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विश्व दृष्टि दिवस: मोबाइल स्क्रीन के दुष्प्रभाव से सिकुड़ रहीं आंखों की मांसपेशियां, पढ़िए डॉक्टर के सुझाव
Thu, 14 Oct 2021 03:18 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 14 Oct 2021 03:18 PM IST
सार
बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में ढाई साल में मायोपिया के डेढ़ गुना मरीज बढ़े हैं। इसमें अधिकांश बच्चे हैं। निजी नेत्र चिकित्सकों के ओपीडी में 70 से 80 फीसदी बच्चों में मायोपिया के लक्षण मिल रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
कोरोना का अपरोक्ष रूप से भी असर बच्चों की आंखों पर पड़ रहा है। ऑनलाइन कक्षाएं चलने से उन्होंने मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल किया। इससे उनकी आंखों की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं। इसे मायोपिया कहते हैं। जिससे नजर कमजोर होने लगती है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में ढाई साल में मायोपिया के डेढ़ गुना मरीज बढ़े हैं। इसमें अधिकांश बच्चे हैं। निजी नेत्र चिकित्सकों के ओपीडी में 70 से 80 फीसदी बच्चों में मायोपिया के लक्षण मिल रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में नेत्ररोग विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल कहते हैं, पिछले साल की तुलना में मायोपिया के मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ गई है।
इस बीमारी से तनाव और अनिद्रा की समस्या हो जाती है। आंखों में दर्द होने लगता है। इस बीमारी में आंखों में खिंचाव महसूस होता है। आंखें लाल हो जाती हैं। आंखों पर भारीपन और थकान महसूस होता है। कभी-कभी आंखों से धुंधला भी दिखाई देने लगता है। इसमें 80 फीसदी बच्चे हैं।
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डॉक्टर के सुझाव
नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. वाई सिंह ने बताया कि ऑनलाइन क्लास के कारण बच्चों ने मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल किया। वहीं बच्चे ऑनलाइन गेम भी खेल रहे हैं। लगातार मोबाइल के स्क्रीन पर नजरों के गड़ाने से बच्चों के आंखों की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं। उनकी आंखें सिकुड़ रही हैं। उनके दूर देखने की क्षमता कम हो रही है। इसे बीमारी को मायोपिया कहते हैं। ऐसे बच्चों को समय से पहले चश्मा लग जा रहा है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में ढाई साल में मायोपिया के डेढ़ गुना मरीज बढ़े हैं। इसमें अधिकांश बच्चे हैं। निजी नेत्र चिकित्सकों के ओपीडी में 70 से 80 फीसदी बच्चों में मायोपिया के लक्षण मिल रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में नेत्ररोग विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल कहते हैं, पिछले साल की तुलना में मायोपिया के मरीजों की संख्या 30 फीसदी तक बढ़ गई है।
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इस बीमारी से तनाव और अनिद्रा की समस्या हो जाती है। आंखों में दर्द होने लगता है। इस बीमारी में आंखों में खिंचाव महसूस होता है। आंखें लाल हो जाती हैं। आंखों पर भारीपन और थकान महसूस होता है। कभी-कभी आंखों से धुंधला भी दिखाई देने लगता है। इसमें 80 फीसदी बच्चे हैं।
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डॉक्टर के सुझाव
- कंप्यूटर, मोबाइल, टैबलेट के स्क्रीन 20 से 25 इंच की दूरी पर और आंख से 4-5 इंच नीचे रखें।
- स्क्रीन ब्राइटनेस कम रखें।
- 20-20-20 रूल फॉलो करें : कंप्यूटर इस्तेमाल के समय प्रत्येक 20 मिनट बाद 20 फीट दूर 20 सेकंड देखें।
- पलक झपकाना कम ना करें।
- स्क्रीन टाइम कम रखें।
- एंटी ग्लेयर चश्मे का इस्तेमाल करें।
- फांट साइज बड़ा रखें।
नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. वाई सिंह ने बताया कि ऑनलाइन क्लास के कारण बच्चों ने मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल किया। वहीं बच्चे ऑनलाइन गेम भी खेल रहे हैं। लगातार मोबाइल के स्क्रीन पर नजरों के गड़ाने से बच्चों के आंखों की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं। उनकी आंखें सिकुड़ रही हैं। उनके दूर देखने की क्षमता कम हो रही है। इसे बीमारी को मायोपिया कहते हैं। ऐसे बच्चों को समय से पहले चश्मा लग जा रहा है।