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- टिन की चादरों से बने शैड के नीचे तपती गर्मी में शिक्षा लेने को मजबूर हैं बच्चे

Sat, 26 May 2018 01:28 AM IST
Updated Sat, 26 May 2018 01:28 AM IST
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- टिन की चादरों से बने शैड के नीचे तपती गर्मी में शिक्षा लेने को मजबूर हैं बच्चे
टन शेड के नीचे फर्श पर बैठ रहे बच्चे, स्कूलों में पंखे और पीने को पानी नहीं, गर्मी से परेशान बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट/नारायणगढ़/मुलाना।
जिले में शुक्रवार को पारा 42.7 डिग्री पर पहुंच गया। शिक्षा विभाग ने भले ही स्कूलों के समय में बदलाव कर दिया हो, लेकिन सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाएं ऐसी हैं कि कहीं पर विद्यार्थी टिन शेड के नीचे फर्श पर पढ़ने को मजबूर हैं तो कहीं पर पंखे ही नहीं है। और तो और गर्मी में सूख रहे हलक को तर करने के भी स्कूलों में इंतजाम नहीं है। ऐसे में विभाग ही बताएं कि बच्चे किस तरह गर्मी से बचाव करेंगे। बच्चों की समस्या यहीं पर खत्म नहीं होती। बेशक स्कूल की छुट्टी का समय एक बजे हो गया हो पर बच्चे भरी दोपहरी में घर पहुंच रहे हैं। दोपहर को आग उगल रहे सूरज के प्रकोप से बचाने के लिए और अधूरी व्यवस्थाओं के चलते गर्मी से परेशान बच्चे और अभिभावक अवकाश की मांग कर रहे हैं। अभिभावकों और बच्चों का कहना है कि गर्मी को देखते हुए स्कूलों में अवकाश होना चाहिए ताकि कुछ राहत मिल सके। यह हालात उस समय हैं, जब सरकार ने गर्मियों के इन दिनों में बच्चों को गर्मी से बचाव करने के निर्देश दिए हैं और व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा है। अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को कई स्कूलों का दौरा किया, तो यह पाया कि जिस तरह से गर्मी तेवर दिखा रही है, उससे बच्चों की जान पर खतरा है। उधर, प्रशासन द्वारा दोपहर को एक बजे बच्चों की छुट्टी करने के आदेश दिए गए हैं। मगर छुट्टी के बाद घर पहुंचते-पहुंचते डेढ़ से दो बजे का समय हो जाता है और ऐसे समय में गर्मी चरम पर होती है।


राजकीय माध्यमिक विद्यालय कालाअंब
इस स्कूल में पहली से आठवीं तक के करीब 600 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पर्याप्त कमरे न होने के कारण कई बच्चों को बरामदे और शेड के नीचे बैठना पड़ता है। यही नहीं स्कूल में करीब 40-42 ही डेस्क हैं, जबकि अन्य बच्चों को पूरे टाट तक उपलब्ध नहीं है। मिड डे मील में अनाज के लिए इस्तेमाल होने वाले टाट से ही यह बंदोबस्त किया जाता है। स्कूल में पीने के पानी की समस्या भी लगातार है। कई बार तो अध्यापक जेब से खर्च कर पीने के पानी का बंदोबस्त कराते हैं। मुख्याध्यापक नरेश कुमार का कहना है कि वे इस समस्या के बारे उच्चाधिकारियों को कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा। पर्याप्त जगह न होने की वजह से काफी परेशानी हो रही है।
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राजकीय मिडल स्कूल शाहपुर
इस स्कूल में सिर्फ तीन कमरों में ही पंखे लगे हैं। जिस तरह से गर्मी पड़ रही है, उसे देखते जिन कमरों में पंखे हैं, वहां पर तो कुछ राहत है, लेकिन अन्य कमरों में हालात बुरे हैं। ऐसे में बच्चों को इस झुलसा देने वाली गर्मी में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। दूसरी समस्या पीने के पानी की है, जिससे सभी परेशान हैं। मुख्याध्यापक हरकेश कुमार का कहना है कि पंखों की समस्या के बारे शिक्षा विभाग को भी अवगत कराया गया है लेकिन समाधान नहीं हो रहा। सरपंच रामसिंह का कहना है कि स्कूल में पानी की भी समस्या रहती है, वहीं बिजली की भी समस्या भी है। इसको लेकर करीब सात माह से कई बार राज्यमंत्री नायब सैनी को भी अवगत करवाया गया। राज्यमंत्री ने बिजली विभाग के अधिकारियों को निर्देश तो दिए, लेकिन समस्या आज भी वही है।
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राजकीय माध्यमिक विद्यालय नन्हेड़ा
स्कूल में एक हॉल है जिसमें तीन कक्षाएं लगती हैं। बरामदे में भी कक्षा लगाई जाती है। स्कूल के हॉल में सिर्फ तीन पंखे ही लगे हैं, जबकि बरामदे में कोई पंखा नहीं है। हालात यह हैं कि बरामदे में लगने वाली कक्षा के विद्यार्थी जब तपिश से परेशानी होती हैं, तो किसी तरह से स्कूल के हॉल में इन बच्चों को एडजस्ट किया जाता है। इनके बैठने तक के लिए बेंच नहीं मिलते। उल्लेखनीय है कि स्कूल दो बिल्डिंग में हैं, जबकि इस बिल्डिंग में तीन कक्षाएं लगती हैं, यहां गर्मी में काफी दिक्कतें हैं।


राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय होली
गांव के राजकीय स्कूल में पेड़ के नीचे बैठकर बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। इस स्कूल के कमरों में पंखे ही नहीं हैं जबकि स्कूल में जेनरेटर सेट भी बंद है। स्थिति को लेकर जब बात की गई तो पता चला कि काफी समय से ऐसे ही हालात हैं, जबकि बच्चों को गर्मी में राहत मिले, इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं है। हालात यह हैं कि बच्चों को भीषण गर्मी में ही पढ़ना पड़ रहा है, जबकि शिक्षा विभाग बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए जागरूक कर रहा है।


उपायुक्त के आदेश अनुसार अत्यधिक तापमान और लू के कारण जिले के सभी राजकीय, मान्यता प्राप्त स्कूलों का समय 31 मई तक सुबह सात से दोपहर एक बजे तक करने के निर्देश दिये हैं। इन निर्देशों की दृढ़ता से अनुपालना अपने-अपने खंड के सभी विद्यालय को सुनिश्चित करवाने बारे भी कहा है। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाएं बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
- उमा शर्मा, डीईओ अंबाला
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