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गोरखपुर: 10 माह में बचाए गए 80 वन्य जीवों का घर बना चिड़ियाघर

Thu, 17 Feb 2022 02:52 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 17 Feb 2022 02:52 PM IST
सार

डॉ. योगेश ने बताया कि जंगल की तुलना में चिड़ियाघर में वन्यजीवों की आयु औसतन चार से पांच साल बढ़ जाती है। इसकी वजह है चिड़ियाघरों में जानवरों की उचित देखरेख, बेहतर भोजन व वातावरण है। चिड़ियाघर में वन्य जीवों की आयु व जंगल की आयु के बीच में करीब चार से पांच वर्षों का अंतर होता है।

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Zoo became home to 80 wild animals saved in 10 months
Gorakhpur zoo - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जंगल के राजा शेर हों या राष्ट्रीय पक्षी मोर, प्राणि उद्यान अब तक 80 वन्य जीवों की जान बचा चुका है। इसमें न सिर्फ उनकी बीमारी का इलाज किया, बल्कि उन्हें पहले की तुलना में सेहतमंद भी बनाया है।

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अभी दो माह पूर्व महाराजगंज जिले के नौतनवा में एक तेंदुआ गंभीर रूप से घायल हो गया था। किसी तरह 10 माह के उस तेंदुए को चिड़ियाघर लाया गया। दो माह के उपचार के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। चिड़ियाघर के बब्बर शेर मरियम का भी हाल यही है। 18 वर्षीय मरियम की तबीयत पांच माह पहले बिगड़ गई थी। सितंबर के दूसरे सप्ताह में जिले में हुई जोरदार बारिश के कारण बब्बर शेर के बाड़े में जलभराव हो गया था।
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इसी दौरान बब्बर शेरनी के तलवे में जख्म हो गया था। अक्तूबर के आखिर में मरियम की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके कारण आईबीआरआई बरेली के चिकित्सकों का दो सदस्यीय दल भी देखभाल के लिए बुलाया गया। मरियम की ढलती उम्र ने पूरे प्राणि उद्यान कर्मियों की चिंता बढ़ा दी थी। प्राणि उद्यान के निदेशक डॉ. एच राजा मोहन के निर्देशन में चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह के उपचार से मरियम की तबीयत में सुधार हो गया।
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ऐसे ही आजाद चौक चौराहे के पास एक बंदर गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर वन निगम की टीम ने बंदर को बचाकर उसे चिड़ियाघर इलाज के लिए भेजा। वहां इलाज के दौरान अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। चिड़ियाघर के बंदर वाले बाड़े में इसे रखा गया है। खजनी, कुसम्ही जंगल के पास से चार अजगरों को भी वन निगम की टीम ने रेस्क्यू किया था। अब उन्हें सर्पेंटेरियम में रखा गया है।

कुसम्ही जंगल से हिरण के तीन जोड़े बचाए गए गए थे। इन्हें अब बाड़े में रखा गया है। इसके अलावा अन्य पक्षी और अन्य वन्य जीव यहां लाए गए हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि बाहर से 80 छोटे-बड़े वन्य जीवों को रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाया जा चुका है। उपचार के बाद सभी अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

एक चौथाई हो जाती वन्य जीवों की आयु

डॉ. योगेश ने बताया कि जंगल की तुलना में चिड़ियाघर में वन्यजीवों की आयु औसतन चार से पांच साल बढ़ जाती है। इसकी वजह है चिड़ियाघरों में जानवरों की उचित देखरेख, बेहतर भोजन व वातावरण है।  चिड़ियाघर में वन्य जीवों की आयु व जंगल की आयु के बीच में करीब चार से पांच वर्षों का अंतर होता है। शेर, बाघ, तेंदुआ, चीता की जंगल की आयु 12 से 14 वर्ष होती है, लेकिन यही वन्यजीव यदि चिड़ियाघरों में रहते हैं तो उनकी आयु 16 से करीब 20 वर्ष होती है। प्रमाण के तौर पर गोरखपुर चिड़ियाघर में मौजूद मरियम (शेरनी) करीब 18 वर्ष की हो चुकी है।

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