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सेना के लिए 261 एकड़ भूमि कहां से लाएगा जिला प्रशासन
Updated Tue, 30 Oct 2018 12:52 AM IST
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(नोट : समाचार में 28 अक्तूबर का पेज तीन के लीड समाचार का ईपीएस लगा लें)
फोटो नंबर : 21 व 22
दुधला मंडी, गुलाब मंडी, माली परेड क्षेत्रों के बदले सेना के लिए 261 एकड़ भूमि कहां से लाएगा जिला प्रशासन
जिला प्रशासन के पास शहरी क्षेत्र के ईद-गिर्द कहीं भी उपलब्ध नहीं इतनी बड़ी जमीन
डिफेंस इस्टेट ऑफिसर से दुधला व गुलाब मंडी क्षेत्र का रिकार्ड लिया डीआरओ ने
माली परेड की जमीन को लेकर फंस सकता हैं पेंच
टुंडला, टुंडली और जनैतपुर में सैकड़ों एकड़ भूमि पहले भी हस्तांतरित की जा चुकी है सेना को
रमिंद्र सिंह
अंबाला कैंट। जमीन हस्तांतरण के मामले में सेना के लिए 261 एकड़ भूमि उपलब्ध कराना जिला प्रशासन के लिए टेड़ी खीर साबित हो सकता है। इतनी भूमि अभी जिला प्रशासन के पास शहरी क्षेत्र के ईद-गिर्द कहीं उपलब्ध नहीं है जोकि सेना को दी जा सके। सेना ने दुधला मंडी, गुलाब मंडी, माली परेड आदि क्षेत्रों को राज्य सरकार को देने की एवज में 261 एकड़ जमीन की मांग उठाई है। प्रशासन इस मसले को लेकर अब असमंजस की स्थिति है। बता दें कि पूर्व में भी वर्ष 2003 में राज्य सरकार ने कई एकड़ जमीन एक्वायर कर सेना को प्रदान की थी, मगर अब परिस्थितियां अलग हैं। जमीन एक्वायर करना संभव नहीं है। ऐसे में अन्य विकल्पों को भी तलाशा जा रहा है। दूसरी ओर सोमवार को डीआरओ कैप्टन विनोद शर्मा ने सोमवार को डिफेंस इस्टेट ऑफिसर से मुलाकात कर दुधला व गुलाब मंडी क्षेत्र का रिकार्ड लिया है जोकि सीधे डीईओ के नियंत्रण में है।
माली परेड को लेकर फंस सकता हैं पेंच
डिफेंस लैंड सर्वे नंबर 65 के तहत माली परेड में कुल 198 एकड़ भूमि है जोकि बी-4 डिफेंस लैंड श्रेणी में है। हालांकि यह भूमि डिफेंस इस्टेट ऑफिसर के अधीन है, मगर जमीन पर निर्माण, रखरखाव अन्य की जिम्मेदारी कैंटोनमेंट बोर्ड की है। 500 से ज्यादा घर यहां पर बसे हैं जिनमें हजारों लोग रहते हैं। लोगों के पास खेती के लिए लीज भूमि का बड़ा हिस्सा है और यही दिक्कत प्रशासन के लिए भी उत्पन्न हो रही है। जिन घरों में लोग रह रहे हैं वह जगह कम है जबकि खेती की लीज भूमि कई एकड़ में है। इस लीज भूमि पर कब्जाधारकों का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे में इस भूमि के बदले अन्य भूमि उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए मुश्किल बन सकता है। इस मामले को लेकर अभी प्रशासन व सेना के बीच खासी माथापच्ची चल रही है और अब तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
दुधला व गुलाब मंडी को लेकर दिक्कत नहीं
दुधला व गुलाब मंडी करीब 84 एकड़ में है जोकि डिफेंस सर्वे नंबर 417 में है। यह भूमि ए-वन लैंड है जोकि सीधे तौर पर डिफेंस इस्टेट ऑफिसर के अधीन है। इस भूमि को नगर निगम में यदि भविष्य में मिलाया भी जाता है तो इसमें ज्यादा दिक्कत प्रशासन को नहीं होगी। इस क्षेत्र के साथ मछौंडा, चंद्रपुरी, सुंदर नगर आदि का क्षेत्र लगता है। इस भूमि के बदले अन्य भूमि भी सेना को उपलब्ध आसानी से करवाई जा सकती है। सोमवार को डीआरओ व डीईओ के बीच इस भूमि को लेकर खासी चर्चा भी हुई है।
