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सरकार की रोडवेज पालिसी -
Updated Sat, 08 Jul 2017 12:07 AM IST
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नहीं चाहिए पॉलिसी, जनसमर्थन जुटाएंगी रोडवेज यूनियनें
अंबाला कैंट। सरकार की नई परिवहन नीति को लेकर अब तक सरकार के खिलाफ मैदान में उतरी रोडवेज यूनियन ने जनता का समर्थन जुटाने की तैयारी की है। जल्द ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। जिला स्तर पर यह अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए एक बुकलेट के जरिये रोडवेज यूनियनें जनता को बताएंगी कि आखिर किस तरह से सरकार जहां निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, वहीं रोडवेज विभाग की ओर ध्यान न देकर जनता को परेशान किया जा रहा है।
सरकार ने प्रदेश के विभिन्न रूटों पर निजी बसों को रूट परमिट देने की तैयारियां की हैं, जबकि रोडवेज यूनियनों के विरोध के चलते यह सिरे नहीं चढ़ पाईं। कई बार इसमें संशोधन किया गया, लेकिन यूनियनों का विरोध जारी रहा। फरवरी 2017 में जारी की गई परिवहन पॉलिसी के तहत अंबाला में जहां 12 नए रूट दिए जा रहे थे, वहीं अब जारी नई पालिसी के तहत 23 रूट आवंटित किए जा रहे हैं। इसी तरह फरवरी 2017 की पॉलिसी में जहां प्रदेश में 273 रूट दिए जाने थे, वहीं अब यह आंकड़ा 452 तक पहुंच गया है। लेकिन अब इस पॉलिसी को ही खत्म करवाने के लिए रोडवेज यूनियन अपनी तैयारी में है।
जनता के बीच जाएगी यूनियन
सरकार की इसी परिवहन पॉलिसी के खिलाफ रोडवेज यूनियन अब जनता के बीच जाएगी। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। यूनियन ने इसके लिए एक बुकलेट तैयार करवा रही है। इसमें सरकार की मंशा पर तो सवाल उठाए ही गए हैं, साथ ही बताया गया है कि कैसे रोडवेज विभाग की ओर ध्यान न देते हुए जनता को सुविधा नहीं दी जा रही है। यदि रोडवेज की ओर ध्यान दिया जाए, तो जहां युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं जनता को सुविधा व सरकार को राजस्व मिलेगा। लेकिन सरकार इस विभाग का निजीकरण करने पर तुली है। यूनियन का कहना है कि जल्द ही यह अभियान शुरू किया जाएगा ताकि जनता को सच्चाई का पता चल सके।
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सरकार बार-बार परिवहन पालिसी को बदल रही है, जबकि अब तो इसे खत्म करवाने के लिए ही संघर्ष किया जाएगा। इसके लिए यूनियन जनता के बीच जाएगी और एक बुकलेट के जरिये जनता को अपनी बात पहुंचाई जाएगी। इस में बताया जाएगा कि कैसे सरकार ने वायदे किए और उन पर अमल नहीं किया।
- इंद्र सिंह बधाना, प्रदेश प्रधान रोडवेज वर्कर्स यूनियन
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अंबाला कैंट। सरकार की नई परिवहन नीति को लेकर अब तक सरकार के खिलाफ मैदान में उतरी रोडवेज यूनियन ने जनता का समर्थन जुटाने की तैयारी की है। जल्द ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। जिला स्तर पर यह अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए एक बुकलेट के जरिये रोडवेज यूनियनें जनता को बताएंगी कि आखिर किस तरह से सरकार जहां निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, वहीं रोडवेज विभाग की ओर ध्यान न देकर जनता को परेशान किया जा रहा है।
सरकार ने प्रदेश के विभिन्न रूटों पर निजी बसों को रूट परमिट देने की तैयारियां की हैं, जबकि रोडवेज यूनियनों के विरोध के चलते यह सिरे नहीं चढ़ पाईं। कई बार इसमें संशोधन किया गया, लेकिन यूनियनों का विरोध जारी रहा। फरवरी 2017 में जारी की गई परिवहन पॉलिसी के तहत अंबाला में जहां 12 नए रूट दिए जा रहे थे, वहीं अब जारी नई पालिसी के तहत 23 रूट आवंटित किए जा रहे हैं। इसी तरह फरवरी 2017 की पॉलिसी में जहां प्रदेश में 273 रूट दिए जाने थे, वहीं अब यह आंकड़ा 452 तक पहुंच गया है। लेकिन अब इस पॉलिसी को ही खत्म करवाने के लिए रोडवेज यूनियन अपनी तैयारी में है।
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जनता के बीच जाएगी यूनियन
सरकार की इसी परिवहन पॉलिसी के खिलाफ रोडवेज यूनियन अब जनता के बीच जाएगी। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। यूनियन ने इसके लिए एक बुकलेट तैयार करवा रही है। इसमें सरकार की मंशा पर तो सवाल उठाए ही गए हैं, साथ ही बताया गया है कि कैसे रोडवेज विभाग की ओर ध्यान न देते हुए जनता को सुविधा नहीं दी जा रही है। यदि रोडवेज की ओर ध्यान दिया जाए, तो जहां युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं जनता को सुविधा व सरकार को राजस्व मिलेगा। लेकिन सरकार इस विभाग का निजीकरण करने पर तुली है। यूनियन का कहना है कि जल्द ही यह अभियान शुरू किया जाएगा ताकि जनता को सच्चाई का पता चल सके।
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सरकार बार-बार परिवहन पालिसी को बदल रही है, जबकि अब तो इसे खत्म करवाने के लिए ही संघर्ष किया जाएगा। इसके लिए यूनियन जनता के बीच जाएगी और एक बुकलेट के जरिये जनता को अपनी बात पहुंचाई जाएगी। इस में बताया जाएगा कि कैसे सरकार ने वायदे किए और उन पर अमल नहीं किया।
- इंद्र सिंह बधाना, प्रदेश प्रधान रोडवेज वर्कर्स यूनियन