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प्रभु नाम पर लगा क्षण देता है सुख : साक्षी गाेपाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। शहर के सेक्टर 9 स्थित अग्रवाल भवन में कथा के दूसरे दिन साक्षी गोपाल दास ने श्रीमद् भागवत कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब तक भगवान श्रीकृष्ण में अपनी लगन नहीं लगाएगा, तब तक उसके जीवन में शांति आने वाली नहीं है।
भगवान के नाम पर लगाया गया हर क्षण के बदले भगवान उसको हर प्रकार की सुख सुविधा प्रदान करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा की गई माखन चोरी और रासलीलाओं की कथा का भी एक अनोखा आनंद है। इसका महत्व कथा सुनकर ही प्राप्त हो सकता है। जो जीव धरती पर आया है। उसका जीवन तभी सफल हो सकता है, यदि वह अपने जीवन का कुछ भाग भगवान की शरण में लगा ले तो उसके कई जन्मों के पाप तक नष्ट हो जाते हैं।
महाराज ने कथा प्रसंग के दौरान बताया कि रंभा स्वर्ग लकी सुनहरी सुखदेव महाराज को कह रही है जिसने मानुष जन्म पाकर मुझ जैसी सुंदर का भोग नहीं किया उसका जीवन बेकार है। सुखदेव महाराज ने जब वेदव्यास के शिष्य की ओर से दो श्लोक सुनी तब सुखदेव जी बहुत खुश हुए तथा सोचने लगे भगवान की सरकार रूप में तो बहुत आनंद है। मैं निराकार की भक्ति को छोड़ सरकार भगवान की भक्ति करूंगा। कथा के समापन पर सभी भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती में भाग लिया।
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अंबाला सिटी। शहर के सेक्टर 9 स्थित अग्रवाल भवन में कथा के दूसरे दिन साक्षी गोपाल दास ने श्रीमद् भागवत कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब तक भगवान श्रीकृष्ण में अपनी लगन नहीं लगाएगा, तब तक उसके जीवन में शांति आने वाली नहीं है।
भगवान के नाम पर लगाया गया हर क्षण के बदले भगवान उसको हर प्रकार की सुख सुविधा प्रदान करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा की गई माखन चोरी और रासलीलाओं की कथा का भी एक अनोखा आनंद है। इसका महत्व कथा सुनकर ही प्राप्त हो सकता है। जो जीव धरती पर आया है। उसका जीवन तभी सफल हो सकता है, यदि वह अपने जीवन का कुछ भाग भगवान की शरण में लगा ले तो उसके कई जन्मों के पाप तक नष्ट हो जाते हैं।
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महाराज ने कथा प्रसंग के दौरान बताया कि रंभा स्वर्ग लकी सुनहरी सुखदेव महाराज को कह रही है जिसने मानुष जन्म पाकर मुझ जैसी सुंदर का भोग नहीं किया उसका जीवन बेकार है। सुखदेव महाराज ने जब वेदव्यास के शिष्य की ओर से दो श्लोक सुनी तब सुखदेव जी बहुत खुश हुए तथा सोचने लगे भगवान की सरकार रूप में तो बहुत आनंद है। मैं निराकार की भक्ति को छोड़ सरकार भगवान की भक्ति करूंगा। कथा के समापन पर सभी भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण की आरती में भाग लिया।
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