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- तीन साल तक रिइंबरसमेंट के आश्वासन में स्कूलों ने पढ़ाए बच्चे लेकिन अब नहीं देंगे : कुलभूषण
Updated Fri, 27 Apr 2018 01:10 AM IST
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तीन साल तक रिइंबर्समेंट के आश्वासन पर पढ़ाए बच्चे, अब नहीं देंगे दाखिला : कुलभूषण
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
नियम 134-ए के तहत जहां अभिभावक बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला कराने के लिए बीईओ कार्यालयों में चक्कर लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शुक्रवार को फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने घोषणा कि सरकार जब तक रिइंबर्समेंट नहीं देती, तब तक वह किसी भी विद्यार्थी को स्कूल में एडमिशन नहीं देंगे। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट ने सरकार को नियम 134-ए के तहत निजी स्कूल संचालकों द्वारा फ्री पढ़ाए जाने वाले बच्चों की एवज में रिइंबर्समेंट देने के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार रिइंबर्समेंट देने की बजाए निजी स्कूलों को तंग करने में लगी है और मेधावी बच्चों को भी परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट की अवमानना के खिलाफ एसोसिएशन कोर्ट जाएगी और रिइंबर्समेंट की मांग करेगी।
कुलभूषण शर्मा वीरवार को सिटी के एक स्कूल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब निजी स्कूल 134-ए के तहत किसी विद्यार्थी को एडमिशन नहीं देंगे, जिन्हें एडमिशन दे दिया गया है उन्हें हटाया नहीं जाएगा, लेकिन आगे के लिए निजी स्कूल ये सुविधा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार प्रति बच्चा 1600 रुपये महीना रिइंबर्समेंट दे रही है। उत्तराखंड में भी सरकार द्वारा निजी स्कूल संचालकों को मुफ्त पढ़ाने की एवज में रिइंबर्समेंट दी जा रही है, लेकिन हरियाणा सरकार मात्र 200 रुपये प्रति बच्चा रिइंबर्समेंट देने को भी तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार से रिइंबर्समेंट मिलने के आश्वासन में स्कूलों ने तीन सालों से बच्चों को मुफ्त पढ़ाया है, लेकिन अब उन्हें मजबूर होकर संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने अभिभावकों से भी आह्वान किया कि वह सरकार और अपने विधायक से सवाल करें कि उनकी सरकार निजी स्कूलों को रिइंबर्समेंट क्यों नहीं दे रही।
एसोसिएशन जल्द करेगी गलत इनकम सर्टिफिकेट का खुलासा
कुलभूषण शर्मा ने यह भी कहा कि जल्द ही एसोसिएशन इस बात का भी खुलासा करेगी और बताएगी कि कैसे लोगों ने फ्री एडमिशन के चक्कर में गलत इनकम सर्टिफिकेट बनवाए और गरीबों का हक छीनने का काम किया ही उन्होंने कहा कि आरटीई में स्पष्ट है कि स्कूल जारी करने से पहले नेबरहुड देखे जाते हैं, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। बच्चों और चहेतों को लाभ पहुंचने के लिए उन्हें दूर-दूर उनकी पसंद के स्कूल जारी किए गए नियमों के खिलाफ है। कुलभूषण शर्मा ने आरोप लगाया कि मुफ्त में दी जाने वाली सीटों में भी सौदेबाजी हुई है ताकि बच्चों को उनका मनपसंद स्कूल दिया जा सके।
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एडमिशन नहीं देने वाले स्कूलों में बीईओ करेंगे आज निरीक्षण
