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- कैंटोनमेंट बोर्ड ने सेना क्षेत्र में किचनर रोड का हिस्सा बंद करने के लिए जारी की थी गत दिनों अधिसूचना
Updated Fri, 17 Nov 2017 12:42 AM IST
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सैन्य क्षेत्र में रोड बंद को लेकर जनता और पार्षद खफा
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
सेना क्षेत्र में सिविलियन के लिए बंद होती सड़कों का मसला शुक्रवार को होने वाली कैंटोनमेंट बोर्ड की मासिक बैठक में उछलेगा। पार्षद इस मसले को लेकर पूरा हंगामा करने की तैयारी में है। वहीं कैंटोनमेंट बोर्ड ने बीते माह किचनर रोड का हिस्सा सिविलियन के लिए बंद करने के लिए आम जनता से आपत्तियां मांगी थी। अब तक बोर्ड को इस मसले पर 135 आपत्तियां प्राप्त हो चुकी है, यानि जनता नहीं चाहती की सेना रोड के रास्ते उनके लिए बंद कर दें। यही नहीं इस मसले को लेकर पार्षद भी खफा है और शुक्रवार को सदन की बैठक में इस मसले पर भारी हंगामा होने के आसार है। सदन के अनुमोदन के बिना सेना इस रोड को जनता के लिए बंद नहीं कर सकती और सेना का प्रयास सदन में इस मुद्दे को पारित कराने का रहेगा। यदि जरूरत आन पड़ी तो इस मुद्दे को पास कराने को लेकर वोटिंग तक हो सकती है।
सुरक्षा का दिया गया हवाला
बीते माह कैंटोनमेंट बोर्ड ने खड्ग स्टेडियम के साथ लगती कैनिन रोड का हिस्सा बंद कराने के लिए सेना अधिकारियों की सिफारिश पर नोटिफिकेशन जारी की थी। नोटिफिकेशन में सैन्य क्षेत्र में सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा गया था कि सुरक्षा को लेकर सेना क्षेत्र में समस्या बढ़ती जा रही है। सेना और सिविलियन यातायात को अलग करने के लिए रोड का हिस्सा बंद करने की नोटिफिकेशन जारी हुई थी और इस नोटिफिकेशन के निकलते ही बोर्ड के पार्षदों का पारा बढ़ना आरंभ हो गया था। इस रोड से पहले सेना सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कोर हेडक्वार्टर के निकट माल रोड, एओसी निवास के निकट माल रोड की संपर्क रोड व अन्य मार्गों को बंद कर चुकी है।
अब किचनर रोड का हिस्सा बंद करने का नोटिफिकेशन जारी हुआ तो पार्षदों के साथ-साथ अब जनता ने भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराई है। बोर्ड के पास 135 के लगभग आपत्तियां आई है। इतनी संख्या में आपत्तियां आने पर अब सदन में इस रोड को बंद कराने का मुद्दा पारित करना सैन्य अधिकारियों के लिए टेढ़ी खीर होगा।
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2014 में तोपखाना क्षेत्र में माल रोड की थी बंद
तोपखाना के निवासी पहले तोपखाना से माल रोड पर होते हुए स्टाफ रोड व अन्य रोड पर निकल जाते थे। मगर सेना ने सितंबर 2014 में इस रोड को सिविलियन के लिए बंद कर दिया था। तोपखाना निवासियों ने इस मुद्दे पर भारी विरोध भी जताया था। मगर सेना के भारी बल के आगे उनकी नहीं चली और आज तक यह मार्ग सिविलियन के लिए बंद है।
इन मुद्दों पर भी आज सदन में होगी चर्चा
बोर्ड पास करेगा जमीन ट्रांसफर का मामला
