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- डॉक्टरों व स्टॉफ के मॉक ड्रिल में व्यस्त होने की वजह से मरीजों झेलनी पड़ी परेशानी
Updated Fri, 22 Dec 2017 01:34 AM IST
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मॉक ड्रिल में व्यस्त रहे अधिकारी, इधर दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाएं
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी/कैंट। भूकंप आए तो उससे बचाव के लिए वीरवार को मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। कड़कड़ाती ठंड व कोहरे के बीच हुई मॉक ड्रिल में जहां बचाव से जुड़े कार्य किए गए वहीं सिविल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ गई। अस्पताल में न डॉक्टर मिले न ही नर्सिंग स्टाफ। इस वजह से यहां पर आए मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। सर्दी में मरीजों को घंटों डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ी, वहीं कई मरीजों को तो टेबल व अन्य फर्नीचर मॉक ड्रिल में जाने की वजह से ठंडे फर्श पर बैठना पड़ा।
बचाव कार्य का नाटकीय रूप अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए भारी पड़ गया। ट्रामा सेंटर के अल्ट्रासाउंड वार्ड व एक्सरे रूम के गेट पर अल्ट्रासाउंड व एक्सरे करवाने के लिए आने वाले मरीजों को डेक्स ही उपलब्ध नहीं हुए और घंटों खड़े होने के बाद थक जाने पर उन्हें मजबूरन ठंडी जमीन पर ही बैठना पड़ा। सुबह से ही सभी डॉक्टरों की ड्यूटी मॉकड्रिल पर लगा दी गई थी जिस कारण डॉक्टर अपनी-अपनी सीटों से नदारद नजर आए। प्रात: से लाईनों में खड़े मरीजों को पर्ची कटवाने के लिए खिड़की पर पहुंचने के बाद यह कह दिया जाता था कि डॉक्टर आज छुट्टी पर है जबकि सभी डॉक्टर्स की ड्यूटी मॉक ड्रिल में लगाई थी। ठंड में अपना इलाज करवाने के लिए आए मरीजों को वापस अपने घरों को मायूस होकर लौटना पड़ा। सिटी के अलावा कैंट सिविल अस्पताल में भी यही स्थिति रही। डॉक्टर व स्टाफ के मॉक ड्रिल में व्यस्त होने की वजह से मरीजों को खासी परेशानी हुई।
सुबह 10:20 पर आया भूकंप, दस मिनट में पहुंच गई सिविल डिफेंस
समय सुबह 10:20 बजे, भूकंप आते ही जीटी रोड पर स्थित आईओसी टर्मिनल में एक के बाद एक कई सायरन बजे। कुछ क्षणों बाद ही घायल हुए कर्मियों की चीख पुकार शुरू हो गई। कोई घायल जमीन पर लिटा हुआ था तो कोई रेंग-रेंग कर आगे बढ़ रहा था। इसी बीच सायरन लगातार बचते तो राहत एवं बचाव कार्य आरंभ हुआ। देखते ही देखते कई कर्मियों ने घायल हुए लोगों को बिल्डिंग से बाहर निकालने का कार्य शुरू कर दिया। सायरन बजने के महज दस मिनट बाद ही सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंच गई जिसने व्यापक स्तर पर राहत कार्य को चालू कर दिया। घायलों को प्राथमिक चिकित्सा दी गई व राहत के कार्य तेज किए गए। टर्मिनल में हुई मॉक ड्रिल के दौरान सीएम मनोहर लाल खट्टर एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी मौके पर पहुंच गए जिन्होंने बचाव कार्य में हाथ बंटाया।
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जब कर्मियों ने सीएम व मंत्री के पैर छुए
मॉक ड्रिल के दौरान राहत कार्य में सीएम खट्टर व मंत्री विज घायल कर्मियों को बाहर निकाल उनकी मदद कर रहे थे। घायल लडख़ड़ाते हुए आगे बढ़ रहे थे, मगर इसी बीच कर्मचारी लडख़ड़ाते हुए सीएम व मंत्री के पैर छूते-छूते आगे बढ़ रहे थे।
- मॉक ड्रिल के दौरान काल्पनिक तौर पर उत्पन्न की गई स्थिति में घायल लोग जहां सहायता के लिए पुकारते नजर आए, वहीं अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा संगठन, पुलिस, नगर निगम, आपदा प्रबन्धन, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी तुरंत पीड़ित लोगों के बचाव और राहत कार्य में जुट गए। मुख्यमंत्री ने भी चंडीगढ़ मुख्यालय वीडियो कॉलिंग के माध्यम से हाई अलर्ट के निर्देश जारी किए और सभी विभागों को बचाव कार्यों में अपनी ड्यूटी पर तुरंत तैनात होने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने इस पूरे प्रदर्शन को देखा और कहा कि सभी विभाग किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क नजर आए हैं। इस तरह का मेगा मॉक ड्रिल