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Gorakhpur News: तीन युवक लौटे तो अब भागे साथी की राह देख रहे संवासी
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गोरखपुर। जिंदगी की राह में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनका न अपना घर होता है और न कोई ऐसा अपना, जो दरवाजे पर खड़ा होकर उनका इंतजार करे। राजघाट का राजकीय मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र ऐसे ही लोगों के सहारे की जगह है। यहां रहने वाले संवासियों के बीच समय के साथ एक ऐसा रिश्ता बन जाता है, जिसमें साथ रहना ही अपनापन बन जाता है।
सोमवार रात चार संवासियों के भाग जाने के बाद अब तीन के लौट आने से राहत तो मिली है लेकिन आजम के नहीं मिलने की चिंता अभी बाकी है। वे उसकी राह देख रहे हैं।
रवि, बबलू, सोमारू और आजम लंबे समय से एक ही परिसर में रह रहे थे। एक-दूसरे के साथ उठना-बैठना और रोजमर्रा की जिंदगी साझा करना उनके लिए सामान्य बात थी। उनके जीवन में परिवार और घर की जगह आश्रय गृह ने ले रखी थी।
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ऐसे में चारों का एक साथ चले जाना केवल संस्था से चार लोगों के बाहर होने की घटना नहीं थी, बल्कि पीछे रह गए लोगों के लिए अचानक बने खालीपन जैसा भी था। तीन संवासियों के मिलने के बाद आश्रय गृह में राहत जरूर लौटी है। रवि, बबलू और सोमारू सुरक्षित हैं लेकिन आजम के बारे में जानकारी नहीं मिलने से चिंता बनी हुई है। इन संवासियों की जिंदगी सामान्य परिवारों से अलग जरूर है लेकिन भावनाएं किसी से कम नहीं। किसी साथी का अचानक सामने न होना, उसकी आवाज न सुनाई देना या उसके बारे में जानकारी न मिलना उनके बीच बेचैनी पैदा करता है। यही वजह है कि आजम की तलाश सिर्फ पुलिस की कार्रवाई नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी उम्मीद का सवाल है, जिनके साथ उसने यहां अपना समय बिताया है।
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सोमवार रात चार संवासियों के भाग जाने के बाद अब तीन के लौट आने से राहत तो मिली है लेकिन आजम के नहीं मिलने की चिंता अभी बाकी है। वे उसकी राह देख रहे हैं।
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रवि, बबलू, सोमारू और आजम लंबे समय से एक ही परिसर में रह रहे थे। एक-दूसरे के साथ उठना-बैठना और रोजमर्रा की जिंदगी साझा करना उनके लिए सामान्य बात थी। उनके जीवन में परिवार और घर की जगह आश्रय गृह ने ले रखी थी।
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ऐसे में चारों का एक साथ चले जाना केवल संस्था से चार लोगों के बाहर होने की घटना नहीं थी, बल्कि पीछे रह गए लोगों के लिए अचानक बने खालीपन जैसा भी था। तीन संवासियों के मिलने के बाद आश्रय गृह में राहत जरूर लौटी है। रवि, बबलू और सोमारू सुरक्षित हैं लेकिन आजम के बारे में जानकारी नहीं मिलने से चिंता बनी हुई है। इन संवासियों की जिंदगी सामान्य परिवारों से अलग जरूर है लेकिन भावनाएं किसी से कम नहीं। किसी साथी का अचानक सामने न होना, उसकी आवाज न सुनाई देना या उसके बारे में जानकारी न मिलना उनके बीच बेचैनी पैदा करता है। यही वजह है कि आजम की तलाश सिर्फ पुलिस की कार्रवाई नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी उम्मीद का सवाल है, जिनके साथ उसने यहां अपना समय बिताया है।