वहीं ट्विन सिटी के बीईओ कार्यालय में परेशान अभिभावक शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। 134-ए के तहत किसी अभिभावकों से पैन कार्ड मांगे जा रहे हैं तो कोई स्कूल संचालक अभिभावकों को केवल दो वर्ष के लिए छात्र को एडमिशन देने के लिए राजी हो रहा है। इतना ही नहीं कुछ स्कूल संचालक तो आय के प्रूफ व अन्य दस्तावेज अभिभावकों से मांग रहे हैं। कई स्कूल वार्षिक चार्ज एक साथ जमा कराने को कह रहे हैं। ब्लॉक वन के बीईओ अधिकारी सुधीर कालड़ा ने बताया कि उनके पास शिकायतें आई हैं कि कुछ स्कूल अभिभावकों को बेवजह तंग कर रहे हैं, उनसे तरह-तरह के दस्तावेज मांग रहे हैं और दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे खुद शुक्रवार से प्राइवेट स्कूलों में जाकर निरीक्षण करेंगे कि उन स्कूलों में नियम 134 ए के तहत एडमिशन देने में क्या प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है। कहीं स्कूल वाले बच्चों से नाजायज राशि तो वसूल नहीं कर रहे। यदि स्कूल नियमों की अवहेेलना करते हैं, तो उन पर जिला कमेटी की सिफारिश पर कार्रवाई करने का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि प्राइवेट स्कूलों को लेटर जारी कर चुके हैं, जिसमें स्पष्ट तौर पर प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिये हैं कि केवल बच्चे का रिपोर्ट कार्ड, एड्रेस प्रूफ के लिए राशन कार्ड या रेजिडेंट सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट या बीपीएल कार्ड मांग सकते हैं। इसके अलावा किसी भी प्रकार का अन्य प्रूफ नहीं मांग सकते हैं। इसके अलावा विभाग की ओर एक अन्य लेटर भी प्राइवेट स्कूलों को जारी किया गया है कि जिसमें साफ तौर पर लिखा है कि नियम 134-ए के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चों से प्रॉस्पेक्ट्स, कंप्यूटर फी, लेब्रोरेट्री, कल्चरल एक्टिविटी व स्टेशनरी के नाम पर कोई राशि वसूल नहीं की जा सकती है।
वहीं कैंट में भी बीईओ कार्यालय में सुबह परेशान अभिभावक पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों में एडमिशन के नाम पर उन्हें धक्के मारे जा रहे हैं जबकि बार-बार दस्तावेजों का बहाना बनाकर उन्हें स्कूल से बाहर किया जा रहा है। अप्रैल माह से नया सेशन शुरू हो चुका है, मगर अभी तक परीक्षा देने वाले 60 प्रतिशत बच्चों को अभी स्कूलों में दाखिला नहीं मिला है
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
नियम 134-ए के तहत जहां अभिभावक बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला कराने के लिए बीईओ कार्यालयों में चक्कर लगा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शुक्रवार को फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने घोषणा कि सरकार जब तक रिइंबर्समेंट नहीं देती, तब तक वह किसी भी विद्यार्थी को स्कूल में एडमिशन नहीं देंगे। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट ने सरकार को नियम 134-ए के तहत निजी स्कूल संचालकों द्वारा फ्री पढ़ाए जाने वाले बच्चों की एवज में रिइंबर्समेंट देने के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार रिइंबर्समेंट देने की बजाए निजी स्कूलों को तंग करने में लगी है और मेधावी बच्चों को भी परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट की अवमानना के खिलाफ एसोसिएशन कोर्ट जाएगी और रिइंबर्समेंट की मांग करेगी।
कुलभूषण शर्मा वीरवार को सिटी के एक स्कूल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब निजी स्कूल 134-ए के तहत किसी विद्यार्थी को एडमिशन नहीं देंगे, जिन्हें एडमिशन दे दिया गया है उन्हें हटाया नहीं जाएगा, लेकिन आगे के लिए निजी स्कूल ये सुविधा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार प्रति बच्चा 1600 रुपये महीना रिइंबर्समेंट दे रही है। उत्तराखंड में भी सरकार द्वारा निजी स्कूल संचालकों को मुफ्त पढ़ाने की एवज में रिइंबर्समेंट दी जा रही है, लेकिन हरियाणा सरकार मात्र 200 रुपये प्रति बच्चा रिइंबर्समेंट देने को भी तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार से रिइंबर्समेंट मिलने के आश्वासन में स्कूलों ने तीन सालों से बच्चों को मुफ्त पढ़ाया है, लेकिन अब उन्हें मजबूर होकर संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने अभिभावकों से भी आह्वान किया कि वह सरकार और अपने विधायक से सवाल करें कि उनकी सरकार निजी स्कूलों को रिइंबर्समेंट क्यों नहीं दे रही।
