधिक कर्मी होने के बावजूद जगह-जगह गंदगी के ढेर
नाले व नालियां गंदगी से अटीं, महीनों से सफाई नहीं
स्ट्रीट लाइटों का बुरा हाल, 70 फीसदी लाइटें खराब
अवैध निर्माण और कब्जे पर नहीं लगी रोकथाम
निगम में स्टाफ की कमी, लोगों की सुनने वाला कोई नहीं
अब तक नहीं मिली राहत
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि सौ दिन में पब्लिक को कुछ भी ऐसा नहीं मिला, जिससे वे राहत महसूस कर सके। लोग उनके घरों में आकर ये सवाल भी पूछते हैं। मगर लोगों को आश्वस्त करते हैं कि आने वाले सौ दिनों में पब्लिक काम होते देखेगी।
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दर्शना मेहता, पार्षद
जल्द शुरू होंगे विकास कार्य
यह सही है कि इस वक्त पब्लिक ज्यादा परेशान हैं और काम पूरी गति से शुरू नहीं हो पाई है। इसके लिए पीछे कई कारण है। लेकिन अब पूरी कोशिश है कि आने वाले दिनों में जनहित के लिए काम शुरू होंगे।
-रमा सिंगला, पार्षद
निगम में स्टाफ का टोटा
काम को लेकर पार्षद पूरी तरह गंभीर है। ठीक है पब्लिक अभी बड़ी राहत महसूस नहीं कर रही है। उसकी बड़ी वजह है कि नगर निगम के पास स्टाफ का जबरदस्त टोटा है। यदि सफाई, जलनिकासी, स्ट्रीटलाइट जैसे बुनियादी समस्याओं में भी सुधार हो जाए, तो पब्लिक को राहत महसूस होने लगती है।
पवन अग्रवाल, पार्षद
नीयत का अभाव
काम करने के लिए नीयत का होना बहुत जरूरी है। पहले तो मीटिंग ही म्यूनिसपल कारपोरेशन एक्ट के तहत 30 दिन की बजाए 90 दिन बाद हुई। उसमें भी पार्षदों ने समस्याओं का जबरदस्त पिटारा खोल दिया। पार्षदों ने खूब हंगामा किया, लेकिन अभी तक काम फिर भी शुरू नहीं हुए हैं।
-दलजीत सिंह सीटू, पार्षद
जनता को जवाब देना मुश्किल
पब्लिक रोजाना उनके घरों में आकर उनसे यही सवाल पूछती है कि जिस काम के लिए उन्होंने पार्षद चुना है, वो काम तो शुरू नहीं हुए हैं। इस पर हमारे पास कोई जवाब नहीं होता। अब लोगों को क्या बताए कि निगम स्तर पर ही अभी तक जनहित के विकास कार्यों के लिए कोताही बरती जा रही है।
-हिम्मत सिंह, पार्षद
अफसर गंभीर नहीं
लोगों को यही समझा रहा हूं कि जल्द ही लोगों की समस्याएं दूर हो जाएंगी। रोज नगर निगम में लोगों की शिकायतें व विकास कार्यों को लेकर संपर्क में रहता हूं। मगर अभी तक काम करवाने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
-पुष्पिंद्र हरीश, पार्षद
सफाई का हाल बुरा
मीटिंग हो गई, मगर मीटिंग में एक रुपये के डेवलपमेंट वर्क्स जैसे नालियों, सड़कों व नालों के निर्माण संबंधी कोई काम ही शामिल नहीं किए हैं। पता नहीं ये विकास कार्य कब पास होंगे और कब उनके वार्डों में विकास कार्य शुरू होंगे। सफाई और स्ट्रीट लाइट के भी बहुत बुरे हालात है।
-हरदीप कौर, पार्षद
अब तक नहीं बनी कमेटी
काम तब तक सुचारु रूप से शुरू नहीं हो सकती, जब तब सब कमेटियां नहीं बनेगी। नियमानुसार अब तक तो इन सब कमेटियों का गठन हो जाना चाहिए था। कम से कम पार्षद अपने इलाकों की समस्याओं व विकास कार्यों के प्रस्ताव इन सब कमेटियों में पास करवाकर सदन में लाते, तो काम भी शुरू होते।
