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- आबकारी व कराधान विभाग में जीएसटी लागू होने के बाद बढ़ी आवेदनों की संख्या
Updated Thu, 03 Aug 2017 12:07 AM IST
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अंबाला कैंट। जीएसटी लागू होने के बाद एकाएक नई कंपनियां पंजीकृत कराने के लिए आवेदनों की भरमार बढ़ गई है। आबकारी व कराधान विभाग में कंपनियां पंजीकृत कराने के लिए आवेदन बढ़ते जा रहा है। टैक्स के बदले प्रारूप में कंपनियां नए सिरे से अब पंजीकरण करा रही है जबकि कुछ 20 लाख रुपये से कम टर्न ओवर को दिखाकर टैक्स में छूट लेने के प्रयास में भी जुटे हुए हैं। आलम यह है कि आबकारी व कराधान विभाग के पास 1355 आवेदन नए पंजीकरण को लेकर आ चुके हैं और करीब 1200 का पंजीकरण हो चुका हैं।
पंजीकरण कराने के लिए विभागीय कार्यालय की दौड़ लगाने के साथ-साथ व्यापारी ऑनलाइन आवेदन भी कर रहे हैं। टैक्स प्रणाली में अब काफी कुछ नया है। सरकार द्वारा तय किया गया है कि 20 लाख रुपये से कम टर्न ओवर वाले उद्योगों को टैक्स दायरे में नहीं लाया जाएगा। अब तक जिस फर्म की टर्न ओवर 20 लाख रुपये से ज्यादा है वहीं टैक्स दायरे में आएगी। अब कई व्यापारी ऐसे हैं जोकि टर्न ओवर को कम दिखाकर टैक्स में छूट हासिल करना चाहते हैं और यही कारण है कि आबकारी व कराधान विभाग के पास बीते एक माह में तेरह सौ से भी ज्यादा पंजीकरण के नए आवेदन पहुंच चुके हैं। इन आवेदनों को लेकर विभागीय कर्मी भी कागजी कार्रवाई में जुड़े हैं। जिले में 1200 नई फर्मों का पंजीकरण किया जा चुका है जबकि शेष के दस्तावेजों व अन्य पड़ताल के बाद कार्रवाई की जा रही है।
अब तक 12 हजार हो चुके माइग्रेट
जिले में इस समय 15301 पंजीकृत फर्में हैं, जीएसटी आने के बाद से अब तक करीब 12 हजार फर्म जीएसटी में एनरोल हो चुकी है। पहले विभाग द्वारा 31 जून तक समय सीमा तय की गई थी, मगर बाद में इसे तीन माह के लिए बढ़ा दिया गया था। जो फर्म अभी जीएसटी के तहत एनरोल नहीं हो सकी है उनमें से कुछ फर्मों की टर्न ओवर 20 लाख से कम है जबकि कुछ को एनरोल करने की प्रक्रिया अभी चल रही है। दूसरी ओर जिले में अभी तक 228 फर्मों का टर्न ओवर 20 लाख रुपये से अधिक पाया गया है।
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कम टर्न ओवर वाली कंपनियां करा रही पंजीकरण
पहले जिन फर्मों से अपना पंजीकरण नहीं कराया था अब वह कंपनियां भी आगे आते हुए पंजीकरण करा रही है। विभागीय कर्मी बताते हैं कि जीएसटी को लेकर पहले भ्रांतियां ज्यादा थी जिस वजह से कारोबारी असमंजस की स्थिति में थे, मगर अब भ्रम दूर हो रहा है जिस वजह से कम टर्न ओवर वाले कारोबारी भी पंजीकरण कराने के लिए आगे आ रहे हैं।
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पंजीकरण कराने के लिए विभागीय कार्यालय की दौड़ लगाने के साथ-साथ व्यापारी ऑनलाइन आवेदन भी कर रहे हैं। टैक्स प्रणाली में अब काफी कुछ नया है। सरकार द्वारा तय किया गया है कि 20 लाख रुपये से कम टर्न ओवर वाले उद्योगों को टैक्स दायरे में नहीं लाया जाएगा। अब तक जिस फर्म की टर्न ओवर 20 लाख रुपये से ज्यादा है वहीं टैक्स दायरे में आएगी। अब कई व्यापारी ऐसे हैं जोकि टर्न ओवर को कम दिखाकर टैक्स में छूट हासिल करना चाहते हैं और यही कारण है कि आबकारी व कराधान विभाग के पास बीते एक माह में तेरह सौ से भी ज्यादा पंजीकरण के नए आवेदन पहुंच चुके हैं। इन आवेदनों को लेकर विभागीय कर्मी भी कागजी कार्रवाई में जुड़े हैं। जिले में 1200 नई फर्मों का पंजीकरण किया जा चुका है जबकि शेष के दस्तावेजों व अन्य पड़ताल के बाद कार्रवाई की जा रही है।
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अब तक 12 हजार हो चुके माइग्रेट
जिले में इस समय 15301 पंजीकृत फर्में हैं, जीएसटी आने के बाद से अब तक करीब 12 हजार फर्म जीएसटी में एनरोल हो चुकी है। पहले विभाग द्वारा 31 जून तक समय सीमा तय की गई थी, मगर बाद में इसे तीन माह के लिए बढ़ा दिया गया था। जो फर्म अभी जीएसटी के तहत एनरोल नहीं हो सकी है उनमें से कुछ फर्मों की टर्न ओवर 20 लाख से कम है जबकि कुछ को एनरोल करने की प्रक्रिया अभी चल रही है। दूसरी ओर जिले में अभी तक 228 फर्मों का टर्न ओवर 20 लाख रुपये से अधिक पाया गया है।
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कम टर्न ओवर वाली कंपनियां करा रही पंजीकरण
पहले जिन फर्मों से अपना पंजीकरण नहीं कराया था अब वह कंपनियां भी आगे आते हुए पंजीकरण करा रही है। विभागीय कर्मी बताते हैं कि जीएसटी को लेकर पहले भ्रांतियां ज्यादा थी जिस वजह से कारोबारी असमंजस की स्थिति में थे, मगर अब भ्रम दूर हो रहा है जिस वजह से कम टर्न ओवर वाले कारोबारी भी पंजीकरण कराने के लिए आगे आ रहे हैं।