प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 से 12 बजे तक किया गया है। प्राकृतिक आपदाएं निश्चित नहीं होती लेकिन ऐसी आपदाओं से जान और माल के नुकसान को कम करने के लिए सभी तैयारियां रखना जरूरी है। सभी विभाग अपने दैनिक ड्यूटी के दायित्व के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित स्थितियों से निपटने के लिए भी प्रशिक्षित किए गए हैं ताकि जिला में उपलब्ध संसाधनों से तुरंत राहत व बचाव कार्य आरंभ हो सकें। प्रदर्शन में जहां आईओसी के तीन मंजिला कार्यालय से घायल लोगों को सीढ़ी व रस्सी के सहारे नीचे सुरक्षित उतारने का प्रदर्शन किया गया, वहीं जख्मी लोगों को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए एंबुलेंस, सुरक्षा कर्मियों के सहयोग तथा आपात स्वास्थ्य सेवाओं का प्रदर्शन भी किया गया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आईओसी के तेल भंडार टैंको में भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदा से आग लगने की स्थिति पर अग्निशमन विभाग द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने और ऐसी घटन में पीड़ित लोगों को तुरंत राहत प्रदान करने का भी बेहतरीन प्रदर्शन किया गया।
इसके अलावा आपदा एवं राजस्व विभाग द्वारा आईटीआई, सिटी प्लाजा, एडीसी कार्यालय, शहर सिविल अस्पताल सहित अन्य स्थानों पर भी इस तरह का मेगा मॉक ड्रिल किया गया। एसडीएम कार्यालय में ईओसी सेंटर बनाया गया था जिसमें तमाम गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नोडल अधिकारी के तौर पर नगराधीश नियुक्त किए गए। इस ईओसी के माध्यम से जहां-जहां पर भूकम्प आने की स्थिति में जो घटना घटी है उसकी तुरंत सूचना मिलते ही वहां पर बचाव टीमों को भेजने का काम किया गया है। इन बचाव टीमों में रेडक्रास सोसायटी, पशुपालन विभाग, पुलिस विभाग की टीम, होमगार्ड टीम, आर्मी ऑबर्जवर, सेना, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ता सहित जिला प्रशासन द्वारा गठित की गई पूरी टीम शामिल रही जिन्होंने जहां-जहां पर भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई वहां पर बचाव कार्यों को करने का काम किया गया। इस अवसर पर एडीजीपी डॉ. आरसी मिश्रा, डीसी शरणदीप कौर बराड़, निगम आयुक्त सत्येंद्र दुहन व अन्य मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी/कैंट। भूकंप आए तो उससे बचाव के लिए वीरवार को मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। कड़कड़ाती ठंड व कोहरे के बीच हुई मॉक ड्रिल में जहां बचाव से जुड़े कार्य किए गए वहीं सिविल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ गई। अस्पताल में न डॉक्टर मिले न ही नर्सिंग स्टाफ। इस वजह से यहां पर आए मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। सर्दी में मरीजों को घंटों डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ी, वहीं कई मरीजों को तो टेबल व अन्य फर्नीचर मॉक ड्रिल में जाने की वजह से ठंडे फर्श पर बैठना पड़ा।
बचाव कार्य का नाटकीय रूप अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए भारी पड़ गया। ट्रामा सेंटर के अल्ट्रासाउंड वार्ड व एक्सरे रूम के गेट पर अल्ट्रासाउंड व एक्सरे करवाने के लिए आने वाले मरीजों को डेक्स ही उपलब्ध नहीं हुए और घंटों खड़े होने के बाद थक जाने पर उन्हें मजबूरन ठंडी जमीन पर ही बैठना पड़ा। सुबह से ही सभी डॉक्टरों की ड्यूटी मॉकड्रिल पर लगा दी गई थी जिस कारण डॉक्टर अपनी-अपनी सीटों से नदारद नजर आए। प्रात: से लाईनों में खड़े मरीजों को पर्ची कटवाने के लिए खिड़की पर पहुंचने के बाद यह कह दिया जाता था कि डॉक्टर आज छुट्टी पर है जबकि सभी डॉक्टर्स की ड्यूटी मॉक ड्रिल में लगाई थी। ठंड में अपना इलाज करवाने के लिए आए मरीजों को वापस अपने घरों को मायूस होकर लौटना पड़ा। सिटी के अलावा कैंट सिविल अस्पताल में भी यही स्थिति रही। डॉक्टर व स्टाफ के मॉक ड्रिल में व्यस्त होने की वजह से मरीजों को खासी परेशानी हुई।
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सुबह 10:20 पर आया भूकंप, दस मिनट में पहुंच गई सिविल डिफेंस
