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देवरिया: युवा अधिवक्ता ने फंदे से लटककर दे दी जान, मचा हड़कंप
Mon, 15 Nov 2021 03:28 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, देवरिया।
अमर उजाला ब्यूरो, देवरिया।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 15 Nov 2021 03:28 PM IST
सार
रुद्रपुर कोतवाली के रनिहवा गांव निवासी धर्मेंद्र सिंह पशु चिकित्सा विभाग में कंपाउंडर पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने शहर के भुजौली कालोनी में मकान बनवाया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
देवरिया शहर के भुजौली कालोनी में सोमवार की सुबह तहसील के एक अधिवक्ता ने कमरा बंद कर फांसी लगाकर जान दे दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने फाटक तोड़कर शव को बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस आत्माहत्या के कारण का पता लगाने में जुटी है।
जानकारी के अनुसार, रुद्रपुर कोतवाली के रनिहवा गांव निवासी धर्मेंद्र सिंह पशु चिकित्सा विभाग में कंपाउंडर पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने शहर के भुजौली कालोनी में मकान बनवाया है। यहीं पर अपने बेटे संदीप सिंह (35) और बहू के साथ सपरिवार रहते हैं। बेटा संदीप सिंह अधिवक्ता के रूप में तहसील में प्रैक्टिस कर रहा था।
सोमवार की भोर में संदीप उठा और कुछ देर बाद अंदर से कमरा बंद कर कुंडी के सहारे फंदा लगाकर खुदकुशी कर लिया। सुबह करीब 8:00 बजे तक जब कमरा नहीं खुला तो परिजनों ने संदीप को आवाज दिया। लेकिन कमरे के अंदर से कोई जवाब न मिलने पर पत्नी ने खिड़की से देखा तो उसका शव लटक रहा था।
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शोर मचाने पर पहुंचे परिजन दहाड़े मारकर रोने लगे। परिजनों ने घटना की जानकारी कोतवाली पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे कोतवाल नवीन कुमार सिंह और चौकी प्रभारी ने कमरे का फाटक तोड़वाया और शव को बाहर निकाला।
घटना के बाद पिता और पत्नी का रो- रो कर के बुरा हाल हो गया था। परिजनों के अनुसार संदीप की नौ साल पहले शादी हुई थी। लेकिन अभी कोई संतान नहीं हुआ था। कोतवाल ने बताया कि अभी आत्महत्या के कारणों के बारे पता किया जा रहा है।
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जानकारी के अनुसार, रुद्रपुर कोतवाली के रनिहवा गांव निवासी धर्मेंद्र सिंह पशु चिकित्सा विभाग में कंपाउंडर पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने शहर के भुजौली कालोनी में मकान बनवाया है। यहीं पर अपने बेटे संदीप सिंह (35) और बहू के साथ सपरिवार रहते हैं। बेटा संदीप सिंह अधिवक्ता के रूप में तहसील में प्रैक्टिस कर रहा था।
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सोमवार की भोर में संदीप उठा और कुछ देर बाद अंदर से कमरा बंद कर कुंडी के सहारे फंदा लगाकर खुदकुशी कर लिया। सुबह करीब 8:00 बजे तक जब कमरा नहीं खुला तो परिजनों ने संदीप को आवाज दिया। लेकिन कमरे के अंदर से कोई जवाब न मिलने पर पत्नी ने खिड़की से देखा तो उसका शव लटक रहा था।
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शोर मचाने पर पहुंचे परिजन दहाड़े मारकर रोने लगे। परिजनों ने घटना की जानकारी कोतवाली पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे कोतवाल नवीन कुमार सिंह और चौकी प्रभारी ने कमरे का फाटक तोड़वाया और शव को बाहर निकाला।
घटना के बाद पिता और पत्नी का रो- रो कर के बुरा हाल हो गया था। परिजनों के अनुसार संदीप की नौ साल पहले शादी हुई थी। लेकिन अभी कोई संतान नहीं हुआ था। कोतवाल ने बताया कि अभी आत्महत्या के कारणों के बारे पता किया जा रहा है।