भारतीय परंपरा में प्रेम को समर्पित यह पूरा महीना, प्यार नहीं बगावत के रूप में दर्ज है वैलेंटाइन डे
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वसंत पंचमी को मदनोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। कामदेव का ही दूसरा नाम है मदन। इस अवसर पर ब्रजभूमि में भगवान श्रीकृष्ण और राधा के रास उत्सव को मुख्य रूप से मनाया जाता है। औषध ग्रंथ चरक संहिता में उल्लेखित है कि इस दिन कामिनी और कानन में अपने आप यौवन फूट पड़ता है। हर्षवर्धन के बाद तक, अर्थात सातवीं-आठवीं शताब्दी तक वसंतोत्सव मनाए जाने के प्रमाण हैं।
वसंतोत्सव! वसंत के दिनों में एक महीने का उत्सव, जिसमें विवाह योग्य युवक-युवतियां अपनी इच्छा से अपना जीवनसाथी चुनती थीं और समाज उसे पूरी प्रतिष्ठा के साथ मान्यता देता था। कामशास्त्र में 'सुवसंतक' नामक उत्सव की चर्चा आती है। सुवसंतक वसंतावतार के दिन को कहते हैं। वसंतावतार अर्थात जिस दिन बसंत पृथ्वी पर अवतरित होता है। यह दिन वसंत पंचमी का ही है। 'मात्स्यसूक्त' और 'हरी भक्ति विलास' आदि ग्रंथों में इसी दिन को बसंत का प्रादुर्भाव दिवस माना गया है। इसी दिन मदन देवता की पहली पूजा का विधान है। कामदेव के पंचशर (शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध) प्रकृति संसार में अभिसार को आमंत्रित करते हैं। चैत्र कृष्ण पंचमी को वसंतोत्सव का अंतिम दिन रंग खेलकर रंग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।
प्यार नहीं बगावत के रूप में दर्ज है वैलेंटाइन डे
वेलेंटाइन डे, हर साल मनाया जाता है लेकिन क्या आपको पता है कि वेलेंटाइन डे मनाने की परंपरा कहां से आई? क्या यह हमेशा प्यार और अच्छी भावनाओं के बारे में था? ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन नामक पुस्तक में हमें संत वेलेंटाइन का जिक्र हमें मिलता है। इस किताब के अनुसार रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लॉडियस का शासन था और उनका मानना था कि विवाह करने से पुरुषों की शक्ति और बुद्धि कम होती है। उन्होंने आदेश जारी किया कि उनका कोई भी सैनिक और अधिकारी विवाह नहीं करेगा।
संत वेलेंटाइन ने इस क्रूर आदेश का विरोध किया। उन्हीं के आह्वान पर अनेक सैनिकों और अधिकारियों ने विवाह किए। बिशप वेलेंटाइन ने भी क्लॉडियस की इच्छा के खिलाफ जाकर गुप्त शादी कर ली। इसके लिए, वेलेंटाइन को जेल भेज दिया गया, जेल में रहते हुए उन्होंने जेलर की नेत्रहीन बेटी 'जैकोबस' को नेत्रदान किया व जेकोबस को एक पत्र लिखा, जिसमें अंत में उन्होंने लिखा था 'तुम्हारा वेलेंटाइन'।
आखिर क्लॉडियस ने 14 फरवरी के दिन ही, संत वेलेंटाइन को फांसी पर चढ़वा दिया और तभी से उनकी याद में इस दिन को निःस्वार्थ प्रेम का संदेश फैलाने लिए मनाया जाता है।