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बिना बिल दवाइयां बेचने पर मेडिकल स्टोरों पर एफडीए ने की छापेमारी, नहीं दिखाया सेल का रिकार्ड
Updated Sat, 16 Jun 2018 12:48 AM IST
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बिना बिल दवाइयां बेचने पर मेडिकल स्टोरों पर एफडीए ने की छापेमारी, नहीं दिखाया सेल का रिकार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट । बिना बिल होलसेल मेडिकल स्टोरों पर मिल रही दवाइयों पर अमर उजाला के स्टिंग आपरेशन के बाद फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) शुक्रवार को हरकत में आ गया। स्टिंग किए गए तीनों मेडिकल स्टोरों का सेल एवं परचेज का रिकार्ड खंगाला। साथ ही दवाइयों की भी जांच की और उनके सैंपल लिए। तीनों मेडिकल स्टोरों के गोदामों पर छापा मारा गया। संचालकों ने ड्रग कंट्रोलर आफिसर (डीसीओ) को सेल का रिकार्ड ही नहीं दिखाया। साथ ही उन्हें कुछ कमियां भी मिलीं, जिसको लेकर संचालकों को फटकार लगाई। इसकी रिपोर्ट वह सोमवार को लाइसेंस अथारिटी को देंगे। छापेमारी की सूचना से क्षेत्र के अन्य दवा विक्रेताओं में हड़कंप मच गया। यह कार्रवाई सुबह से शाम तक चली।
बता दें कि बिना बिल दवाइयां बेचने के मामले में डीसीओ प्रवीण चौधरी शुक्रवार ने सुबह सबसे पहले प्रिंस मेडिसिन सेंटर पर छापा मारा। इसके बाद मुंशी मेडिसिन स्टोर फिर एसके मेडिकल स्टोर पर। तीनों के गोदामों को भी खंगाला गया। ऑफिसर ने दुकान के बाहर सड़क पर दूर तक दवाइयां खुले में पड़ी होने का कड़ा नोटिस लिया। तीनों मेडिकल स्टोर संचालकों ने परचेज का बिल तो दिखा दिया लेकिन सेल का नहीं दिखाया। इसके अलावा कुछ दवाइयों के सैंपल भी लिए। उन्हें चंडीगढ़ लैब के लिए भेज दिया गया। इस दौरान कुछ कमियां भी मिली।
इन दवाइयों के लिये गए सैंपल
-प्रिंस मेडिकल स्टोर पर सबसे पहले विभाग ने छापा मारा। यहां दवाइयां बाहर रखी हुई थीं। ग्लूकान डी, ग्लूकान सी, बेबी पाउडर, बिटाडिन के सैंपल लिए गए।
-मुंशी मेडिसिन स्टोर पर जब टीम पहुंची तो हड़कंप मच गया। लोगों की मांग पर दवाइयां दी जा रही थीं। इसके बाद सारा काम वहीं रुक गया। अनवांटेड, कंडोम, सुहाग्रा, एल्थ्रोसिन समेत कई दवाइयों के सैंपल लिए गए।
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-आखिरी में एसके मेडिकल स्टोर पर छापेमारी हुई। दवाइयां बिकासूल, पैरासिटामाल के सैंपल लिये गए।
खुले में रखी हुई थीं दवाइयां
जब आफिसर ने मेडिकल स्टोर पर छापा मारा तो कुछ खरीदार मौके पर पर्चियां लेकर खड़े थे जिन्होंने जरूरत पडने पर बिल मांगने की बात कही। दवाइयां सड़क के पास खुले में रखी हुई थीं। दुकानों पर साफ-सफाई नहीं थी। दवाइयों को उचित तापमान में रखने की जरूरत होती है।
यह है मामला
अमर उजाला ने अपने स्टिंग आपरेशन में यह बताया था कि दवाइयों के कुछ होलसेलर बिना बिल दवाइयां बेच रहे हैं। खानापूर्ति के लिए ये रात में कुछ मेडिकल स्टोर के नाम बिल काटने की औपचारिकता पूरी कर लेते हैं।
अब आगे क्या
मेडिकल स्टोर संचालकों ने परचेज का रिकार्ड तो दिखा दिया पर सेल का नहीं दिखाया। इसकी रिपोर्ट लाइसेंसिंग अथारिटी के पास जाएगी। शोकॉज नोटिस जारी करने के बाद 28 दिन का समय दुकानदारों को दिया जाता है। इसके बाद रिपोर्ट सही नहीं होने पर लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल हो सकता है। हालांकि इस दौरान संचालकों के पास सेल का रिकार्ड सही करने का समय मिल जाएगा।
अमर उजाला की खबर पढ़ने के बाद तीनों मेडिकल स्टोरों में छापा मारकर सेल व परचेज का रिकार्ड खंगाला गया। कार्रवाई की रिपोर्ट लाइसेंसिंग अथॉरिटी को सौंपी जाएगी। वहीं कुछ कमियां मिली हैं। दवाइयों को खुले में रखा गया था। तापमान की परवाह किए बिना दुकानदार दवाइयां बेचने में लगे हुए हैं। यह इंसान के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।
-प्रवीण कुमार, ड्रग कंट्रोलर आफिसर
अमर उजाला का प्रयास अच्छा है। तीनों मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी हुई है। सेल का रिकार्ड नहीं मिला है। संचालकों के खिलाफ जरूर कार्रवाई होगी। छापेमारी के दौरान कैश मेमो का नंबर नोट किया जाता है। जरूरत पडने पर उसे भी मंगाया जा सकता है। बैक डेट से कोई इंट्री नहीं कर सकता।