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एसोसिएशन जल्द करेगी गलत इनकम सर्टिफिकेट का खुलासा
कुलभूषण शर्मा ने यह भी कहा कि जल्द ही एसोसिएशन इस बात का भी खुलासा करेगी और बताएगी कि कैसे लोगों ने फ्री एडमिशन के चक्कर में गलत इनकम सर्टिफिकेट बनवाए और गरीबों का हक छीनने का काम किया ही उन्होंने कहा कि आरटीई में स्पष्ट है कि स्कूल जारी करने से पहले नेबरहुड देखे जाते हैं, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। बच्चों और चहेतों को लाभ पहुंचने के लिए उन्हें दूर-दूर उनकी पसंद के स्कूल जारी किए गए नियमों के खिलाफ है। कुलभूषण शर्मा ने आरोप लगाया कि मुफ्त में दी जाने वाली सीटों में भी सौदेबाजी हुई है ताकि बच्चों को उनका मनपसंद स्कूल दिया जा सके।
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एडमिशन नहीं देने वाले स्कूलों में बीईओ करेंगे आज निरीक्षण
वहीं ट्विन सिटी के बीईओ कार्यालय में परेशान अभिभावक शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। 134-ए के तहत किसी अभिभावकों से पैन कार्ड मांगे जा रहे हैं तो कोई स्कूल संचालक अभिभावकों को केवल दो वर्ष के लिए छात्र को एडमिशन देने के लिए राजी हो रहा है। इतना ही नहीं कुछ स्कूल संचालक तो आय के प्रूफ व अन्य दस्तावेज अभिभावकों से मांग रहे हैं। कई स्कूल वार्षिक चार्ज एक साथ जमा कराने को कह रहे हैं। ब्लॉक वन के बीईओ अधिकारी सुधीर कालड़ा ने बताया कि उनके पास शिकायतें आई हैं कि कुछ स्कूल अभिभावकों को बेवजह तंग कर रहे हैं, उनसे तरह-तरह के दस्तावेज मांग रहे हैं और दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे खुद शुक्रवार से प्राइवेट स्कूलों में जाकर निरीक्षण करेंगे कि उन स्कूलों में नियम 134 ए के तहत एडमिशन देने में क्या प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है। कहीं स्कूल वाले बच्चों से नाजायज राशि तो वसूल नहीं कर रहे। यदि स्कूल नियमों की अवहेेलना करते हैं, तो उन पर जिला कमेटी की सिफारिश पर कार्रवाई करने का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि प्राइवेट स्कूलों को लेटर जारी कर चुके हैं, जिसमें स्पष्ट तौर पर प्राइवेट स्कूलों को निर्देश दिये हैं कि केवल बच्चे का रिपोर्ट कार्ड, एड्रेस प्रूफ के लिए राशन कार्ड या रेजिडेंट सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट या बीपीएल कार्ड मांग सकते हैं। इसके अलावा किसी भी प्रकार का अन्य प्रूफ नहीं मांग सकते हैं। इसके अलावा विभाग की ओर एक अन्य लेटर भी प्राइवेट स्कूलों को जारी किया गया है कि जिसमें साफ तौर पर लिखा है कि नियम 134-ए के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चों से प्रॉस्पेक्ट्स, कंप्यूटर फी, लेब्रोरेट्री, कल्चरल एक्टिविटी व स्टेशनरी के नाम पर कोई राशि वसूल नहीं की जा सकती है।
वहीं कैंट में भी बीईओ कार्यालय में सुबह परेशान अभिभावक पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों में एडमिशन के नाम पर उन्हें धक्के मारे जा रहे हैं जबकि बार-बार दस्तावेजों का बहाना बनाकर उन्हें स्कूल से बाहर किया जा रहा है। अप्रैल माह से नया सेशन शुरू हो चुका है, मगर अभी तक परीक्षा देने वाले 60 प्रतिशत बच्चों को अभी स्कूलों में दाखिला नहीं मिला है