सदन में राज्य सरकार और कैंटोनमेंट बोर्ड प्रशासन के बीच जमीन हस्तांतरित का मुद्दा भी प्रस्तुत हुआ जिसपर सदन की मोहर लग सकती है। बता दें कि कैंट सिविल अस्पताल के ठीक साथ कैंटोनमेंट बोर्ड का रेस्ट हाउस है। राज्य सरकार को अस्पताल में कैंसर टर्सरी सेंटर के लिए और जमीन चाहिए थी। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कैंटोनमेंट बोर्ड से पत्राचार कर बोर्ड के रेस्ट हाउस की जमीन मांगी। इसपर बोर्ड भी मुख्यालय की अनुमति मिलने के बाद राजी हो गया है। राज्य सरकार रेस्ट हाउस की .47 एकड़ जमीन लेगी जहां कैंसर टर्सरी सेंटर बनेगा। रेस्ट हाउस के बदले राज्य सरकार कैंटोनमेंट बोर्ड को 42 लाख रुपये और सैन्य क्षेत्र में सर्किट हाउस की 1.1 एकड़ जमीन भी दे रहा है। इस जमीन पर कैंटोनमेंट बोर्ड अपना नया रेस्ट हाउस बनाएगा।
तोपखाना परेड को सिविल एरिया बनाने पर जोर
सदन में सैन्य क्षेत्र में स्थित तोपखाना परेड क्षेत्र को सिविल एरिया घोषित करने पर भी चर्चा होगी। बता दें कि परेड क्षेत्र में अधिकतर पिछड़े वर्ग से जुड़े लोग हैं जोकि इलाके में अंग्रेजों के समय से सब्जी उत्पादन कर जीवन यापन कर रहे हैं। इस भूमि पर कोई नया निर्माण आदि यहां दशकों से बसे लोग नहीं कर सकते। इस क्षेत्र को तोपखाना की तरह सिविलियन एरिया घोषित कराने को लेकर भी सदन में शुक्रवार को चर्चा होगी। तोपखाना परेड को क्लास-सी लैंड की श्रेणी में लाने का प्रयास पार्षदों द्वारा किया जाएगा।
सेना सिविलियन के लिए रास्ते बंद कर अंग्रेजी हुकूमत की भेदभाव की नीति की याद दिलवा रही है। सुरक्षा के नाम पर कई रास्ते बंद कर दिए हैं जोकि पूरी तरह से अवैध हैं। पूर्व में सूचना अधिकार के तहत रक्षा मंत्रालय से जानकारी मांगी तो मंत्रालय ने जवाब दिया था कि क्षेत्र में कोई रास्ता सेना ने बंद नहीं किया है, मगर यहां पर कई संपर्क और माल रोड बंद सेना ने सिविलियन के लिए बंद कर दी है। सदन में शुक्रवार को इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया जाएगा। -अजय बवेजा, उपाध्यक्ष, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
सेना क्षेत्र में सिविलियन के लिए बंद होती सड़कों का मसला शुक्रवार को होने वाली कैंटोनमेंट बोर्ड की मासिक बैठक में उछलेगा। पार्षद इस मसले को लेकर पूरा हंगामा करने की तैयारी में है। वहीं कैंटोनमेंट बोर्ड ने बीते माह किचनर रोड का हिस्सा सिविलियन के लिए बंद करने के लिए आम जनता से आपत्तियां मांगी थी। अब तक बोर्ड को इस मसले पर 135 आपत्तियां प्राप्त हो चुकी है, यानि जनता नहीं चाहती की सेना रोड के रास्ते उनके लिए बंद कर दें। यही नहीं इस मसले को लेकर पार्षद भी खफा है और शुक्रवार को सदन की बैठक में इस मसले पर भारी हंगामा होने के आसार है। सदन के अनुमोदन के बिना सेना इस रोड को जनता के लिए बंद नहीं कर सकती और सेना का प्रयास सदन में इस मुद्दे को पारित कराने का रहेगा। यदि जरूरत आन पड़ी तो इस मुद्दे को पास कराने को लेकर वोटिंग तक हो सकती है।
सुरक्षा का दिया गया हवाला
बीते माह कैंटोनमेंट बोर्ड ने खड्ग स्टेडियम के साथ लगती कैनिन रोड का हिस्सा बंद कराने के लिए सेना अधिकारियों की सिफारिश पर नोटिफिकेशन जारी की थी। नोटिफिकेशन में सैन्य क्षेत्र में सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा गया था कि सुरक्षा को लेकर सेना क्षेत्र में समस्या बढ़ती जा रही है। सेना और सिविलियन यातायात को अलग करने के लिए रोड का हिस्सा बंद करने की नोटिफिकेशन जारी हुई थी और इस नोटिफिकेशन के निकलते ही बोर्ड के पार्षदों का पारा बढ़ना आरंभ हो गया था। इस रोड से पहले सेना सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कोर हेडक्वार्टर के निकट माल रोड, एओसी निवास के निकट माल रोड की संपर्क रोड व अन्य मार्गों को बंद कर चुकी है।
