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बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं पर आधारित गुडिया नाटक का मंचन
Updated Mon, 05 Nov 2018 12:23 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग हरियाणा द्वारा आयोजित जिला स्तरीय युवा उत्सव में मंथन थिएटर एंड फिल्म फाउंडेशन ने नाट्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। अब नाटक गुड़िया अंबाला को प्रतिनिधित्व करते हुए कुरुक्षेत्र में होने वाले राज्य स्तरीय युवा उत्सव में मंचित होगा। रंगकर्मी उमा शंकर द्वारा निर्देशित ह्रदय स्पर्शी नाटक गुड़िया अपने नए आयाम स्थापित करने में सफल हो रहा हैं, मंथन द्वारा तैयार ये नाटक अब तक अंबाला के अलावा बठिंडा और बीकानेर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के नाट्य महोत्सव में भी प्रस्तुत हो चुका हैं। नाटक कर बारे में मूल रूप से हरियाणा या यूं कहें कि देश की सबसे बड़ी पहल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को सार्थक करता है। कहानी मुख्य रूप से बाप बेटी के रिश्तों पर केंद्रित रहती है मगर बाकी के किरदारों को भी नकारा नहीं जा सकता। नाटक में मुख्य रूप से बाबा (धरमू) नाम का किरदार है जो जगह जगह मेलो में कठपुतलियां नचा कर अपना जीवन चलाता है एक ऐसी बच्ची का पालन पोषण करता है जो मानसिक रूप से बीमार बच्ची है (नाटक का मूल किरदार गुड़िया) और उसे वह गांव के बाहर कूड़ेदान में पड़ी मिली थी, तमाम विपरीत परिस्थितियों में उसका पालन पोषण करता हैं और अपनी लाजवाब प्रस्तुति से निर्णायक मंडल का दिल जीत लेता हैं। अंत मे सभी ने तालियों के साथ कलाकारों का अभिवादन किया। नाटक में लव, तान्या, नेहा, राहुल, दिव्या, जतिंदर, आशा, अंजलि, कीर्ति, किरण, रजत, नमन, उमा शंकर व अन्य ने विभिन्न किरदार निभाए।
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अंबाला सिटी। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग हरियाणा द्वारा आयोजित जिला स्तरीय युवा उत्सव में मंथन थिएटर एंड फिल्म फाउंडेशन ने नाट्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। अब नाटक गुड़िया अंबाला को प्रतिनिधित्व करते हुए कुरुक्षेत्र में होने वाले राज्य स्तरीय युवा उत्सव में मंचित होगा। रंगकर्मी उमा शंकर द्वारा निर्देशित ह्रदय स्पर्शी नाटक गुड़िया अपने नए आयाम स्थापित करने में सफल हो रहा हैं, मंथन द्वारा तैयार ये नाटक अब तक अंबाला के अलावा बठिंडा और बीकानेर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के नाट्य महोत्सव में भी प्रस्तुत हो चुका हैं। नाटक कर बारे में मूल रूप से हरियाणा या यूं कहें कि देश की सबसे बड़ी पहल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को सार्थक करता है। कहानी मुख्य रूप से बाप बेटी के रिश्तों पर केंद्रित रहती है मगर बाकी के किरदारों को भी नकारा नहीं जा सकता। नाटक में मुख्य रूप से बाबा (धरमू) नाम का किरदार है जो जगह जगह मेलो में कठपुतलियां नचा कर अपना जीवन चलाता है एक ऐसी बच्ची का पालन पोषण करता है जो मानसिक रूप से बीमार बच्ची है (नाटक का मूल किरदार गुड़िया) और उसे वह गांव के बाहर कूड़ेदान में पड़ी मिली थी, तमाम विपरीत परिस्थितियों में उसका पालन पोषण करता हैं और अपनी लाजवाब प्रस्तुति से निर्णायक मंडल का दिल जीत लेता हैं। अंत मे सभी ने तालियों के साथ कलाकारों का अभिवादन किया। नाटक में लव, तान्या, नेहा, राहुल, दिव्या, जतिंदर, आशा, अंजलि, कीर्ति, किरण, रजत, नमन, उमा शंकर व अन्य ने विभिन्न किरदार निभाए।