फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Uproar in DDU FIR on protest against break of ties suppressed voice of contractors now came out

गोरखपुर विश्वविद्यालय में बवाल: नाता तोड़ने के विरोध पर एफआईआर ठेकेदारों की दबाई आवाज अब आई बाहर

Mon, 24 Jul 2023 01:12 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 24 Jul 2023 01:12 PM IST
सार

विश्वविद्यालय में सफाई, रंगाई, कैंटीन जैसे कई ऐसे काम हैं, जो ठेका से ही होते हैं। इसे पाने के लिए ठेकेदार किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाते हैं। उनका एक ही मकसद होता है कि जैसे भी करके ठेका को हासिल किया जाए, लेकिन पिछले छह महीने से अचानक कुछ ऐसा हुआ कि लंबे समय से काम कर रहे ठेकेदार बाहर कर दिए गए।

विज्ञापन
Uproar in DDU FIR on protest against break of ties suppressed voice of contractors now came out
DDU gorakhpur - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर विश्वविद्यालय में हुए एवीबीपी कार्यकर्ताओं के बवाल के पीछे कई चिंगारियां हैं। एक वजह पुराने ठेकेदारों की आवाज दबाना भी बताई जा रही है। पुरानों से नाता तोड़कर विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए ठेकेदारों को इंट्री दी थी। इसके पीछे का खेल ठेकेदार समझ तो गए थे, लेकिन एफआईआर की घुड़की से उनकी आवाज को दबा दिया गया।

विज्ञापन


एक ठेकेदार ने 65 लाख के बकाए को लेकर कुलपति तक से फोन पर बातचीत की थी, मगर नियंता रहे प्रो. गोपाल ने उसके खिलाफ केस दर्ज कराया। बाद में प्रो. गोपाल ने खुद बड़े खेल की ओर संकेत देते हुए पद से इस्तीफा भी दे दिया। इसकी शिकायत राजभवन तक पहुंची, जांच भी हुई, लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंच पाई।
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: गोरखपुर विश्वविद्यालय: आउटसोर्सकर्मियों के पीएफ अंशदान में घपला, 600 से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित

विज्ञापन
विज्ञापन

दरअसल, विश्वविद्यालय में सफाई, रंगाई, कैंटीन जैसे कई ऐसे काम हैं, जो ठेका से ही होते हैं। इसे पाने के लिए ठेकेदार किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाते हैं। उनका एक ही मकसद होता है कि जैसे भी करके ठेका को हासिल किया जाए, लेकिन पिछले छह महीने से अचानक कुछ ऐसा हुआ कि लंबे समय से काम कर रहे ठेकेदार बाहर कर दिए गए। लंबा बकाया हुआ तो उन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। भुगतान के लिए आवाज उठाया तो केस दर्ज कराया गया। कुछ यही हाल आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को देने वाले ठेकेदारों की भी है।

वह भी अपने भुगतान को लेकर लंबे समय से परेशान हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने कोई कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। विश्वविद्यालय के प्रो. कमलेश गुप्ता लंबे समय से सवाल उठाते हैं। उन्हें भी निलंबित कर दिया गया, बाद में बहाल किया गया। ऐसा कई बार हुआ। 20 अप्रैल को ठेकेदार श्रीप्रकाश शुक्ला पर जो केस दर्ज किया गया, उसमें आरोप है कि यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर राजेश सिंह को रात में फोन पर जान से मारने की धमकी दी गई।

इसे भी पढ़ें: देवरिया में हैवानियत: मासूम की गला दबाकर हत्या, शव को बोरे में भर कर नहर में फेंका
 

हालांकि, ठेकेदार श्रीप्रकाश शुक्ला ने बताया कि यूनिवर्सिटी में सफाई कार्य के करीब 65 लाख रुपये बकाया है। कर्मचारियों को रुपये देने के लिए वह बुधवार को यूनिवर्सिटी गए थे, जहां उन्हें बंधक बनाया गया। उन्होंने इसकी जानकारी शाहपुर पुलिस को दी। उनकी फोन पर कुलपति से बात भी नहीं हुई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed