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UP Panchayat Election 2021: वार्डों का मनमाफिक परिसीमन कराने की जुगाड़ लगा रहे नेता, जानिए किस वजह से उलझा है मामला
Mon, 15 Feb 2021 05:04 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 15 Feb 2021 05:04 PM IST
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यूपी पंचायत चुनाव 2021 गाइडलाइन्स: प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के संबंध में ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत के वार्डों के परिसीमन तक में सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता वार्डों के मनमाफिक परिसीमन के लिए जुगाड़ लगाने में व्यस्त हैं।
वहीं, जिला पंचायत के वार्डों का परिसीमन शासन की गाइड लाइन में उलझ गया है। साल 2015 की गाइड लाइन के अनुसार 50 प्रतिशत गांवों के बदलने के बाद वार्ड बदला जाना था। अब 2020 की गाइड लाइन में कहा गया है कि यदि एक गांव भी किसी वार्ड से दूसरे वार्ड में गया तो उस वार्ड को बदला माना जाएगा।
साल 2015 के जिला पंचायत चुनाव के दौरान जनपद में 73 वार्ड थे। महानगर और नगर पंचायतों के विस्तार के कारण कई ग्रामसभाएं नगरीय क्षेत्र में शामिल हो गईं। इस कारण कई ग्राम सभाओं का अस्तित्व समाप्त हो गया। इस कारण जिला पंचायत वार्डों की संख्या 73 से घटकर 68 हो गई है। कहा जा रहा है कि परिसीमन के लिए जो गाइड लाइन आई है उसके अनुसार जो वार्ड कभी अनुसूचित के लिए आरक्षित नहीं थे उन्हें पहले आरक्षित किया जाएगा।
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वहीं, जिला पंचायत के दावेदार सवाल उठा रहे हैं कि यह कैसे तय होगा कि कौन सा वार्ड कभी आरक्षित नहीं रहा, जब वार्डों की संख्या बदलती रही है। इस संबंध में डीपीआरओ का कहना है कि इसके लिए अभी दो दिन और इंतजार करना होगा। 16 को लखनऊ में ट्रेनिंग होनी है। इसी दौरान तय होगा कि किस तरह से वार्डों का परिसीमन किया जाए। फिलहाल जिनके जिम्मे परिसीमन की जिम्मेदारी है उन पर दबाव पड़ रहा है कि उनका वार्ड उनके मुताबिक कर दिया जाए।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि साल 2015 की गाइड लाइन के हिसाब से 50 प्रतिशत गांव जिस वार्ड से हटे हैं उस वार्ड को नया वार्ड माना जाएगा। जबकि 2020 की जो गाइड लाइन है उसके अनुसार एक भी गांव बदला है तो उस वार्ड को नया वार्ड माना जाएगा। अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रेनिंग में जो निर्देश होगा उसी हिसाब से वार्डों का परिसीमन होगा।
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वहीं, जिला पंचायत के वार्डों का परिसीमन शासन की गाइड लाइन में उलझ गया है। साल 2015 की गाइड लाइन के अनुसार 50 प्रतिशत गांवों के बदलने के बाद वार्ड बदला जाना था। अब 2020 की गाइड लाइन में कहा गया है कि यदि एक गांव भी किसी वार्ड से दूसरे वार्ड में गया तो उस वार्ड को बदला माना जाएगा।
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साल 2015 के जिला पंचायत चुनाव के दौरान जनपद में 73 वार्ड थे। महानगर और नगर पंचायतों के विस्तार के कारण कई ग्रामसभाएं नगरीय क्षेत्र में शामिल हो गईं। इस कारण कई ग्राम सभाओं का अस्तित्व समाप्त हो गया। इस कारण जिला पंचायत वार्डों की संख्या 73 से घटकर 68 हो गई है। कहा जा रहा है कि परिसीमन के लिए जो गाइड लाइन आई है उसके अनुसार जो वार्ड कभी अनुसूचित के लिए आरक्षित नहीं थे उन्हें पहले आरक्षित किया जाएगा।
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वहीं, जिला पंचायत के दावेदार सवाल उठा रहे हैं कि यह कैसे तय होगा कि कौन सा वार्ड कभी आरक्षित नहीं रहा, जब वार्डों की संख्या बदलती रही है। इस संबंध में डीपीआरओ का कहना है कि इसके लिए अभी दो दिन और इंतजार करना होगा। 16 को लखनऊ में ट्रेनिंग होनी है। इसी दौरान तय होगा कि किस तरह से वार्डों का परिसीमन किया जाए। फिलहाल जिनके जिम्मे परिसीमन की जिम्मेदारी है उन पर दबाव पड़ रहा है कि उनका वार्ड उनके मुताबिक कर दिया जाए।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि साल 2015 की गाइड लाइन के हिसाब से 50 प्रतिशत गांव जिस वार्ड से हटे हैं उस वार्ड को नया वार्ड माना जाएगा। जबकि 2020 की जो गाइड लाइन है उसके अनुसार एक भी गांव बदला है तो उस वार्ड को नया वार्ड माना जाएगा। अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रेनिंग में जो निर्देश होगा उसी हिसाब से वार्डों का परिसीमन होगा।