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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Zila Panchayat President Election 2021 special story of Siddharthnagar election firing after dispute 11 years ago

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: 11 साल पहले यहां चुनाव में तड़तड़ाई थी गोलियां, जमकर चले थे ईंट पत्थर, पढ़िए पूरी कहानी

Sun, 04 Jul 2021 07:09 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, सिद्धार्थनगर।
अमर उजाला नेटवर्क, सिद्धार्थनगर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 04 Jul 2021 07:09 PM IST
सार

वर्ष 2005 में हुआ था मतदान, जनकनंदिनी बनी थीं अध्यक्ष। 20 वर्ष बाद अध्यक्ष की कुर्सी पर हुआ भाजपा का कब्जा।

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Zila Panchayat President Election 2021 special story of Siddharthnagar election firing after dispute 11 years ago
भालचंद यादव व साधना चौधरी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

यूपी में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान सिद्धार्थनगर जिले का वर्ष 2010 का खौफनाक मंजर याद आ गया। दरअसल, उस समय जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन के दिन अचानक वीआईपी कारें आपस में टकरा गईं थी और अचानक गोलियां तड़तड़ाने लगी। उसी दहशत के माहौल में प्रत्याशी के प्रस्तावक को बीच रास्ते से अपहरण कर लिया गया और चुनाव निविर्रोध हो गया। 
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चुनाव के दौरान वर्ष 2010 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लोगों के जेहन में उठ गया। उस समय यूपी में बसपा की सरकार थी। संतकबीरनगर जिले से पूर्व सांसद भालचंद यादव के पुत्र प्रमोद यादव और भाजपा से साधना चौधरी प्रत्याशी थीं। कलेक्ट्रेट के पास से साधना चौधरी के प्रस्तावक को उठा लिया गया। हाथापाई हुई और फायरिंग भी हुई। दोनों तरफ से ईंट पत्थर भी चले। इस दौरान भाजपा, सपा सहित अन्य दलों के नेता संयुक्त मंच पर आ गए थे। साड़ी तिराहा पर सभी दल के नेताओं ने धरना प्रदर्शन किया था। हालांकि भालचंद यादव के पुत्र का कार्यकाल दो ही साल रहा।
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16 वर्ष बाद हुआ मतदान
जिले में 16 साल बाद ऐसा अवसर आया, जब जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए मतदान हुआ। वर्ष 2005 में मतदान के बाद निर्वाचित अध्यक्ष निर्विरोध ही होते रहे। इस बार निर्विरोध की कोशिशें नाकाम रही। लिहाजा दो प्रत्याशियों के आमने-सामने होने से मतदान की स्थिति उत्पन्न हुई।
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29 दिसंबर 1988 को बस्ती से अलग होने के बाद वर्ष 1993 जिला पंचायत अस्तित्व में आया। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मुहम्मद सईद भ्रमर को मनोनीत किया था। इसके बाद 1995 में चुनाव लड़कर पुनः भ्रमर निर्वाचित होने में सफल रहे। वर्ष 2000 में भाजपा की साधना चौधरी और सपा के लालजी यादव आमने-सामने थे। सर्वाधिक मत पाकर साधना विजयी हुई थीं। वर्ष 2005 में पूर्व विधायक पप्पू चौधरी की मां प्रमिला सिंह और निर्दलीय जनकनंदिनी चौरसिया के बीच मुकाबला हुआ था, जिसमें जनकनंदिनी ने जीत हासिल की थी। इसके 16 वर्ष बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अब मतदान हुआ है।

वर्ष 2010 में खलीलाबाद के पूर्व सांसद भालचंद्र यादव के पुत्र प्रमोद यादव निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। दो वर्ष के कार्यकाल के बाद जिला पंचायत सदस्यों ने तख्ता पलट कर दिया। अविश्वास प्रस्ताव के बाद हुए चुनाव में सपा की पूजा यादव निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गईं। पूजा वर्ष 2012 से 2015 तक अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रहीं। वर्ष 2015 में सपा नेता राम कुमार उर्फ चिनकू यादव के सहयोगी गरीब दास भी निर्विरोध निर्वाचित हुए। इस बार के चुनाव में भाजपा की शीतल सिंह और सपा की पूजा यादव आमने-सामने रहीं। लिहाजा 16 वर्ष बाद एक बार पुनः मतदान की स्थिति उत्पन्न हो गई।

सन्नाटे में रहे कांग्रेस, बसपा के कार्यालय

जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए मतदान के दिन जहां भाजपा और सपा कार्यालयों पर नेताओं, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं की भीड़ रही, वहीं कांग्रेस और बसपा के कार्यालय पर सन्नाटा रहा। इन दोनों दलों के कार्यालय पर ताला लगा हुआ था। भाजपा के सहयोगी दल अपना दल एस के विधायक अमर सिंह चौधरी मतदान केंद्र पर नहीं दिखे।

28 वर्ष में दूसरी बार भाजपा हुई काबिज
जिला पंचायत के अस्त्वि में आए 28 वर्ष हो गए। पहली बार 2000 के चुनाव में साधना चौधरी ने जीत दर्ज कर सदन में भाजपा का परचम लहराया। दूसरी बार 20 वर्ष बाद शीतल सिंह पत्नी उपेंद्र सिंह भाजपा प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुईं।
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