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विश्व सीओपीडी दिवस: 45 हजार सीओपीडी मरीजों के लिए सर्दी खतरनाक, लापरवाही पर जा सकती है मरीजों की जान
Wed, 17 Nov 2021 03:31 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 17 Nov 2021 03:31 PM IST
सार
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि जिले में अब तक 58 हजार से अधिक लोग कोरोना संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। ऐसे मरीजों को इस मौसम में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि वायरस ने पहले ही इनके फेफड़ों को कमजोर कर दिया है।
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डॉ. अश्वनी मिश्रा।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
कोरोना वायरस के बीच सर्दियों का मौसम क्रोनिकल ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के रोगियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। मौजूदा सीजन में इस बीमारी के रोगियों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। प्रतिरोधक क्षमता और फेफड़े कमजोर होने के कारण यदि कोरोना हो जाता है तो जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे लोगों को डॉक्टर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार, जिले में क्रोनिकल ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के मरीजों की संख्या 40 से 45 हजार है। डॉक्टर मरीजों को ठंड से बचने की सलाह दे रहे हैं। जरा सी लापरवाही होने पर सांस की नली में सिकुड़न हो सकती है जिससे जान भी जा सकती है।
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डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि जिले में अब तक 58 हजार से अधिक लोग कोरोना संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। ऐसे मरीजों को इस मौसम में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि वायरस ने पहले ही इनके फेफड़ों को कमजोर कर दिया है। 50 प्रतिशत कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के फेफड़ों में सिकुड़न है। इसे प्लमनोरी फाइब्रोसिस कहते हैं। इस संबंध में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को मरीजों को जागरूक भी किया गया। चेस्ट की ओपीडी में आने वाले मरीजों को पंफ्लेट भी बांटे गए।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि सांस लेते समय आवाज आना, छाती में जकड़न या कोई काम करते समय सांस फूलने जैसे लक्षण दिखते हैं तो सीओपीडी है। सर्दियों में ऐसे मामले बढ़ते हैं और इसका असर मरीजों के फेफड़ों पर होता है। यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है। इस बीमारी को आसान भाषा में क्रॉनिक यानी लंबी बीमारी, ऑब्सट्रक्टिव यानी सांस की नली में सिकुड़न। पल्मोनरी डिसीज यानी फेफड़ों से जुड़ी बीमारी कहते हैं।