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अब किचनर रोड का हिस्सा बंद करने का नोटिफिकेशन जारी हुआ तो पार्षदों के साथ-साथ अब जनता ने भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराई है। बोर्ड के पास 135 के लगभग आपत्तियां आई है। इतनी संख्या में आपत्तियां आने पर अब सदन में इस रोड को बंद कराने का मुद्दा पारित करना सैन्य अधिकारियों के लिए टेढ़ी खीर होगा।
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2014 में तोपखाना क्षेत्र में माल रोड की थी बंद
तोपखाना के निवासी पहले तोपखाना से माल रोड पर होते हुए स्टाफ रोड व अन्य रोड पर निकल जाते थे। मगर सेना ने सितंबर 2014 में इस रोड को सिविलियन के लिए बंद कर दिया था। तोपखाना निवासियों ने इस मुद्दे पर भारी विरोध भी जताया था। मगर सेना के भारी बल के आगे उनकी नहीं चली और आज तक यह मार्ग सिविलियन के लिए बंद है।
इन मुद्दों पर भी आज सदन में होगी चर्चा
बोर्ड पास करेगा जमीन ट्रांसफर का मामला
सदन में राज्य सरकार और कैंटोनमेंट बोर्ड प्रशासन के बीच जमीन हस्तांतरित का मुद्दा भी प्रस्तुत हुआ जिसपर सदन की मोहर लग सकती है। बता दें कि कैंट सिविल अस्पताल के ठीक साथ कैंटोनमेंट बोर्ड का रेस्ट हाउस है। राज्य सरकार को अस्पताल में कैंसर टर्सरी सेंटर के लिए और जमीन चाहिए थी। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कैंटोनमेंट बोर्ड से पत्राचार कर बोर्ड के रेस्ट हाउस की जमीन मांगी। इसपर बोर्ड भी मुख्यालय की अनुमति मिलने के बाद राजी हो गया है। राज्य सरकार रेस्ट हाउस की .47 एकड़ जमीन लेगी जहां कैंसर टर्सरी सेंटर बनेगा। रेस्ट हाउस के बदले राज्य सरकार कैंटोनमेंट बोर्ड को 42 लाख रुपये और सैन्य क्षेत्र में सर्किट हाउस की 1.1 एकड़ जमीन भी दे रहा है। इस जमीन पर कैंटोनमेंट बोर्ड अपना नया रेस्ट हाउस बनाएगा।
तोपखाना परेड को सिविल एरिया बनाने पर जोर
सदन में सैन्य क्षेत्र में स्थित तोपखाना परेड क्षेत्र को सिविल एरिया घोषित करने पर भी चर्चा होगी। बता दें कि परेड क्षेत्र में अधिकतर पिछड़े वर्ग से जुड़े लोग हैं जोकि इलाके में अंग्रेजों के समय से सब्जी उत्पादन कर जीवन यापन कर रहे हैं। इस भूमि पर कोई नया निर्माण आदि यहां दशकों से बसे लोग नहीं कर सकते। इस क्षेत्र को तोपखाना की तरह सिविलियन एरिया घोषित कराने को लेकर भी सदन में शुक्रवार को चर्चा होगी। तोपखाना परेड को क्लास-सी लैंड की श्रेणी में लाने का प्रयास पार्षदों द्वारा किया जाएगा।
सेना सिविलियन के लिए रास्ते बंद कर अंग्रेजी हुकूमत की भेदभाव की नीति की याद दिलवा रही है। सुरक्षा के नाम पर कई रास्ते बंद कर दिए हैं जोकि पूरी तरह से अवैध हैं। पूर्व में सूचना अधिकार के तहत रक्षा मंत्रालय से जानकारी मांगी तो मंत्रालय ने जवाब दिया था कि क्षेत्र में कोई रास्ता सेना ने बंद नहीं किया है, मगर यहां पर कई संपर्क और माल रोड बंद सेना ने सिविलियन के लिए बंद कर दी है। सदन में शुक्रवार को इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया जाएगा। -अजय बवेजा, उपाध्यक्ष, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।