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यूपी पंचायत चुनाव 2021: हाईकोर्ट के फैसले से धुरंधरों को लगा झटका, नई आरक्षण लिस्ट बनेगी तो बदल जाएंगे चुनावी समीकरण
Mon, 15 Mar 2021 05:25 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 15 Mar 2021 05:25 PM IST
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पंचायत चुनाव।
- फोटो : amar ujala
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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में सीटों पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले से कई धुरंधरों को झटका लग गया है। एक तरफ जहां आरक्षण सूची जारी होते ही लोग मैदान में उतर गए थे, वहीं हाईकोर्ट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए सीटों के आवंटन पर आरक्षण लागू किया जाए और साथ इस प्रक्रिया को 25 मार्च तक पूरा कर लिया जाए।
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इसके पूर्व, राज्य सरकार ने स्वयं कहा कि वह वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए आरक्षण व्यवस्था लागू करने के लिए तैयार है। इस पर न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी व न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने 25 मई तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराने के आदेश पारित किए हैं। बता दें कि हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में 11 फरवरी 2021 के शासनादेश को चुनौती दी गई थी।
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कही खुशी कही गम...
यूपी पंचायत चुनाव 2021 में नाटकीय मोड़ आ गया है। पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची जारी होते ही उम्मीदवार अपना बैनर पोस्टर छपवाकर गांव-गांव घूमना शुरू कर चुके हैं। ऐसे में मौजूदा आरक्षण व्यवस्था पर हाईकोर्ट की रोक के बाद उन्हें तगड़ा झटका लगा है। वहीं उन उम्मीदवारों को इससे बड़ी राहत मिल गई है, जिन्हें मौजूदा आरक्षण सूची जारी होते ही निराशा हाथ लगी थी।
गौरतलब है कि यूपी में इस बार सरकार ने नई आरक्षण व्यवस्था लागू की थी। इस व्यवस्था से अनंतिम आरक्षण सूची जारी होने के बाद कई दावेदार मैदान से बाहर हो गए थे। उन्होंने सूची पर आपत्तियां की थीं। उनकी आपत्तियों का निस्तारण करते हुए जिला प्रशासन को अब फाइनल लिस्ट जारी करनी थी। ऐसे में हाईकोर्ट के इस आदेश ने पंचायत चुनाव को नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है।
गौरतलब है कि यूपी में इस बार सरकार ने नई आरक्षण व्यवस्था लागू की थी। इस व्यवस्था से अनंतिम आरक्षण सूची जारी होने के बाद कई दावेदार मैदान से बाहर हो गए थे। उन्होंने सूची पर आपत्तियां की थीं। उनकी आपत्तियों का निस्तारण करते हुए जिला प्रशासन को अब फाइनल लिस्ट जारी करनी थी। ऐसे में हाईकोर्ट के इस आदेश ने पंचायत चुनाव को नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है।