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अस्पताल में उपचार के दौरान 22 वर्षीय अनीकेत की मौत, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
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परशुराम कालोनी में रहने वाले 22 वर्षीय अनिकेत की बुधवार को जिला नागरिक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाया है। साथ ही पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से करवाने की गुहार लगाई है।
परशुराम कालोनी में रहने वाला अनिकेत मानव चौक पर जूस की रेहड़ी लगाता था। परिजनों के अनुसार बुधवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे उसे अचानक चक्कर आने लगे। इस पर किसी ने उसके घरवालों को सूचना दी। सूचना मिलते ही अनिकेत के मामा विपिन मौके पर पहुंचे और उसे शहर नागरिक अस्पताल भर्ती करवाया। वह बेेहोशी की हालत में था। इमरजेंसी में उसका इलाज शुरू कर दिया गया।
परिजनों के आरोप हैं कि उसे वहां दो-तीन इंजेक्शन एक साथ लगा दिए। इसके बाद हालात बिगड़ने से मौत हो गई। अनिकेत दो बहनों को इकलौता भाई था। पिता अशोक कुमार और मां अंजू बाला ने विलाप करते हुए बताया कि बड़ी बेटी संजना शादीशुदा है। छोटी रजनी है। उन सभी का लाडला अब हमेशा के लिए उन्हें छोड़ गया। परिजनों ने अनिकेत के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराने की मांग की है।
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कोट
जब परिजन अनिकेत को अस्पताल लेकर आए तो वह बेहोशी की हालत में था। उसके होंठ नीले पड़े चुके थे। हमें शक था कि जहर का मामला हो सकता है। इसलिए जिंदगी बचाने के लिए जरूरी टीके लगाए। इलाज में कोई भी लापरवाही नहीं बरती गई। मरीज का उस समय बीपी भी बहुत कम था। - डॉ. संजय, इमरजेंसी विभाग, जिला नागरिक अस्पताल।
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परशुराम कालोनी में रहने वाला अनिकेत मानव चौक पर जूस की रेहड़ी लगाता था। परिजनों के अनुसार बुधवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे उसे अचानक चक्कर आने लगे। इस पर किसी ने उसके घरवालों को सूचना दी। सूचना मिलते ही अनिकेत के मामा विपिन मौके पर पहुंचे और उसे शहर नागरिक अस्पताल भर्ती करवाया। वह बेेहोशी की हालत में था। इमरजेंसी में उसका इलाज शुरू कर दिया गया।
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परिजनों के आरोप हैं कि उसे वहां दो-तीन इंजेक्शन एक साथ लगा दिए। इसके बाद हालात बिगड़ने से मौत हो गई। अनिकेत दो बहनों को इकलौता भाई था। पिता अशोक कुमार और मां अंजू बाला ने विलाप करते हुए बताया कि बड़ी बेटी संजना शादीशुदा है। छोटी रजनी है। उन सभी का लाडला अब हमेशा के लिए उन्हें छोड़ गया। परिजनों ने अनिकेत के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराने की मांग की है।
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जब परिजन अनिकेत को अस्पताल लेकर आए तो वह बेहोशी की हालत में था। उसके होंठ नीले पड़े चुके थे। हमें शक था कि जहर का मामला हो सकता है। इसलिए जिंदगी बचाने के लिए जरूरी टीके लगाए। इलाज में कोई भी लापरवाही नहीं बरती गई। मरीज का उस समय बीपी भी बहुत कम था। - डॉ. संजय, इमरजेंसी विभाग, जिला नागरिक अस्पताल।