-बिट्टू चावला, पार्षद, अंबाला-
समस्याओं से निजात जल्द
ऐसा नहीं होता है कि एकदम सबकुछ ठीक हो जाए। शहर व छावनी के हालात इतने खराब है कि मैं कुछ बता नहीं सकता। लेकिन मैने लगातार हर वार्ड के दौरे कर समस्याओं का जायजा लिया है। निगम के कर्मचारियों को भी फटकार लगाई है कि वे गंदगी व स्ट्रीट लाइटों का काम में सुधार करें। जनता जल्द ही महसूस करेगी कि नगर निगम लोगों के लिए राहत संबंधी बढ़िया काम कर रही है।
-रमेश लाल मल, मेयर, नगर निगम-
---
स्टाफ की कमी से परेशानी
अब स्टाफ ही नहीं होगा तो काम कैसे होगा। नए वार्ड तो पूरी तरह से अछूते वार्डों की तरह छोड़ रखे हैं। न तो सफाई की व्यवस्था, न स्ट्रीट लाइट और न जलनिकासी। लोग जब पूछते हैं कि हमने पार्षद क्यों चुना है। तो इस बात का कोई जवाब नहीं बनता। लेकिन धीरे-धीरे काम ढर्रे पर आ जाएंगे।
-दुर्गा सिंह अत्री, सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम-
दौरा नहीं सख्ती जरूरी
सिर्फ दौरे करने से कुछ नहीं होगा। मेयर साहब दौरा करते हैं, निगम कर्मियों को डांटते हैं और काम करने को कहते हैं। लेकिन कोई भी कर्मचारी मेयर साहब की बातों को गंभीरता से नहीं लेता। नगर निगम के कमिश्नर इस बात को गंभीरता से लें। क्योंकि मेयर या अन्य जनप्रतिनिधि कर्मचारियों को पब्लिक के काम के लिए ही निर्देश देते हैं न कि अपने पर्सनल काम के लिए। मेयर साहब को भी सख्ती और अपनी शक्तियाें का इस्तेमाल करना चाहिए।
-सुधीर जायसवाल, डिप्टी मेयर, नगर निगम-
लोगों की भी सुनो
छावनी निवासी मनोज कुमार, सुशील कुमार, जगदीश, कारोबारी अजय गुलाटी, विक्रम, केएल चोपड़ा, प्रदीप खेड़ा, अनीता खेड़ा, सुरेश शर्मा व शहर निवासी राजदीप सिंह सिद्धू, सुरेंद्र कौर, राजबीर सिंह, सुरेंद्र सिंह गोगू, कृपाल सिंह व पूर्व नगर परिषद प्रधान हरीश सासन कहते हैं कि नगर निगम के गठन व पार्षदों के चयन के बाद पब्लिक को बहुत ज्यादा उम्मीद थी कि अब ट्विनसिटी की तमाम बुनियादी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। मगर नगर निगम के पार्र्षद अपने पहले ही 100 दिन में जनता की नजर में फेल हो गए हैं। लोगों के अनुसार पार्षदों से अनुरोध है कि अगले 100 दिनों में वे पब्लिक हित के लिए ऐसे काम करें कि लोगों को समस्याओं से निदान मिलें और साथ ही जल्द विकास कार्य भी शुरू करवाएं।
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चुनाव के दौरान प्रत्याशियों ने जनता से हजार वादे किए लेकिन धरातल पर एक भी नहीं दिख रहा है। लोग गंदगी, स्ट्रीट लाइट, जलभराव और सीवरेज समस्याओं से परेशान है। लेकिन पार्षदों और मेयर ने सिर्फ ‘दौरे’ के सिवाय कुछ नहीं किया है। लोग रोज पार्षदों के घर व निगम दफ्तर में समस्याओं को लेकर भटक रहे हैं।
कब शुरू होंगे विकास कार्य