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वर्ष 2003 में राज्य सरकार ने हस्तांतरित की थी सेना को 331 एकड़ भूमि
वर्ष 2003 में राज्य सरकार ने अंबाला में करीब 331 एकड़ भूमि एक्वायर कर सेना को प्रदान की थी। उस समय कई किसानों ने इसका विरोध भी किया था। गांव टुंडला, टुंडली व जनैतपुर में यह भूमि सेना को दी गई थी जोकि इस समय पंजोखरा रोड व आसपास क्षेत्रों में है। फरवरी 1977 में कैंटोनमेंट बोर्ड ने नगर परिषद बनाने के लिए सिविल क्षेत्र का बड़ा अंबाला सदर हिस्सा राज्य सरकार को दिया था। इसके बदले राज्य सरकार ने 150 एकड़ भूमि एक्वायर कर रक्षा मंत्रालय को प्रदान की थी, मगर यह मामला हाईकोर्ट में चला गया था और हाईकोर्ट के निर्देशों पर 2003 में प्रशासन ने भूमि पर कब्जा लेकर इसे सेना के सुपुर्द किया था। इस भूमि के अलावा 181 एकड़ अलग से भूमि भी सेना को दी गई थी जबकि इस भूमि के बदले सेना ने पानीपत में अपनी 66 एकड़ भूमि राज्य सरकार को दी थी। इस भूमि पर अब पानीपत मिनी कांप्लेक्स स्थापित है।
कोट्स
जमीन हस्तांतरण के मामले को लेकर बातचीत चल रही है। सेना अधिकारियों के साथ सीएम की भी आगामी दिनों में बैठक है। इस पर बातचीत चल रही है और जल्द इस पर निष्कर्ष निकाला जाएगा।
-शरणदीप कौर बराड़, डीसी, अंबाला।
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मंत्री विज के प्रयासों से लोगों को राहत प्रदान की जा रही है। अभी सेना व प्रशासन में आपसी बातचीत चल रही है ताकि जमीन हस्तांतरण में जो भी समस्या आए उसे हल किया जा सके। सोमवार को डीआरओ को डीईओ द्वारा कुछ क्षेत्रों का रिकार्ड उपलब्ध करवाया गया है। इस मामले में तेजी से कार्रवाई चल रही है।
-अजय बवेजा, उपाध्यक्ष, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
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फोटो नंबर : 21 व 22
दुधला मंडी, गुलाब मंडी, माली परेड क्षेत्रों के बदले सेना के लिए 261 एकड़ भूमि कहां से लाएगा जिला प्रशासन
जिला प्रशासन के पास शहरी क्षेत्र के ईद-गिर्द कहीं भी उपलब्ध नहीं इतनी बड़ी जमीन
डिफेंस इस्टेट ऑफिसर से दुधला व गुलाब मंडी क्षेत्र का रिकार्ड लिया डीआरओ ने
माली परेड की जमीन को लेकर फंस सकता हैं पेंच
टुंडला, टुंडली और जनैतपुर में सैकड़ों एकड़ भूमि पहले भी हस्तांतरित की जा चुकी है सेना को
रमिंद्र सिंह
अंबाला कैंट। जमीन हस्तांतरण के मामले में सेना के लिए 261 एकड़ भूमि उपलब्ध कराना जिला प्रशासन के लिए टेड़ी खीर साबित हो सकता है। इतनी भूमि अभी जिला प्रशासन के पास शहरी क्षेत्र के ईद-गिर्द कहीं उपलब्ध नहीं है जोकि सेना को दी जा सके। सेना ने दुधला मंडी, गुलाब मंडी, माली परेड आदि क्षेत्रों को राज्य सरकार को देने की एवज में 261 एकड़ जमीन की मांग उठाई है। प्रशासन इस मसले को लेकर अब असमंजस की स्थिति है। बता दें कि पूर्व में भी वर्ष 2003 में राज्य सरकार ने कई एकड़ जमीन एक्वायर कर सेना को प्रदान की थी, मगर अब परिस्थितियां अलग हैं। जमीन एक्वायर करना संभव नहीं है। ऐसे में अन्य विकल्पों को भी तलाशा जा रहा है। दूसरी ओर सोमवार को डीआरओ कैप्टन विनोद शर्मा ने सोमवार को डिफेंस इस्टेट ऑफिसर से मुलाकात कर दुधला व गुलाब मंडी क्षेत्र का रिकार्ड लिया है जोकि सीधे डीईओ के नियंत्रण में है।
माली परेड को लेकर फंस सकता हैं पेंच
