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Ambala News: छह माह की कड़ी मशक्कत के बाद आरोपी डेयरी संचालक तक पहुंची सीआईए
Fri, 23 Jan 2026 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 23 Jan 2026 01:55 AM IST
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जीआरपी की गिरफ्त में डेयरी संचालक। जीआरपी
अंबाला। 14 वर्षीय बच्चे की बाजू कटने और उपचार देने के बजाय उल्टा सड़क पर लावारिस छोड़ने वाले आरोपी को आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंचा ही दिया गया। लगातार छह माह तक आरोपी अनिल की तलाश में जुटे सीआईए प्रभारी सत्य प्रकाश को इस उपलब्धि पर एसपी रेलवे नितिका गहलोत ने पीठ थपथपाई है और इसे दूसरे कर्मचारियों के लिए एक मिसाल बताया है ताकि दूसरे कर्मचारी भी निष्काम ड्यूटी करते हुए अपराधियों पर शिकंजा कसने में मदद करें।
जुलाई से शुरु हुई जांच, दिसंबर तक चली
बच्चे को न्याय दिलाने की यह कार्रवाई जुलाई 2025 में उस समय आरंभ हुई, जब मामले की सूचना पर एसपी जींद एक दिन पीजीआई रोहतक में पहुंचे तो उनके संज्ञान में यह मामला आया। उन्होंने तुरंत एसपी रेलवे नितिका गहलोत को मामले की जानकारी दी और एसपी रेलवे ने इस मामले की तह तक जाने की जिम्मेदार तत्कालीन बहादुरगढ़ प्रभारी सत्य प्रकाश को सौंपी जोकि मौजूदा समय में अंबाला जीआरपी सीआईए प्रभारी के तौर पर तैनात हैं। इस जांच का पटाक्षेप 30 दिसंबर को हुआ, जब आरोपी को यूपी में गौतमबुध नगर के नजदीक एक बस्ती से काबू किया गया। आरोपी अनिल ने अपना आरोप भी कबूल लिया जोकि अब झज्जर की जेल में सजा काट रहा है।
12 हजार किमी सहित खंगाले 70 से अधिक स्टेशन
पीजीआई रोहतक में उपचाराधीन बच्चे के आरोपी तक पहुंचने के लिए सीआईए प्रभारी को लगभग 12 हजार किमी से अधिक का सफर करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने हिमाचल से लेकर हरियाणा, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के लगभग 70 से अधिक सभी छोटे-बड़े रेलवे स्टेशनों का खंगाला और बच्चे की याददाश्त को तेज करने के लिए उन्हें फोटो भी भेजे, आखिरकार कड़ियां जुड़ गई और सीआईए प्रभारी आरोपी तक पहुंच गए।
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मई 2025 में परिजनों से बिछड़ गया था बच्चा
घटना मई 2025 की है। जब फरक्का एक्सप्रेस में जींद से किशनगंज (बिहार) जाने के दौरान बच्चा अपने पिता से बिछड़ गया। इस दौरान डेयरी संचालक अनिल को स्टेशन पर बच्चा बेसहारा हालत में नजर आया और वो उसे अपने साथ ले गया। उससे काफी कष्टदायक काम करवाया गया। इस दौरान एक दिन चारे की मशीन में उसकी बाजू कट गई तो अनिल घबरा गया। उसने चारे सहित कटी बाजू को तो नदी में बहा दिया और बिना उपचार के ही बच्चे को अपनी डेयरी से दूर सड़क पर छोड़ दिया, इसके बाद बच्चा एक सज्जन की मदद से अस्पताल पहुंचा।
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जुलाई से शुरु हुई जांच, दिसंबर तक चली
बच्चे को न्याय दिलाने की यह कार्रवाई जुलाई 2025 में उस समय आरंभ हुई, जब मामले की सूचना पर एसपी जींद एक दिन पीजीआई रोहतक में पहुंचे तो उनके संज्ञान में यह मामला आया। उन्होंने तुरंत एसपी रेलवे नितिका गहलोत को मामले की जानकारी दी और एसपी रेलवे ने इस मामले की तह तक जाने की जिम्मेदार तत्कालीन बहादुरगढ़ प्रभारी सत्य प्रकाश को सौंपी जोकि मौजूदा समय में अंबाला जीआरपी सीआईए प्रभारी के तौर पर तैनात हैं। इस जांच का पटाक्षेप 30 दिसंबर को हुआ, जब आरोपी को यूपी में गौतमबुध नगर के नजदीक एक बस्ती से काबू किया गया। आरोपी अनिल ने अपना आरोप भी कबूल लिया जोकि अब झज्जर की जेल में सजा काट रहा है।
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12 हजार किमी सहित खंगाले 70 से अधिक स्टेशन
पीजीआई रोहतक में उपचाराधीन बच्चे के आरोपी तक पहुंचने के लिए सीआईए प्रभारी को लगभग 12 हजार किमी से अधिक का सफर करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने हिमाचल से लेकर हरियाणा, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के लगभग 70 से अधिक सभी छोटे-बड़े रेलवे स्टेशनों का खंगाला और बच्चे की याददाश्त को तेज करने के लिए उन्हें फोटो भी भेजे, आखिरकार कड़ियां जुड़ गई और सीआईए प्रभारी आरोपी तक पहुंच गए।
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मई 2025 में परिजनों से बिछड़ गया था बच्चा
घटना मई 2025 की है। जब फरक्का एक्सप्रेस में जींद से किशनगंज (बिहार) जाने के दौरान बच्चा अपने पिता से बिछड़ गया। इस दौरान डेयरी संचालक अनिल को स्टेशन पर बच्चा बेसहारा हालत में नजर आया और वो उसे अपने साथ ले गया। उससे काफी कष्टदायक काम करवाया गया। इस दौरान एक दिन चारे की मशीन में उसकी बाजू कट गई तो अनिल घबरा गया। उसने चारे सहित कटी बाजू को तो नदी में बहा दिया और बिना उपचार के ही बच्चे को अपनी डेयरी से दूर सड़क पर छोड़ दिया, इसके बाद बच्चा एक सज्जन की मदद से अस्पताल पहुंचा।

जीआरपी की गिरफ्त में डेयरी संचालक। जीआरपी