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- डीजी के निर्देश के बाद 3
Updated Sun, 20 May 2018 01:16 AM IST
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डीजी के निर्देश के बाद 38 परिचालकों ने वापस संभाला मूल पद
प्रदेश में 1624 नए चालक और 410 लिपिक की नियुक्ति के बाद कार्यालयों में कार्यरत परिचालकों को उनके मूल पदों पर भेजने के दिए थे निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
अंबाला डिपो में कार्यालय का काम देख रहे 38 परिचालक को विभाग ने उनके मूल पदों पर भेज दिया है। विभाग की तरफ से जारी 38 कंडक्टरों की लिस्ट में सबसे ज्यादा 1985, 1989, 1993 बैच के परिचालक शामिल हैं, जो लंबे समय से कार्यालयों में काम कर रहे थे। दरअसल प्रदेश में 1624 नए चालक और 410 लिपिकों की पदों पर नियुक्ति के बाद विभाग महानिदेशक ने डिपो महाप्रबंधकों को निर्देश दिए थे कि जिन परिचालकों से लिपिक अथवा अतिरिक्त पद पर कार्य लिया जा रहा है उन्हें रूटों पर लगाया जाए। इसके तहत अंबाला डिपो ने इन परिचालकों को वापस अपने मूल पदों पर भेज दिया।
वर्कशॉप में अभी भी कर्मचारियों की कमी
बेशक डिपो में 38 परिचालक को उनके मूल पदों पर भेजने से परिचालकों की संख्या 230 हो गई हो, मगर वर्कशॉप में अभी भी कर्मचारियों का कमी है जिनके अभाव में काफी संख्या में बसें सर्विस के लिए खड़ी रहती हैं। सूत्रों के अनुसार मौजूदा समय में वर्कशॉप में हेड मेकेनिकल एक, मेकेनिकल 130 की बजाय 10, इंजीनियर 12 की जगह चार, अस्सिटेंट 20, एसएसआई एक, हेल्पर 55 की जगह दो, फोरमैन दो और एक वर्कशॉप मैनेजर काम कर रहे हैं।
डिपो को रोजाना 12 लाख रुपये का राजस्व
विभागीय आंकड़ों के अनुसार डिपो में 165 बसें हैं जिनमें से 145 ऑनरूट जबकि 250 बसों की जरूरत है। इन्हीं बसों से डिपो को रोजाना 12 लाख रुपये का राजस्व हो रहा है। बावजूद इसके यात्रियों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। हालांकि अभी हाल ही में डिपो की तरफ से 25 बसों का प्रपोजल भेजा गया था जिसमें 22 बसों की मंजूरी मिल चुकी है। मगर पिछले 2-3 साल से डिपो में कोई नई बस शामिल नहीं हो पाई है। वहीं अगर 22 बसें समय से आ जाए तो यात्रियों को काफी राहत मिलेगी।
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आठ बसों की पासिंग न होने से रोजाना डेढ़ लाख का नुकसान
अंबाला सिटी। पासिंग के इंतजार में रोडवेज की आठ बसें डिपो में शुक्रवार से खड़ी हैं। बसों के रूट पर न चलने से जहां रोजाना इन बसों से सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी हुई वहीं विभाग को भी लाखों का नुकसान हो रहा है। कैथल, दिल्ली, कैथल-चंडीगढ़-कालका, अंबाला-लाडवा-यमुनानगर, दिल्ली-पटियाला, बराड़ा-लुधियाना-दिल्ली, हिमाचल, जालंधर-दिल्ली रूट की बसों की पासिंग 17 मई को खत्म हो गई थी। इनकी पासिंग का जिम्मा एडीसी का था। मगर एडीसी के न होने पर अब बसें डिपो में खड़ी हैं। इस कारण विभाग को रोजाना लगभग डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
लिपिकों के अभाव के कारण कार्यालय का काम काफी प्रभावित हो रहा था। नए लिपिक आ जाने से कार्यालय में कार्यरत परिचालकों को उनके मूल पदों पर भेज दिया गया है। वहीं डिपो में परिचालकों की संख्या भी पूरी हो गई। इसके अलावा डिपो में जो नई बसें शामिल होने वाली है। उन्हें भी रूट के हिसाब से लगा दिया जाएगा। -मीनाक्षी दहिया, महाप्रबंधक, रोडवेज विभाग, अंबाला।