डिफेंस लैंड सर्वे नंबर 65 के तहत माली परेड में कुल 198 एकड़ भूमि है जोकि बी-4 डिफेंस लैंड श्रेणी में है। हालांकि यह भूमि डिफेंस इस्टेट ऑफिसर के अधीन है, मगर जमीन पर निर्माण, रखरखाव अन्य की जिम्मेदारी कैंटोनमेंट बोर्ड की है। 500 से ज्यादा घर यहां पर बसे हैं जिनमें हजारों लोग रहते हैं। लोगों के पास खेती के लिए लीज भूमि का बड़ा हिस्सा है और यही दिक्कत प्रशासन के लिए भी उत्पन्न हो रही है। जिन घरों में लोग रह रहे हैं वह जगह कम है जबकि खेती की लीज भूमि कई एकड़ में है। इस लीज भूमि पर कब्जाधारकों का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे में इस भूमि के बदले अन्य भूमि उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए मुश्किल बन सकता है। इस मामले को लेकर अभी प्रशासन व सेना के बीच खासी माथापच्ची चल रही है और अब तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
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दुधला व गुलाब मंडी को लेकर दिक्कत नहीं
दुधला व गुलाब मंडी करीब 84 एकड़ में है जोकि डिफेंस सर्वे नंबर 417 में है। यह भूमि ए-वन लैंड है जोकि सीधे तौर पर डिफेंस इस्टेट ऑफिसर के अधीन है। इस भूमि को नगर निगम में यदि भविष्य में मिलाया भी जाता है तो इसमें ज्यादा दिक्कत प्रशासन को नहीं होगी। इस क्षेत्र के साथ मछौंडा, चंद्रपुरी, सुंदर नगर आदि का क्षेत्र लगता है। इस भूमि के बदले अन्य भूमि भी सेना को उपलब्ध आसानी से करवाई जा सकती है। सोमवार को डीआरओ व डीईओ के बीच इस भूमि को लेकर खासी चर्चा भी हुई है।
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वर्ष 2003 में राज्य सरकार ने हस्तांतरित की थी सेना को 331 एकड़ भूमि
वर्ष 2003 में राज्य सरकार ने अंबाला में करीब 331 एकड़ भूमि एक्वायर कर सेना को प्रदान की थी। उस समय कई किसानों ने इसका विरोध भी किया था। गांव टुंडला, टुंडली व जनैतपुर में यह भूमि सेना को दी गई थी जोकि इस समय पंजोखरा रोड व आसपास क्षेत्रों में है। फरवरी 1977 में कैंटोनमेंट बोर्ड ने नगर परिषद बनाने के लिए सिविल क्षेत्र का बड़ा अंबाला सदर हिस्सा राज्य सरकार को दिया था। इसके बदले राज्य सरकार ने 150 एकड़ भूमि एक्वायर कर रक्षा मंत्रालय को प्रदान की थी, मगर यह मामला हाईकोर्ट में चला गया था और हाईकोर्ट के निर्देशों पर 2003 में प्रशासन ने भूमि पर कब्जा लेकर इसे सेना के सुपुर्द किया था। इस भूमि के अलावा 181 एकड़ अलग से भूमि भी सेना को दी गई थी जबकि इस भूमि के बदले सेना ने पानीपत में अपनी 66 एकड़ भूमि राज्य सरकार को दी थी। इस भूमि पर अब पानीपत मिनी कांप्लेक्स स्थापित है।
कोट्स
जमीन हस्तांतरण के मामले को लेकर बातचीत चल रही है। सेना अधिकारियों के साथ सीएम की भी आगामी दिनों में बैठक है। इस पर बातचीत चल रही है और जल्द इस पर निष्कर्ष निकाला जाएगा।
-शरणदीप कौर बराड़, डीसी, अंबाला।
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मंत्री विज के प्रयासों से लोगों को राहत प्रदान की जा रही है। अभी सेना व प्रशासन में आपसी बातचीत चल रही है ताकि जमीन हस्तांतरण में जो भी समस्या आए उसे हल किया जा सके। सोमवार को डीआरओ को डीईओ द्वारा कुछ क्षेत्रों का रिकार्ड उपलब्ध करवाया गया है। इस मामले में तेजी से कार्रवाई चल रही है।
-अजय बवेजा, उपाध्यक्ष, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।