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गोरखपुर: कभी राजनीतिक संबंध तो कभी विवाद के चलते चर्चा में रहे प्रो. राजेंद्र, पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह से है पुराना नाता
Sat, 20 Nov 2021 12:48 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 20 Nov 2021 12:48 PM IST
सार
मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव के घर से मिली विदेशी करेंसी व नकदी गोरखपुर विश्वविद्यालय में चर्चा का विषय बन गया है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय कैंपस में केवल प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव के घर से मिली करेंसी ही छाई रही।
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प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में लंबे समय तक रक्षा अध्ययन विभाग के अध्यक्ष रहे प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव कभी अपने राजनीतिक संबंधों तो कभी विवाद के चलते चर्चा में रहे। मगध विश्वविद्यालय का कुलपति बनने के बाद भी उनका गोरखपुर से गहरा नाता बना हुआ है। कुलपति अब अपने आवास से मिली विदेशी करेंसी को लेकर चर्चा में हैं।
मूलत: संतकबीरनगर जिले के महुली थाना क्षेत्र के निवासी प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव अब गोरखपुर शहर के आजाद नगर इलाके में मकान बना लिया है। मगध विश्वविद्यालय में हुए घपलों के मामले में जांच का सामना कर रहे प्रो. राजेंद्र यादव पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते हैं।
गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों की मानें तो आश्चर्यजनक रूप से वर्ष 2013 में पीसी त्रिवेदी की जगह पर प्रो. राजेंद्र को कुलपति बना दिया गया था। वे फरवरी 2014 तक इस पद पर रहे। वे गोरखपुर विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी व चीफ प्राक्टर के अलावा तीन बार प्रभारी कुलपति के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं।
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कुलपति रहे प्रो. अरुण कुमार से विवाद के दौरान भी प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव का नाम काफी चर्चा में रहा। उस वक्त कुछ लोगों ने कुलपति प्रो. अरुण कुमार को धमकी भी दी थी। बाद में यह चर्चा उठी कि कुलपति को धमकाने वाले लोग भी प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव के शिष्य रहे हैं। हालांकि प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव ने इसका उस वक्त खंडन किया था।
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मूलत: संतकबीरनगर जिले के महुली थाना क्षेत्र के निवासी प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव अब गोरखपुर शहर के आजाद नगर इलाके में मकान बना लिया है। मगध विश्वविद्यालय में हुए घपलों के मामले में जांच का सामना कर रहे प्रो. राजेंद्र यादव पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते हैं।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों की मानें तो आश्चर्यजनक रूप से वर्ष 2013 में पीसी त्रिवेदी की जगह पर प्रो. राजेंद्र को कुलपति बना दिया गया था। वे फरवरी 2014 तक इस पद पर रहे। वे गोरखपुर विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी व चीफ प्राक्टर के अलावा तीन बार प्रभारी कुलपति के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं।
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कुलपति रहे प्रो. अरुण कुमार से विवाद के दौरान भी प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव का नाम काफी चर्चा में रहा। उस वक्त कुछ लोगों ने कुलपति प्रो. अरुण कुमार को धमकी भी दी थी। बाद में यह चर्चा उठी कि कुलपति को धमकाने वाले लोग भी प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव के शिष्य रहे हैं। हालांकि प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव ने इसका उस वक्त खंडन किया था।
शिक्षक के घर इतना धन बना चर्चा का विषय
मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव के घर से मिली विदेशी करेंसी व नकदी गोरखपुर विश्वविद्यालय में चर्चा का विषय बन गया है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय कैंपस में केवल प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव के घर से मिली करेंसी ही छाई रही। शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मियों का कहना था कि इनका प्रकरण कई महीने से चल रहा था। तीन महीने पहले एक बार अचानक इनकी गाड़ी भी चेक हुई थी लेकिन उस वक्त भाग्यशाली रहे कुलपति महोदय के घर से इस बार विदेशी करेंसी समेत इतना सब कुछ मिला, जितना कोई सामान्य शिक्षक सोच ही नहीं सकता।
कब क्या हुआ
मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव के घर से मिली विदेशी करेंसी व नकदी गोरखपुर विश्वविद्यालय में चर्चा का विषय बन गया है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय कैंपस में केवल प्रो. राजेंद्र प्रसाद यादव के घर से मिली करेंसी ही छाई रही। शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मियों का कहना था कि इनका प्रकरण कई महीने से चल रहा था। तीन महीने पहले एक बार अचानक इनकी गाड़ी भी चेक हुई थी लेकिन उस वक्त भाग्यशाली रहे कुलपति महोदय के घर से इस बार विदेशी करेंसी समेत इतना सब कुछ मिला, जितना कोई सामान्य शिक्षक सोच ही नहीं सकता।
कब क्या हुआ
- मगध विश्वविद्यालय के अभाविप के संयोजक सूरज सिंह ने फरवरी में राज्यपाल व मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र दिया था।
- जांच नहीं हुई तो मार्च में पटना हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल कर जांच की मांग की।
- पटना हाईकोर्ट ने राजभवन को कमेटर बनाकर जांच का निर्देश दिया।
- राजभवन ने दो सदस्यीय कमेटी बनाई। लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व वर्तमान में ललित नारायण मिश्र विश्वविद्यालय मिथिला, बिहार के कुलपति सुरेंद्र प्रताप सिंह व बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के कुलपति हनुमंत पांडेय की जांच सौंपी गई।
- जांच रिपोर्ट में वीसी राजेंद्र प्रसाद यादव को क्लीन चिट मिल गई। सुबूतों को नजर अंदाज कर दिया।
- इसके बाद फिर पटना हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की। इसके अलावा निगरानी ब्यूरो पटना में भी शिकायत दर्ज कराई।
- राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय को भी शिकायती पत्र भेजा गया।