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किराये पर शिकंजा कसने में आरटीए नाकाम
Ambala
Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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अंबाला। आटो रिक्शा में आने-जाने वालों को लगता है प्रशासन ने उनके हाल पर छोड़ दिया है। आटो रिक्शा चालकों की मनमानी रोकने में प्रशासन नाकाम है और आरटीए अधिकारी भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। प्रशासनिक सुस्ती का खामियाजा आम जनता भुगत रही है और राहत की राह दिखाई नहीं दे रही।
उल्लेखनीय है कि डीजल रेटों में हुई बढ़ोतरी के बाद कैंट के आटो चालकों ने अपने किराये को दोगुना कर दिया था। इस को लेकर काफी बवाल भी हुआ। प्रशासन ने भी इस मामले में तेजी दिखाई और आरटीए को निर्देश दिए कि आटो चालकों यूनियनों के प्रतिनिधियों से बैठक कर बढ़ाए गए किराये का मामला सुलझाया जाय। इस मामले में आरटीए ने भी यूनियन प्रतिनिधियों को अपने कार्यालय में बुलाया और कहा कि किराया नियमों के अनुसार ही बढ़ाया जाए और किराये की बढ़ोतरी को बंद किया जाए। इस पर आटो चालकों ने लिखित में आरटीए को आश्वासन दिया कि उन्होंने कोई रेट नहीं बढ़ाया है। इसके बाद आरटीए ने भी इस बारे में जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों को बता दिया। लेकिन इसके बावजूद आटो चालकों की मनमानी नहीं रुकी और उन्होंने किराया दोगुना ही रखा। इस को लेकर कई बार सवारियों से झड़पें भी हुईं। लेकिन प्रशासन गहरी नींद में सोया रहा। अब इन आटो चालकों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि उन्होंने किराये के दो स्लैब बना डाले हैं।
इनसेट
अपने स्तर पर रेट फिक्स नहीं कर सकते
अंबाला। नियमों की मानें, तो इस मामले में आटो चालक अपने तौर पर ही किराया फिक्स नहीं कर सकते। अधिकारियों की मानें, तो इसके लिए आरटीए विभाग नजर रखता है। बताया जाता है कि प्रति किलोमीटर के हिसाब से किराया वसूला जाना चाहिए। यदि किराया बढ़ाते हैं, तो यह दोगुना या फिर डबल स्लैब में नहीं हो सकता। लेकिन कैंट में आटो चालकों की मनमानी दिखा रही है कि वे अधिकारियों पर किस तरह से हावी हैं। आखिर क्यों अधिकारी इनकी मनमानी पर रोक नहीं लगा सकते।
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‘यदि सवारियों से झगड़ा होता है, तो यह पुलिस केस है। रही बात किराये में बढ़ोतरी की चैक करवाते रहते हैं। यदि मनमानी की बात है कि तो इसे फिर से चैक करवाऊंगा।’
- आरके सिंह, आरटीए सचिव, अंबाला
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उल्लेखनीय है कि डीजल रेटों में हुई बढ़ोतरी के बाद कैंट के आटो चालकों ने अपने किराये को दोगुना कर दिया था। इस को लेकर काफी बवाल भी हुआ। प्रशासन ने भी इस मामले में तेजी दिखाई और आरटीए को निर्देश दिए कि आटो चालकों यूनियनों के प्रतिनिधियों से बैठक कर बढ़ाए गए किराये का मामला सुलझाया जाय। इस मामले में आरटीए ने भी यूनियन प्रतिनिधियों को अपने कार्यालय में बुलाया और कहा कि किराया नियमों के अनुसार ही बढ़ाया जाए और किराये की बढ़ोतरी को बंद किया जाए। इस पर आटो चालकों ने लिखित में आरटीए को आश्वासन दिया कि उन्होंने कोई रेट नहीं बढ़ाया है। इसके बाद आरटीए ने भी इस बारे में जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों को बता दिया। लेकिन इसके बावजूद आटो चालकों की मनमानी नहीं रुकी और उन्होंने किराया दोगुना ही रखा। इस को लेकर कई बार सवारियों से झड़पें भी हुईं। लेकिन प्रशासन गहरी नींद में सोया रहा। अब इन आटो चालकों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि उन्होंने किराये के दो स्लैब बना डाले हैं।
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अपने स्तर पर रेट फिक्स नहीं कर सकते
अंबाला। नियमों की मानें, तो इस मामले में आटो चालक अपने तौर पर ही किराया फिक्स नहीं कर सकते। अधिकारियों की मानें, तो इसके लिए आरटीए विभाग नजर रखता है। बताया जाता है कि प्रति किलोमीटर के हिसाब से किराया वसूला जाना चाहिए। यदि किराया बढ़ाते हैं, तो यह दोगुना या फिर डबल स्लैब में नहीं हो सकता। लेकिन कैंट में आटो चालकों की मनमानी दिखा रही है कि वे अधिकारियों पर किस तरह से हावी हैं। आखिर क्यों अधिकारी इनकी मनमानी पर रोक नहीं लगा सकते।
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‘यदि सवारियों से झगड़ा होता है, तो यह पुलिस केस है। रही बात किराये में बढ़ोतरी की चैक करवाते रहते हैं। यदि मनमानी की बात है कि तो इसे फिर से चैक करवाऊंगा।’
- आरके सिंह, आरटीए सचिव, अंबाला