-रिपन मेहता, सीनियर ड्रग कंट्रोलर आफिसर
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट । बिना बिल होलसेल मेडिकल स्टोरों पर मिल रही दवाइयों पर अमर उजाला के स्टिंग आपरेशन के बाद फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) शुक्रवार को हरकत में आ गया। स्टिंग किए गए तीनों मेडिकल स्टोरों का सेल एवं परचेज का रिकार्ड खंगाला। साथ ही दवाइयों की भी जांच की और उनके सैंपल लिए। तीनों मेडिकल स्टोरों के गोदामों पर छापा मारा गया। संचालकों ने ड्रग कंट्रोलर आफिसर (डीसीओ) को सेल का रिकार्ड ही नहीं दिखाया। साथ ही उन्हें कुछ कमियां भी मिलीं, जिसको लेकर संचालकों को फटकार लगाई। इसकी रिपोर्ट वह सोमवार को लाइसेंस अथारिटी को देंगे। छापेमारी की सूचना से क्षेत्र के अन्य दवा विक्रेताओं में हड़कंप मच गया। यह कार्रवाई सुबह से शाम तक चली।
बता दें कि बिना बिल दवाइयां बेचने के मामले में डीसीओ प्रवीण चौधरी शुक्रवार ने सुबह सबसे पहले प्रिंस मेडिसिन सेंटर पर छापा मारा। इसके बाद मुंशी मेडिसिन स्टोर फिर एसके मेडिकल स्टोर पर। तीनों के गोदामों को भी खंगाला गया। ऑफिसर ने दुकान के बाहर सड़क पर दूर तक दवाइयां खुले में पड़ी होने का कड़ा नोटिस लिया। तीनों मेडिकल स्टोर संचालकों ने परचेज का बिल तो दिखा दिया लेकिन सेल का नहीं दिखाया। इसके अलावा कुछ दवाइयों के सैंपल भी लिए। उन्हें चंडीगढ़ लैब के लिए भेज दिया गया। इस दौरान कुछ कमियां भी मिली।
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इन दवाइयों के लिये गए सैंपल
-प्रिंस मेडिकल स्टोर पर सबसे पहले विभाग ने छापा मारा। यहां दवाइयां बाहर रखी हुई थीं। ग्लूकान डी, ग्लूकान सी, बेबी पाउडर, बिटाडिन के सैंपल लिए गए।
-मुंशी मेडिसिन स्टोर पर जब टीम पहुंची तो हड़कंप मच गया। लोगों की मांग पर दवाइयां दी जा रही थीं। इसके बाद सारा काम वहीं रुक गया। अनवांटेड, कंडोम, सुहाग्रा, एल्थ्रोसिन समेत कई दवाइयों के सैंपल लिए गए।
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खुले में रखी हुई थीं दवाइयां
जब आफिसर ने मेडिकल स्टोर पर छापा मारा तो कुछ खरीदार मौके पर पर्चियां लेकर खड़े थे जिन्होंने जरूरत पडने पर बिल मांगने की बात कही। दवाइयां सड़क के पास खुले में रखी हुई थीं। दुकानों पर साफ-सफाई नहीं थी। दवाइयों को उचित तापमान में रखने की जरूरत होती है।
यह है मामला
अमर उजाला ने अपने स्टिंग आपरेशन में यह बताया था कि दवाइयों के कुछ होलसेलर बिना बिल दवाइयां बेच रहे हैं। खानापूर्ति के लिए ये रात में कुछ मेडिकल स्टोर के नाम बिल काटने की औपचारिकता पूरी कर लेते हैं।
अब आगे क्या
मेडिकल स्टोर संचालकों ने परचेज का रिकार्ड तो दिखा दिया पर सेल का नहीं दिखाया। इसकी रिपोर्ट लाइसेंसिंग अथारिटी के पास जाएगी। शोकॉज नोटिस जारी करने के बाद 28 दिन का समय दुकानदारों को दिया जाता है। इसके बाद रिपोर्ट सही नहीं होने पर लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल हो सकता है। हालांकि इस दौरान संचालकों के पास सेल का रिकार्ड सही करने का समय मिल जाएगा।
अमर उजाला की खबर पढ़ने के बाद तीनों मेडिकल स्टोरों में छापा मारकर सेल व परचेज का रिकार्ड खंगाला गया। कार्रवाई की रिपोर्ट लाइसेंसिंग अथॉरिटी को सौंपी जाएगी। वहीं कुछ कमियां मिली हैं। दवाइयों को खुले में रखा गया था। तापमान की परवाह किए बिना दुकानदार दवाइयां बेचने में लगे हुए हैं। यह इंसान के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।
-प्रवीण कुमार, ड्रग कंट्रोलर आफिसर
अमर उजाला का प्रयास अच्छा है। तीनों मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी हुई है। सेल का रिकार्ड नहीं मिला है। संचालकों के खिलाफ जरूर कार्रवाई होगी। छापेमारी के दौरान कैश मेमो का नंबर नोट किया जाता है। जरूरत पडने पर उसे भी मंगाया जा सकता है। बैक डेट से कोई इंट्री नहीं कर सकता।
-रिपन मेहता, सीनियर ड्रग कंट्रोलर आफिसर