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- किसान बोले, खरपतवार नाशक दवाइयों का खेतों में नहीं हो रहा असर
Updated Tue, 09 Jan 2018 12:17 AM IST
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नकली पेस्टीसाइड की बिक्री धड़ल्ले से, किसानों को चूना
अमर उजाला ब्यूरो
बराड़ा। क्षेत्र में नकली पेस्टीसाइड धड़ल्ले से बिक रही है, जबकि किसानों को अच्छा खासा नुकसान हो रहा है। किसानों की मानें, तो इन दवाओं का असर खरपतवार नाशक पर हो ही नहीं रहा। आलम यह है कि न तो दुकानदार सुन रहा है और न ही पेस्टीसाइड विक्रेता कंपनी। ऐसे में किसानों को यह विके्रता चूना लगा रहे हैं।
किसानों की मानें, तो गेहूं की फसल बढ़ने के साथ ही खरपतवार का अंदेशा भी बढने लगता है। इसी स्थिति से निपटने के लिए मार्केट में मिलने वाले पेस्टीसाइड का सहारा यह किसान लेते हैं। प्रति एकड़ के हिसाब से किसान ये पेस्टीसाइड डालते हैं ताकि खरपतवार गेहूं की फसल को नुकसान न पहुंचा सकें। लेढकन यह पेस्टीसाइड ही किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। क्षेत्र के किसानों में धर्मेंद्र, पाला राम, कली राम, दीदार सिंह ने बताया कि बाजार में उपलब्ध खरपतवार नाशक दवाओं का असर बेअसर साबित हो रहा है। इस कारण भारी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खेतों में जितनी दवा डालनी चाहिए, वह डाली जा रही है, लेकिन फिर भी खरपतवार खत्म नहीं हो रहा है। दवा बेचते समय विके्रता दावे तो करता है, लेकिन इन दावाओं पर यह भपेस्टीसाइड खरा नहीं उतर रहे हैं। एक तो यह दवा ही छह सौ से सात सौ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मिलती है, जबकि इसके छिड़काव के लिए लेबर को ढाई सौ रुपये देने पड़ते हैं। इस प्रकार प्रति एकड़ एक हजार रूपए के लगभग खर्च आ जाता है। कईं किसानों ने दो से तीन बार तक स्प्रे किया परंतु कोई फायदा नहीं हुआ, जिस कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि इस बारे में पेस्टीसाईडस विक्रेताओं से पूछा जाता है तो उनका केवल यही जवाब होता है कि वो तो केवल दवाओं की ओरिजिनल होने की गारंटी तो ले सकते हैं, परंतु खरपतवार नष्ट होगा या नहीं इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। इसके लिए कंपनी के टोलफ्री नंबर पर बात करो। जब किसान टोलफ्री नंबर पर बात करते हैं तो वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
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हो सकता है कि दवा का छिड़काव करते समय गलती हो रही हो, जबकि आवश्यकता अधिक छिड़काव की हो। फिर भी यदि कोई ऐसी समस्या किसान को आती है, तो वह मुझे मिल सकता है। इसके अलावा विभाग भी समय-समय पर खेतीबाड़ी में इस्तेमाल होने वाली दवाओं आदि की जांच करता है। यदि कहीं कोई नकली पेस्टीसाइड बिकता है, तो कार्रवाई की जाएगी।
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- सूरजभान, एसडीओ कृषि विभाग
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अमर उजाला ब्यूरो
बराड़ा। क्षेत्र में नकली पेस्टीसाइड धड़ल्ले से बिक रही है, जबकि किसानों को अच्छा खासा नुकसान हो रहा है। किसानों की मानें, तो इन दवाओं का असर खरपतवार नाशक पर हो ही नहीं रहा। आलम यह है कि न तो दुकानदार सुन रहा है और न ही पेस्टीसाइड विक्रेता कंपनी। ऐसे में किसानों को यह विके्रता चूना लगा रहे हैं।
किसानों की मानें, तो गेहूं की फसल बढ़ने के साथ ही खरपतवार का अंदेशा भी बढने लगता है। इसी स्थिति से निपटने के लिए मार्केट में मिलने वाले पेस्टीसाइड का सहारा यह किसान लेते हैं। प्रति एकड़ के हिसाब से किसान ये पेस्टीसाइड डालते हैं ताकि खरपतवार गेहूं की फसल को नुकसान न पहुंचा सकें। लेढकन यह पेस्टीसाइड ही किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। क्षेत्र के किसानों में धर्मेंद्र, पाला राम, कली राम, दीदार सिंह ने बताया कि बाजार में उपलब्ध खरपतवार नाशक दवाओं का असर बेअसर साबित हो रहा है। इस कारण भारी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खेतों में जितनी दवा डालनी चाहिए, वह डाली जा रही है, लेकिन फिर भी खरपतवार खत्म नहीं हो रहा है। दवा बेचते समय विके्रता दावे तो करता है, लेकिन इन दावाओं पर यह भपेस्टीसाइड खरा नहीं उतर रहे हैं। एक तो यह दवा ही छह सौ से सात सौ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मिलती है, जबकि इसके छिड़काव के लिए लेबर को ढाई सौ रुपये देने पड़ते हैं। इस प्रकार प्रति एकड़ एक हजार रूपए के लगभग खर्च आ जाता है। कईं किसानों ने दो से तीन बार तक स्प्रे किया परंतु कोई फायदा नहीं हुआ, जिस कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि इस बारे में पेस्टीसाईडस विक्रेताओं से पूछा जाता है तो उनका केवल यही जवाब होता है कि वो तो केवल दवाओं की ओरिजिनल होने की गारंटी तो ले सकते हैं, परंतु खरपतवार नष्ट होगा या नहीं इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। इसके लिए कंपनी के टोलफ्री नंबर पर बात करो। जब किसान टोलफ्री नंबर पर बात करते हैं तो वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
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हो सकता है कि दवा का छिड़काव करते समय गलती हो रही हो, जबकि आवश्यकता अधिक छिड़काव की हो। फिर भी यदि कोई ऐसी समस्या किसान को आती है, तो वह मुझे मिल सकता है। इसके अलावा विभाग भी समय-समय पर खेतीबाड़ी में इस्तेमाल होने वाली दवाओं आदि की जांच करता है। यदि कहीं कोई नकली पेस्टीसाइड बिकता है, तो कार्रवाई की जाएगी।
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- सूरजभान, एसडीओ कृषि विभाग