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Gorakhpur News: मेटा से मिला अलर्ट तो आत्महत्या करने वाले 10 लोगों की बची जान
Fri, 12 Sep 2025 11:24 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 12 Sep 2025 11:24 PM IST
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संतकबीरनगर। सोशल मीडिया पर आत्महत्या का पोस्ट डालने का तेजी से प्रचलन बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर आत्महत्या का पोस्ट पड़ते ही मेटा तत्काल रिस्पांस दे रहा है। अवसाद में आत्महत्या के मामलों पर भी सोशल मीडिया का प्रभाव हावी हो रहा है। जिले में अब तक इस तरह की 10 घटनाएं इस साल सामने आई हैं। जिनमें मेटा से अलर्ट मिलने के बाद तत्काल पुलिस पहुंचकर लोगों की जान बचाई।
सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर आत्महत्या का बाकायदा इजहार करके लोग जान देने का फैसला कर रहे हैं। तकनीक की खूबी यह है कि ऐसी पोस्ट डालते ही मेटा संबंधित इलाके की पुलिस को तत्काल एलर्ट भेज रहा है। इससे लोगों की जान बच जा रही है। मेटा के एलर्ट पर संतकबीरनगर में अब तक इस साल पुलिस 10 लोगों की जान बचा चुकी है। सोशल मीडिया के फेसबुक, इंस्टाग्राम प्लेटफार्म पर लाइव सुसाइड के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
लोग सोशल मीडिया पर लाइव आकर फंदा लगा रहे हैं अथवा जहर खा रहे हैं। ऐसी कोई पोस्ट होने पर मेटा तुरंत पुलिस मुख्यालय को अलर्ट भेजता है। वहां मौजूद आपरेटर तत्काल संबंधित जिले को सूचना देता है। इसके बाद यूपी 112 या संबंधित थाना के जरिये पुलिस उस लोकेशन को तत्काल ट्रेस करके वहां पर पहुंच जाती है। इस तरह समय रहते संबंधित को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने का समय मिल जता है और उसकी जान बच जाती है।
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इन थाना क्षेत्र में पुलिस ने अलर्ट मिलने पर बचाई जान
धनघटा थाना क्षेत्र में 6 जनवरी, 13 जून व 7 सितंबर को मेटा से अलर्ट मिलने पर पुलिस ने तत्काल लोकेशन पर पहुंचकर पोस्ट करने वाले को बचाकर उनकी काउसिलिंग करने के बाद परिजनों को सौपा। इसी तरह 18 व 22 जनवरी एवं 24 मार्च को बखिरा, 4 अप्रैल को महुली, 9 अप्रैल व 10 जून को कोतवाली खलीलाबाद पुलिस को मेटा से अलर्ट मिला। जिसके बाद पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर पोस्ट डालने वाले को समझा-बुझाकर उनकी जान बचाया और उनकी काउंसलिंग के साथ ही दुबारा ऐसा न करने के लिए माफीनामा लिखवाया। कोट
परिवार में आपसी बातचीत न होने से लोगों के बीच में दूरियां बनती जा रही है। अवसाद के वजह से लोगों के भीतर सहनशीलता भी कम होता जा रहा है। वही असफलता भी जन सामान्य को भारी निराशा की तरफ ले जाती है। इसके वजह से लोग जान देने का फैसला करते हैं। परिजनों को चाहिए कि अपने बच्चों के हर गतिविधि पर बारीकी से निगरानी करें। उनको ज्यादातर समय दे। जिससे बच्चे आपस में घुलमिलकर रहें और अपनी समस्या के बारे में आसानी से बतायें।
-डॉक्टर विजय मिश्र, समाजशास्त्री
कोट
सोशल मीडिया पर आत्महत्या से संबंधित पोस्ट पर मेटा से मिलने वाला अलर्ट बहुत काम आ रहा है। पुलिस फौरन लोकेशन को ट्रेसकर लोगों की जान बचाती है। मेटा से इस साल 10 अलर्ट मिलने पर पुलिस ने तत्काल पहुंचकर लोगों की जान बचाया। पुलिस को ऐसे मामलों से संबंधित लोगों को काउंसलिंग करने का निर्देश दिया गया है।
-सुशील कुमार सिंह, एएसपी
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सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर आत्महत्या का बाकायदा इजहार करके लोग जान देने का फैसला कर रहे हैं। तकनीक की खूबी यह है कि ऐसी पोस्ट डालते ही मेटा संबंधित इलाके की पुलिस को तत्काल एलर्ट भेज रहा है। इससे लोगों की जान बच जा रही है। मेटा के एलर्ट पर संतकबीरनगर में अब तक इस साल पुलिस 10 लोगों की जान बचा चुकी है। सोशल मीडिया के फेसबुक, इंस्टाग्राम प्लेटफार्म पर लाइव सुसाइड के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
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लोग सोशल मीडिया पर लाइव आकर फंदा लगा रहे हैं अथवा जहर खा रहे हैं। ऐसी कोई पोस्ट होने पर मेटा तुरंत पुलिस मुख्यालय को अलर्ट भेजता है। वहां मौजूद आपरेटर तत्काल संबंधित जिले को सूचना देता है। इसके बाद यूपी 112 या संबंधित थाना के जरिये पुलिस उस लोकेशन को तत्काल ट्रेस करके वहां पर पहुंच जाती है। इस तरह समय रहते संबंधित को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने का समय मिल जता है और उसकी जान बच जाती है।
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इन थाना क्षेत्र में पुलिस ने अलर्ट मिलने पर बचाई जान
धनघटा थाना क्षेत्र में 6 जनवरी, 13 जून व 7 सितंबर को मेटा से अलर्ट मिलने पर पुलिस ने तत्काल लोकेशन पर पहुंचकर पोस्ट करने वाले को बचाकर उनकी काउसिलिंग करने के बाद परिजनों को सौपा। इसी तरह 18 व 22 जनवरी एवं 24 मार्च को बखिरा, 4 अप्रैल को महुली, 9 अप्रैल व 10 जून को कोतवाली खलीलाबाद पुलिस को मेटा से अलर्ट मिला। जिसके बाद पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर पोस्ट डालने वाले को समझा-बुझाकर उनकी जान बचाया और उनकी काउंसलिंग के साथ ही दुबारा ऐसा न करने के लिए माफीनामा लिखवाया। कोट
परिवार में आपसी बातचीत न होने से लोगों के बीच में दूरियां बनती जा रही है। अवसाद के वजह से लोगों के भीतर सहनशीलता भी कम होता जा रहा है। वही असफलता भी जन सामान्य को भारी निराशा की तरफ ले जाती है। इसके वजह से लोग जान देने का फैसला करते हैं। परिजनों को चाहिए कि अपने बच्चों के हर गतिविधि पर बारीकी से निगरानी करें। उनको ज्यादातर समय दे। जिससे बच्चे आपस में घुलमिलकर रहें और अपनी समस्या के बारे में आसानी से बतायें।
-डॉक्टर विजय मिश्र, समाजशास्त्री
कोट
सोशल मीडिया पर आत्महत्या से संबंधित पोस्ट पर मेटा से मिलने वाला अलर्ट बहुत काम आ रहा है। पुलिस फौरन लोकेशन को ट्रेसकर लोगों की जान बचाती है। मेटा से इस साल 10 अलर्ट मिलने पर पुलिस ने तत्काल पहुंचकर लोगों की जान बचाया। पुलिस को ऐसे मामलों से संबंधित लोगों को काउंसलिंग करने का निर्देश दिया गया है।
-सुशील कुमार सिंह, एएसपी