दो जून 2013 को नगर निगम के पार्षद के चुनाव संपन्न हुए। चार जून को परिणाम घोषित हुए और ट्विनसिटी के 20 वार्डों के लोगों को सवा तीन साल बाद फिर से पार्षद मिल गए। दो जुलाई को मेयर का चुनाव हुआ। इसके बाद एक अगस्त को सीनियर डिप्टी मेयर और मेयर का चुनाव हुआ। अब जनता का यही सवाल है कि पार्षदों को बने 100 दिन से ऊपर हो चुके हैं मगर लोगों को राहत देने के लिए विकास कार्य कब शुरू होेंगे।
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शहर और छावनी की दो सौ से अधिक कालोनियों में जलभराव
पानी निकासी के लिए अब तक पंप का इंतजाम नहीं
आठ सौ से अधिक कर्मी होने के बावजूद जगह-जगह गंदगी के ढेर
नाले व नालियां गंदगी से अटीं, महीनों से सफाई नहीं
स्ट्रीट लाइटों का बुरा हाल, 70 फीसदी लाइटें खराब
अवैध निर्माण और कब्जे पर नहीं लगी रोकथाम
निगम में स्टाफ की कमी, लोगों की सुनने वाला कोई नहीं
अब तक नहीं मिली राहत
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि सौ दिन में पब्लिक को कुछ भी ऐसा नहीं मिला, जिससे वे राहत महसूस कर सके। लोग उनके घरों में आकर ये सवाल भी पूछते हैं। मगर लोगों को आश्वस्त करते हैं कि आने वाले सौ दिनों में पब्लिक काम होते देखेगी।
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दर्शना मेहता, पार्षद
जल्द शुरू होंगे विकास कार्य
यह सही है कि इस वक्त पब्लिक ज्यादा परेशान हैं और काम पूरी गति से शुरू नहीं हो पाई है। इसके लिए पीछे कई कारण है। लेकिन अब पूरी कोशिश है कि आने वाले दिनों में जनहित के लिए काम शुरू होंगे।
-रमा सिंगला, पार्षद
निगम में स्टाफ का टोटा
काम को लेकर पार्षद पूरी तरह गंभीर है। ठीक है पब्लिक अभी बड़ी राहत महसूस नहीं कर रही है। उसकी बड़ी वजह है कि नगर निगम के पास स्टाफ का जबरदस्त टोटा है। यदि सफाई, जलनिकासी, स्ट्रीटलाइट जैसे बुनियादी समस्याओं में भी सुधार हो जाए, तो पब्लिक को राहत महसूस होने लगती है।
पवन अग्रवाल, पार्षद
नीयत का अभाव
काम करने के लिए नीयत का होना बहुत जरूरी है। पहले तो मीटिंग ही म्यूनिसपल कारपोरेशन एक्ट के तहत 30 दिन की बजाए 90 दिन बाद हुई। उसमें भी पार्षदों ने समस्याओं का जबरदस्त पिटारा खोल दिया। पार्षदों ने खूब हंगामा किया, लेकिन अभी तक काम फिर भी शुरू नहीं हुए हैं।
-दलजीत सिंह सीटू, पार्षद
जनता को जवाब देना मुश्किल
पब्लिक रोजाना उनके घरों में आकर उनसे यही सवाल पूछती है कि जिस काम के लिए उन्होंने पार्षद चुना है, वो काम तो शुरू नहीं हुए हैं। इस पर हमारे पास कोई जवाब नहीं होता। अब लोगों को क्या बताए कि निगम स्तर पर ही अभी तक जनहित के विकास कार्यों के लिए कोताही बरती जा रही है।
-हिम्मत सिंह, पार्षद
अफसर गंभीर नहीं
लोगों को यही समझा रहा हूं कि जल्द ही लोगों की समस्याएं दूर हो जाएंगी। रोज नगर निगम में लोगों की शिकायतें व विकास कार्यों को लेकर संपर्क में रहता हूं। मगर अभी तक काम करवाने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
-पुष्पिंद्र हरीश, पार्षद
सफाई का हाल बुरा
