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सेंट एंड्रयूज कॉलेज : कार्यवाहक प्राचार्य विवाद गरमाया, दोनों पक्षों ने दी तहरीर
Mon, 20 Jul 2026 01:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 20 Jul 2026 01:58 AM IST
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गोरखपुर। सेंट एंड्रयूज कॉलेज में कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों पक्ष कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. एसडी राजकुमार और प्रो. रैना निवेदिता सैमुएल ने मामले में कैंट थाने में तहरीर दी। इससे मामला और गरमा गया। प्रो राजकुमार ने नियुक्ति प्रक्रिया को प्रबंध समिति के बायलॉज के विपरीत बता रहा जबकि प्रो. रैना अपनी नियुक्ति को वैध बता रही हैं। विवाद से सोमवार को कॉलेज खुलने पर हंगामे के आसार दिख रहे हैं।
वर्तमान कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. एसडी राजकुमार का आरोप है कि प्रबंध समिति की विशेष या सामान्य बैठक बुलाए बिना व निर्धारित नोटिस अवधि का पालन किए बिना प्रो. रैना को कार्यवाहक प्राचार्य बनाने का प्रयास किया गया। उन्होंने बताया कि 17 जुलाई की रात ईमेल से पद परिवर्तन की सूचना मिली। इसकी सत्यता जानने के लिए वह प्रयागराज गए। इसी दौरान कॉलेज परिसर में कुछ लोगों के घुसने और ताला तोड़ने की सूचना पर उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम डॉयल 112 पर शिकायत दर्ज कराई।
उनका दावा है कि जिस पत्र के आधार पर नई नियुक्ति की गई, उस पर हस्ताक्षर करने वाले दो सदस्यों ने बाद में अपने हस्ताक्षर वापस ले लिए। साथ ही विश्वविद्यालय ने उच्च न्यायालय में लंबित रिट याचिका के अंतिम निर्णय तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
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दूसरी ओर, प्रो. रैन ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि यह निर्णय प्रबंध समिति की बैठक से नहीं बल्कि चर्च के सर्कुलर एक्शन रेगुलेशन के तहत लिया गया। इसमें सभी 17 संबंधित सदस्यों को समय से सूचना दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में हस्ताक्षर वापस लेने वाले सदस्यों पर दबाव और प्रलोभन डाला गया। उनका दावा है कि 18 जुलाई को उन्हें विधिवत कार्यभार ग्रहण कराया गया और प्रबंध समिति के अधिकांश सदस्य उनके समर्थन में हैं।
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वर्तमान कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. एसडी राजकुमार का आरोप है कि प्रबंध समिति की विशेष या सामान्य बैठक बुलाए बिना व निर्धारित नोटिस अवधि का पालन किए बिना प्रो. रैना को कार्यवाहक प्राचार्य बनाने का प्रयास किया गया। उन्होंने बताया कि 17 जुलाई की रात ईमेल से पद परिवर्तन की सूचना मिली। इसकी सत्यता जानने के लिए वह प्रयागराज गए। इसी दौरान कॉलेज परिसर में कुछ लोगों के घुसने और ताला तोड़ने की सूचना पर उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम डॉयल 112 पर शिकायत दर्ज कराई।
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उनका दावा है कि जिस पत्र के आधार पर नई नियुक्ति की गई, उस पर हस्ताक्षर करने वाले दो सदस्यों ने बाद में अपने हस्ताक्षर वापस ले लिए। साथ ही विश्वविद्यालय ने उच्च न्यायालय में लंबित रिट याचिका के अंतिम निर्णय तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
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दूसरी ओर, प्रो. रैन ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि यह निर्णय प्रबंध समिति की बैठक से नहीं बल्कि चर्च के सर्कुलर एक्शन रेगुलेशन के तहत लिया गया। इसमें सभी 17 संबंधित सदस्यों को समय से सूचना दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में हस्ताक्षर वापस लेने वाले सदस्यों पर दबाव और प्रलोभन डाला गया। उनका दावा है कि 18 जुलाई को उन्हें विधिवत कार्यभार ग्रहण कराया गया और प्रबंध समिति के अधिकांश सदस्य उनके समर्थन में हैं।