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Exclusive: रिफायनरी और नक्काशी के खतरे में पूरा बाजार, जान को जोखिम में डालकर तराशते हैं गहने

Thu, 13 Apr 2023 04:10 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 13 Apr 2023 04:10 PM IST
सार

अमर उजाला की टीम हिंदी बाजार पहुंची। सोने को तराश कर आभूषण बनाने वाले डीडी मार्केट में नजारा बेहद हैरान करने वाला था। सकरी गली में लाइन से दुकानें थीं। कारीगर दुकान के बाहर गैस सिलिंडर रखकर पाइप गन ( दिया) से आग की लपट निकालकर गले आभूषणों पर नक्काशी कर रहे थे। इनकी दुकान के पास फायर फाइटिंग सिस्टम का कोई भी यंत्र नहीं था।

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whole market in danger of refinery and carving in Gorakhpur
हिंदी बाजार के डीडी मार्केट में गैस सिलिंडर में गन लगाकर सोने को तराशते कारीगर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सराफा बाजार में सोना गलाने वाले सैकड़ों कारीगर, हजारों लोगों की जान संकट में डाल रहे हैं। हरबंशराम गली में रिफायनरी सेंटर के कारीगर तीन मंजिला भवन ( अंबे गहना मार्केट) में बेधड़क सोना गलाते हैं। सामने डीडी मार्केंट में इसी गले सोने पर सिलिंडर से नक्कशी कर सोने पर डिजाइन तैयार किया जाता है। ये पूरी प्रक्रिया सिलिंग, चिमनी और भट्टी के बीच होती है। लेकिन, इन जगहों पर सुरक्षा के मानकों का ख्याल नहीं रखा गया है। कहीं भी अग्नि नियंत्रण यंत्र और विभाग से एनओसी के सर्टिफिकेट नहीं नजर आते।

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ऐसी ही लापरवाही से टाउनहाल बाजार में मंगलवार को एक सिलिंडर में लगी आग से आसपास की कई दुकानें जल गईं थीं। बुधवार को अमर उजाला की टीम हिंदी बाजार पहुंची। सोने को तराश कर आभूषण बनाने वाले डीडी मार्केट में नजारा बेहद हैरान करने वाला था। सकरी गली में लाइन से दुकानें थीं। कारीगर दुकान के बाहर गैस सिलिंडर रखकर पाइप गन ( दिया) से आग की लपट निकालकर गले आभूषणों पर नक्काशी कर रहे थे। इनकी दुकान के पास फायर फाइटिंग सिस्टम का कोई भी यंत्र नहीं था।
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कारीगरों से पूछने पर पता चला कि यहां ऐसे ही काम चलता आ रहा है। श्रम विभाग में पंजीकरण है। लेकिन, अग्निशमन विभाग में पंजीकरण या यंत्र की जानकारी नहीं थी। सामने हरबंश राम गली में अंबे गहना बाजार है। यह एक तीन मंजिला शॉपिंग कॉंप्लेक्स है। इसमें टंच (गलाने वाले) की दुकानें हैं। बड़ी चिमनियों में ठोस तत्व गलाकर सोने को तैयार किया जाता है।

दुकान पर प्रतिदिन हजारों ग्राहक आते हैं और आसपास सराफा की कई दुकानें भी हैं। चिमनियां धधकती हैं, लेकिन पूरे कॉंप्लेक्स पर कहीं भी अग्निशामक यंत्र नहीं है। ऐसे में अगर यहां आग लगती है तो बड़ा नुकसान हो सकता है। सराफा मंडल को ही नहीं, अग्निशमन विभाग भी इस खतरे के प्रति बेपरवाह है।

सराफा मंडल के संरक्षक पीडी जैन ने कहा कि हिंदी बाजार की सकरी गलियों में सोना गलाने और गैस सिलिंडर पर आभूषण तराशने का काम होता है। इनके पास अग्निशामक यंत्र नहीं है, यह बेहद गंभीर मामला है। सख्ती के साथ इन्हें निर्देशित किया जाएगा कि अपना व्यापार करें, लेकिन दूसरों की जान जोखिम में न डालें। अगर अग्निशमन विभाग से संपर्क कर सुरक्षा मानकों का इंतजाम नहीं किया, तो कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

 

मुख्य अग्निशमन अधिकारी एके सिंह ने कहा कि सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर अगर व्यापार हो रहा है, तो ये गलत है। फिलहाल अभी जानकारी नहीं है। बाजार में जाकर भौतिक परीक्षण के बाद कुछ कहा जा सकेगा। अगर ऐसा है तो नियमानुसार कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाएगा।

सराफा मंडल के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारी भी बेफिक्र
सराफा मंडल के पदाधिकारियों की दुकानें, मंडल भवन भी हिंदी बाजार में ही है। नियमों को ताक पर रखते हुए कारीगर बाजार में दुकान खोलते गए। लेकिन, इन जिम्मेदारों की भी नजर नहीं पड़ी। वर्षों से सराफा मंडल की कार्यकारिणी गठित होती रही और बैठक तक सीमित रही। किसी जिम्मेदार ने इन दुकानों पर अग्निशमन सुरक्षा मानकों पर विचार नहीं किया। ऐसे में इस खतरे के लिए कारीगर और अन्य के साथ सराफा मंडल के पदाधिकारियों पर भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

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