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प्रदेश में 1624 नए चालक और 410 लिपिक की नियुक्ति के बाद कार्यालयों में कार्यरत परिचालकों को उनके मूल पदों पर भेजने के दिए थे निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
अंबाला डिपो में कार्यालय का काम देख रहे 38 परिचालक को विभाग ने उनके मूल पदों पर भेज दिया है। विभाग की तरफ से जारी 38 कंडक्टरों की लिस्ट में सबसे ज्यादा 1985, 1989, 1993 बैच के परिचालक शामिल हैं, जो लंबे समय से कार्यालयों में काम कर रहे थे। दरअसल प्रदेश में 1624 नए चालक और 410 लिपिकों की पदों पर नियुक्ति के बाद विभाग महानिदेशक ने डिपो महाप्रबंधकों को निर्देश दिए थे कि जिन परिचालकों से लिपिक अथवा अतिरिक्त पद पर कार्य लिया जा रहा है उन्हें रूटों पर लगाया जाए। इसके तहत अंबाला डिपो ने इन परिचालकों को वापस अपने मूल पदों पर भेज दिया।
वर्कशॉप में अभी भी कर्मचारियों की कमी
बेशक डिपो में 38 परिचालक को उनके मूल पदों पर भेजने से परिचालकों की संख्या 230 हो गई हो, मगर वर्कशॉप में अभी भी कर्मचारियों का कमी है जिनके अभाव में काफी संख्या में बसें सर्विस के लिए खड़ी रहती हैं। सूत्रों के अनुसार मौजूदा समय में वर्कशॉप में हेड मेकेनिकल एक, मेकेनिकल 130 की बजाय 10, इंजीनियर 12 की जगह चार, अस्सिटेंट 20, एसएसआई एक, हेल्पर 55 की जगह दो, फोरमैन दो और एक वर्कशॉप मैनेजर काम कर रहे हैं।
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डिपो को रोजाना 12 लाख रुपये का राजस्व
विभागीय आंकड़ों के अनुसार डिपो में 165 बसें हैं जिनमें से 145 ऑनरूट जबकि 250 बसों की जरूरत है। इन्हीं बसों से डिपो को रोजाना 12 लाख रुपये का राजस्व हो रहा है। बावजूद इसके यात्रियों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। हालांकि अभी हाल ही में डिपो की तरफ से 25 बसों का प्रपोजल भेजा गया था जिसमें 22 बसों की मंजूरी मिल चुकी है। मगर पिछले 2-3 साल से डिपो में कोई नई बस शामिल नहीं हो पाई है। वहीं अगर 22 बसें समय से आ जाए तो यात्रियों को काफी राहत मिलेगी।
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आठ बसों की पासिंग न होने से रोजाना डेढ़ लाख का नुकसान
अंबाला सिटी। पासिंग के इंतजार में रोडवेज की आठ बसें डिपो में शुक्रवार से खड़ी हैं। बसों के रूट पर न चलने से जहां रोजाना इन बसों से सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी हुई वहीं विभाग को भी लाखों का नुकसान हो रहा है। कैथल, दिल्ली, कैथल-चंडीगढ़-कालका, अंबाला-लाडवा-यमुनानगर, दिल्ली-पटियाला, बराड़ा-लुधियाना-दिल्ली, हिमाचल, जालंधर-दिल्ली रूट की बसों की पासिंग 17 मई को खत्म हो गई थी। इनकी पासिंग का जिम्मा एडीसी का था। मगर एडीसी के न होने पर अब बसें डिपो में खड़ी हैं। इस कारण विभाग को रोजाना लगभग डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
लिपिकों के अभाव के कारण कार्यालय का काम काफी प्रभावित हो रहा था। नए लिपिक आ जाने से कार्यालय में कार्यरत परिचालकों को उनके मूल पदों पर भेज दिया गया है। वहीं डिपो में परिचालकों की संख्या भी पूरी हो गई। इसके अलावा डिपो में जो नई बसें शामिल होने वाली है। उन्हें भी रूट के हिसाब से लगा दिया जाएगा। -मीनाक्षी दहिया, महाप्रबंधक, रोडवेज विभाग, अंबाला।