मीटिंग हो गई, मगर मीटिंग में एक रुपये के डेवलपमेंट वर्क्स जैसे नालियों, सड़कों व नालों के निर्माण संबंधी कोई काम ही शामिल नहीं किए हैं। पता नहीं ये विकास कार्य कब पास होंगे और कब उनके वार्डों में विकास कार्य शुरू होंगे। सफाई और स्ट्रीट लाइट के भी बहुत बुरे हालात है।
-हरदीप कौर, पार्षद
अब तक नहीं बनी कमेटी
काम तब तक सुचारु रूप से शुरू नहीं हो सकती, जब तब सब कमेटियां नहीं बनेगी। नियमानुसार अब तक तो इन सब कमेटियों का गठन हो जाना चाहिए था। कम से कम पार्षद अपने इलाकों की समस्याओं व विकास कार्यों के प्रस्ताव इन सब कमेटियों में पास करवाकर सदन में लाते, तो काम भी शुरू होते।
-बिट्टू चावला, पार्षद, अंबाला-
समस्याओं से निजात जल्द
ऐसा नहीं होता है कि एकदम सबकुछ ठीक हो जाए। शहर व छावनी के हालात इतने खराब है कि मैं कुछ बता नहीं सकता। लेकिन मैने लगातार हर वार्ड के दौरे कर समस्याओं का जायजा लिया है। निगम के कर्मचारियों को भी फटकार लगाई है कि वे गंदगी व स्ट्रीट लाइटों का काम में सुधार करें। जनता जल्द ही महसूस करेगी कि नगर निगम लोगों के लिए राहत संबंधी बढ़िया काम कर रही है।
-रमेश लाल मल, मेयर, नगर निगम-
---
स्टाफ की कमी से परेशानी
अब स्टाफ ही नहीं होगा तो काम कैसे होगा। नए वार्ड तो पूरी तरह से अछूते वार्डों की तरह छोड़ रखे हैं। न तो सफाई की व्यवस्था, न स्ट्रीट लाइट और न जलनिकासी। लोग जब पूछते हैं कि हमने पार्षद क्यों चुना है। तो इस बात का कोई जवाब नहीं बनता। लेकिन धीरे-धीरे काम ढर्रे पर आ जाएंगे।
-दुर्गा सिंह अत्री, सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम-
दौरा नहीं सख्ती जरूरी
सिर्फ दौरे करने से कुछ नहीं होगा। मेयर साहब दौरा करते हैं, निगम कर्मियों को डांटते हैं और काम करने को कहते हैं। लेकिन कोई भी कर्मचारी मेयर साहब की बातों को गंभीरता से नहीं लेता। नगर निगम के कमिश्नर इस बात को गंभीरता से लें। क्योंकि मेयर या अन्य जनप्रतिनिधि कर्मचारियों को पब्लिक के काम के लिए ही निर्देश देते हैं न कि अपने पर्सनल काम के लिए। मेयर साहब को भी सख्ती और अपनी शक्तियाें का इस्तेमाल करना चाहिए।
-सुधीर जायसवाल, डिप्टी मेयर, नगर निगम-
लोगों की भी सुनो
छावनी निवासी मनोज कुमार, सुशील कुमार, जगदीश, कारोबारी अजय गुलाटी, विक्रम, केएल चोपड़ा, प्रदीप खेड़ा, अनीता खेड़ा, सुरेश शर्मा व शहर निवासी राजदीप सिंह सिद्धू, सुरेंद्र कौर, राजबीर सिंह, सुरेंद्र सिंह गोगू, कृपाल सिंह व पूर्व नगर परिषद प्रधान हरीश सासन कहते हैं कि नगर निगम के गठन व पार्षदों के चयन के बाद पब्लिक को बहुत ज्यादा उम्मीद थी कि अब ट्विनसिटी की तमाम बुनियादी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। मगर नगर निगम के पार्र्षद अपने पहले ही 100 दिन में जनता की नजर में फेल हो गए हैं। लोगों के अनुसार पार्षदों से अनुरोध है कि अगले 100 दिनों में वे पब्लिक हित के लिए ऐसे काम करें कि लोगों को समस्याओं से निदान मिलें और साथ ही जल्द विकास कार्य भी शुरू करवाएं।