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गोरखपुर: 50 लाख रुपये के वित्तीय हेरफेर में डाक विभाग के दो कर्मचारी निलंबित
Tue, 15 Mar 2022 11:12 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 15 Mar 2022 11:12 AM IST
सार
जिन डाक कर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है, उन्होंने डाक विभाग के खाते में 40 लाख रुपये जमा भी करवा दिया।
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डाक विभाग में हेरफेर करने पर दो कर्मचारी सस्पेंड।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रधान डाकघर व विश्वविद्यालय डाकघर में वर्षों से बंद पड़े खातों को सक्रिय कर 50 लाख रुपये हेरफेर करने का मामला सामने आया है। प्रवर डाक अधीक्षक ने वित्तीय अनियमितता के आरोप में सिस्टम मैनेजर शैलेश सिंह व विश्वविद्यालय डाकघर के लिपिक गितेश पांडेय को निलंबित कर दिया है। हालांकि, मामला पुराना है और आरोपियों ने विभाग के यूसीआर खाते में 40 लाख रुपये जमा कर दिए। इसी बीच शुक्रवार को ही उनके निलंबन की कार्रवाई भी कर दी गई।
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दरअसल, छह माह पहले कूड़ाघाट डाकघर में सैकड़ों खातों से 10 लाख रुपये निकालने का मामला सामने आया था। वित्तीय अनियमितता के आरोप में डाक प्रवर डाक (एसएसपी) अधीक्षक मनीष कुमार ने लिपिक शैलेश कुमार सिंह को निलंबित कर जांच बैठा दी। एसएसपी की जांच टीम की पड़ताल के दौरान शहर के आधा दर्जन डाकघरों में इस तरह का तकनीकी घालमेल सामने आया।
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प्रवर डाक अधीक्षक कार्यालय के मुताबिक कूड़ाघाट डाकघर के तकनीकी घालमेल की जांच के दौरान अन्य डाकघरों के मामले सामने आए हैं। शुरुआती जांच में प्रधान डाकघर के सिस्टम मैनेजर की मिलीभगत से बंद पड़े खातों को सक्रिय कर करीब 50 लाख रुपये निकालने का दो डाकघरों में मामला सामने आया है।
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इसमें से करीब 40 लाख शुक्रवार को आरोपियों ने विभाग के यूसीआर खाते में जमा भी कर दिया। सिस्टम मैनेजर व लिपिक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। मामलों की जांच दो सदस्यी टीम कर रही है।
एसएसपी मनीष कुमार ने बताया कि सरकारी रकम के हेरफेर के मामले में प्रधान डाक घर के सिस्टम मैनेजर व विश्वविद्यालय डाकघर के लिपिक को उच्चाधिकारियों के निर्देश पर निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच दो सदस्यी टीम कर रही है।
हालांकि, जिन कर्मचारियों पर आरोप लगा है कि उन्होंने शुक्रवार को विभाग के यूसीआर खाते में 40 लाख रुपये जमा करवा दिया है। इस मामले में दोनों कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन मोबाइल नंबर बंद मिला। उनका पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।