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शिक्षा विभाग का दावा, सुधर गए हैं हालात, नहीं तो टेंडर जिसे दिया, उस पर कार्रवाई हो सकती है
Updated Wed, 26 Jul 2017 12:55 AM IST
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अंबाला कैंट। शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किए गए मासिक टेस्ट में जहां प्रश्नपत्रों की कम संख्या से परेशानी बढ़ रही है, वहीं इसे पूरा करने के लिए गुरुजी भटक रहे हैं। हालांकि शिक्षा विभाग का कहना है कि हालात सुधर रहे हैं, जबकि अध्यापक संघ का दावा है कि विद्यार्थियों के पिछले साल के आंकड़ों पर ही यह पर्चे छपवाकर भेजे जा रहे हैं, जिससे दिक्कत बढ़ी है।
सरकारी स्कूलों में इन दिनों मासिक टेस्ट लिए जा रहे हैं। लेकिन कईं स्कूलों में परेशानी यह आ रही है कि जितने विद्यार्थी हैं, उतने पर्चे नहीं मिल रहे हैं। इसी को लेकर गुुरुजी भी शिक्षा विभाग को कोस रहे हैं, जबकि इन प्रश्नपत्रों की संख्या को पूरा करने के लिए इसकी फोटोकॉपी करवानी पड़ रही है। शिक्षा विभाग की जरूरत को देखते हुए फोटोकॉपी के रेट भी बढ़ा दिए गए हैं, जिसका सारा बोझ गुरुजी की जेब पर पड़ रहा है। बताया जाता है कि हर खंड में यही दिक्कतें आ रही हैं, जबकि इसकी तैयारियां पूरी तरह से नहीं की गई। अध्यापक संघ की मानें, तो स्कूलों में न तो पूरी तरह से किताबें पहुंची हैं और न ही विद्यार्थियों की पूरी तैयारी है, जिसके चलते यह मासिक टेस्ट पर भी सवाल उठ रहे हैं। साथ ही दावा किया जा रहा है कि प्रश्नपत्रों की कम संख्या का कारण बीते शिक्षा सत्र के विद्यार्थी आंकड़े हैं, जिसके आधार पर यह पर्चे छापे जा रहे हैं। सरकारी स्कूलों में कक्षा अनुसार विद्यार्थियों की संख्या बदल चुकी है, जबकि विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में गुरुजी की जेब से जो खर्च हो रहा है, वह उसे वापस मिलेगा भी या नहीं, इस पर भी संशय है।
शिक्षा विभाग ने बिना किसी तैयारी के ही राजकीय स्कूलों में यह टेस्ट लेने शुरू कर दिए हैं। पिछले साल के विद्यार्थी आंकड़ों पर ही प्रश्नपत्र छापे जा रहे हैं, जबकि अब यह संख्या बढ़ चुकी है या फिर घट चुकी है। यही कारण है कि जिन कक्षाओं में संख्या बढ़ी है, वहां पर ऐसी दिक्कतें आ रही हैं।
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- मोहन परोचा, जिला सचिव, हरियाणा राजकीय अनुसूचित जाति अध्यापक संघ, अंबाला
कुछ सेंटरों पर यह दिक्कत आई थी, जिसे सुलझा लिया गया है। यदि कहीं पर फिर से यह दिक्कत आती है, तो उच्चाधिकारियों को बताया जाएगा, जबकि जिसे इस काम का टेंडर दिया गया है, उस पर भी कार्रवाई हो सकती है। परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को किसी तरह की दिक्कतें नहीं आने दी जाएंगी।
- उमा शर्मा, डीईओ अंबाला
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सरकारी स्कूलों में इन दिनों मासिक टेस्ट लिए जा रहे हैं। लेकिन कईं स्कूलों में परेशानी यह आ रही है कि जितने विद्यार्थी हैं, उतने पर्चे नहीं मिल रहे हैं। इसी को लेकर गुुरुजी भी शिक्षा विभाग को कोस रहे हैं, जबकि इन प्रश्नपत्रों की संख्या को पूरा करने के लिए इसकी फोटोकॉपी करवानी पड़ रही है। शिक्षा विभाग की जरूरत को देखते हुए फोटोकॉपी के रेट भी बढ़ा दिए गए हैं, जिसका सारा बोझ गुरुजी की जेब पर पड़ रहा है। बताया जाता है कि हर खंड में यही दिक्कतें आ रही हैं, जबकि इसकी तैयारियां पूरी तरह से नहीं की गई। अध्यापक संघ की मानें, तो स्कूलों में न तो पूरी तरह से किताबें पहुंची हैं और न ही विद्यार्थियों की पूरी तैयारी है, जिसके चलते यह मासिक टेस्ट पर भी सवाल उठ रहे हैं। साथ ही दावा किया जा रहा है कि प्रश्नपत्रों की कम संख्या का कारण बीते शिक्षा सत्र के विद्यार्थी आंकड़े हैं, जिसके आधार पर यह पर्चे छापे जा रहे हैं। सरकारी स्कूलों में कक्षा अनुसार विद्यार्थियों की संख्या बदल चुकी है, जबकि विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में गुरुजी की जेब से जो खर्च हो रहा है, वह उसे वापस मिलेगा भी या नहीं, इस पर भी संशय है।
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शिक्षा विभाग ने बिना किसी तैयारी के ही राजकीय स्कूलों में यह टेस्ट लेने शुरू कर दिए हैं। पिछले साल के विद्यार्थी आंकड़ों पर ही प्रश्नपत्र छापे जा रहे हैं, जबकि अब यह संख्या बढ़ चुकी है या फिर घट चुकी है। यही कारण है कि जिन कक्षाओं में संख्या बढ़ी है, वहां पर ऐसी दिक्कतें आ रही हैं।
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- मोहन परोचा, जिला सचिव, हरियाणा राजकीय अनुसूचित जाति अध्यापक संघ, अंबाला
कुछ सेंटरों पर यह दिक्कत आई थी, जिसे सुलझा लिया गया है। यदि कहीं पर फिर से यह दिक्कत आती है, तो उच्चाधिकारियों को बताया जाएगा, जबकि जिसे इस काम का टेंडर दिया गया है, उस पर भी कार्रवाई हो सकती है। परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को किसी तरह की दिक्कतें नहीं आने दी जाएंगी।
- उमा शर्मा, डीईओ अंबाला