समय सुबह 10:20 बजे, भूकंप आते ही जीटी रोड पर स्थित आईओसी टर्मिनल में एक के बाद एक कई सायरन बजे। कुछ क्षणों बाद ही घायल हुए कर्मियों की चीख पुकार शुरू हो गई। कोई घायल जमीन पर लिटा हुआ था तो कोई रेंग-रेंग कर आगे बढ़ रहा था। इसी बीच सायरन लगातार बचते तो राहत एवं बचाव कार्य आरंभ हुआ। देखते ही देखते कई कर्मियों ने घायल हुए लोगों को बिल्डिंग से बाहर निकालने का कार्य शुरू कर दिया। सायरन बजने के महज दस मिनट बाद ही सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंच गई जिसने व्यापक स्तर पर राहत कार्य को चालू कर दिया। घायलों को प्राथमिक चिकित्सा दी गई व राहत के कार्य तेज किए गए। टर्मिनल में हुई मॉक ड्रिल के दौरान सीएम मनोहर लाल खट्टर एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी मौके पर पहुंच गए जिन्होंने बचाव कार्य में हाथ बंटाया।
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मॉक ड्रिल के दौरान राहत कार्य में सीएम खट्टर व मंत्री विज घायल कर्मियों को बाहर निकाल उनकी मदद कर रहे थे। घायल लडख़ड़ाते हुए आगे बढ़ रहे थे, मगर इसी बीच कर्मचारी लडख़ड़ाते हुए सीएम व मंत्री के पैर छूते-छूते आगे बढ़ रहे थे।
- मॉक ड्रिल के दौरान काल्पनिक तौर पर उत्पन्न की गई स्थिति में घायल लोग जहां सहायता के लिए पुकारते नजर आए, वहीं अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा संगठन, पुलिस, नगर निगम, आपदा प्रबन्धन, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी तुरंत पीड़ित लोगों के बचाव और राहत कार्य में जुट गए। मुख्यमंत्री ने भी चंडीगढ़ मुख्यालय वीडियो कॉलिंग के माध्यम से हाई अलर्ट के निर्देश जारी किए और सभी विभागों को बचाव कार्यों में अपनी ड्यूटी पर तुरंत तैनात होने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने इस पूरे प्रदर्शन को देखा और कहा कि सभी विभाग किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क नजर आए हैं। इस तरह का मेगा मॉक ड्रिल प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 से 12 बजे तक किया गया है। प्राकृतिक आपदाएं निश्चित नहीं होती लेकिन ऐसी आपदाओं से जान और माल के नुकसान को कम करने के लिए सभी तैयारियां रखना जरूरी है। सभी विभाग अपने दैनिक ड्यूटी के दायित्व के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित स्थितियों से निपटने के लिए भी प्रशिक्षित किए गए हैं ताकि जिला में उपलब्ध संसाधनों से तुरंत राहत व बचाव कार्य आरंभ हो सकें। प्रदर्शन में जहां आईओसी के तीन मंजिला कार्यालय से घायल लोगों को सीढ़ी व रस्सी के सहारे नीचे सुरक्षित उतारने का प्रदर्शन किया गया, वहीं जख्मी लोगों को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए एंबुलेंस, सुरक्षा कर्मियों के सहयोग तथा आपात स्वास्थ्य सेवाओं का प्रदर्शन भी किया गया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आईओसी के तेल भंडार टैंको में भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदा से आग लगने की स्थिति पर अग्निशमन विभाग द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने और ऐसी घटन में पीड़ित लोगों को तुरंत राहत प्रदान करने का भी बेहतरीन प्रदर्शन किया गया।
इसके अलावा आपदा एवं राजस्व विभाग द्वारा आईटीआई, सिटी प्लाजा, एडीसी कार्यालय, शहर सिविल अस्पताल सहित अन्य स्थानों पर भी इस तरह का मेगा मॉक ड्रिल किया गया। एसडीएम कार्यालय में ईओसी सेंटर बनाया गया था जिसमें तमाम गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नोडल अधिकारी के तौर पर नगराधीश नियुक्त किए गए। इस ईओसी के माध्यम से जहां-जहां पर भूकम्प आने की स्थिति में जो घटना घटी है उसकी तुरंत सूचना मिलते ही वहां पर बचाव टीमों को भेजने का काम किया गया है। इन बचाव टीमों में रेडक्रास सोसायटी, पशुपालन विभाग, पुलिस विभाग की टीम, होमगार्ड टीम, आर्मी ऑबर्जवर, सेना, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ता सहित जिला प्रशासन द्वारा गठित की गई पूरी टीम शामिल रही जिन्होंने जहां-जहां पर भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई वहां पर बचाव कार्यों को करने का काम किया गया। इस अवसर पर एडीजीपी डॉ. आरसी मिश्रा, डीसी शरणदीप कौर बराड़, निगम आयुक्त सत्येंद्र दुहन व अन्य मौजूद रहे।