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Exclusive: पैरवीकार बनी पुलिस तो जेल में कैद हो गए बदमाश, हत्या, दुष्कर्म जैसे 60 मामलों में अदालत से अभियुक्तों को हुई सजा

Tue, 01 Feb 2022 12:13 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 01 Feb 2022 12:13 PM IST
सार

हत्या, दुष्कर्म जैसे 60 मामलों में अदालत से अभियुक्तों को हुई सजा, ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस कोर्ट में साक्ष्यों के साथ कर रही पैरवी

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When police became lobbyist miscreants imprisoned in jail
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

गोरखपुर में हत्या, लूट, दुष्कर्म, दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों की पुलिस ने ढंग से पैरवी की तो अभियुक्तों को सजा हुई। ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस लगातार बड़े मामलों में साक्ष्यों सहित चार्जशीट दाखिल करने के साथ ही कोर्ट में हर तारीख पर मौजूद रहकर ढंग से पैरवी कर रही है। इसका असर यह हुआ कि एक साल में 60 से अधिक मामलों में अभियुक्तों को सजा मिली और वह जेल में कैद हो गए।

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जानकारी के मुताबिक, पुलिस जब मामलों पर ध्यान नहीं देती है और वादी आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं तो इसका फायदा अभियुक्तों को मिल जाता है। पैरवी के अभाव में अभियुक्त बरी तक हो जाता है। इस तरह के मामले बढ़ने के बाद पुलिस ने ऑपरेशन शिकंजा चलाने का फैसला किया।
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पैरवी में पुलिस कमजोर न पड़े इसके लिए एसएसपी डॉ. विपिन ताडा खुद हर महीने बड़े मामलों की समीक्षा करते हैं। साथ ही सभी एसपी और सीओ को केस बांट दिए हैं, ताकि कमी मिलने पर उनसे सीधा सवाल जवाब हो सके।

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जमानत भी निरस्त करा रही पुलिस

जघन्य अपराध के अभियुक्तों के जमानतदार तक भी पुलिस पहुंच रही है। एसएसपी के आदेश पर इसकी एक महीने पहले शुरुआत की गई है। पुलिस ऐसा पहले भी करती थी, लेकिन तब निगरानी नहीं होती थी। अब पुलिस जमानतदार के पास पहुंचकर उन पर होने वाली कानूनी कार्रवाई के बारे में बता रही है।


पुलिस बता रही है कि जिस बदमाश की आपने जमानत ली है, वह अगर दोबारा पकड़ा गया तो आप भी शरणदाता, आपराधिक साजिश जैसे अपराध के आरोपित बन सकते हैं। इसका असर यह हुआ कि हाल के दिनों में कई हिस्ट्रशीटरों तक पुलिस जमानतदार की मदद से पहुंच सकी।

 

फैक्ट फाइल (इतने मामलों में हुई सजा)

  • हत्या : 21
  • दुष्कर्म : 7
  • पॉक्सो एक्ट : 10
  • अन्य : 22

केस एक

बांसगांव इलाके में 11 अक्तूबर 2014 को प्रदुम्न की गोली मारकर हत्या हुई थी। हत्याभियुक्त देवनाथपुर निवासी प्रियतोष यादव को 29 जनवरी को आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। लंबे समय से चल रहे मामले में तीन महीने पहले पुलिस ने पैरवी शुरू की थी।

केस दो

झंगहा इलाके में 26 नवंबर 2016 को चुनावी रंजिश में जयप्रकाश, ओमप्रकाश व राजेश पर जानलेवा हमला किया किया था। जयप्रकाश की मौत होने पर हत्या का केस दर्ज हुआ था। मामले में अभियुक्त विनय यादव, हेमंत यादव, राकेश यादव, सतीश यादव, पिंटू यादव, चंद्रदीप, राजू यादव, योगेंद्र, राजेश, शिवशंकर को दस जनवरी को आजीवन कारावास की सजा हुई।

केस तीन

गोला के भड़सडा में दहेज के लिए 27 मई 2017 को अमिता की मौत हुई। पुलिस ने दहेज हत्या का केस दर्ज कर पति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस केस की पैरवी कर रही थी। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर पति रामाराव को आठ दिसंबर को आजीवन कारावास और 11 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई।

केस चार

नाबालिग से दुष्कर्म के अभियुक्त जगलाल निषाद पर साल 2019 में चौरीचौरा पुलिस ने दुष्कर्म और पॉक्सो का केस दर्ज कर जेल भेजा था। इस मामले की ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस ने पैरवी शुरू की तो 4 दिसंबर 2021 को कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये की सजा सुना दी।

एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने कहा कि बदमाशों को जेल भेजने के साथ ही पुलिस कोर्ट में मुकदमों की पैरवी कर रही है। ऑपरेशन शिकंजा के तहत पुलिस की पैरवी की वजह से कई मामलों में अभियुक्तों को सजा मिली है। यह लगातार जारी रहेगा। इसकी निगरानी मैं खुद करता हूं।

 

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