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एक्सप्रेस-वे हादसा: गोरखपुर के नौसड़ स्थित ट्रैवेल एजेंट का ऑफिस बंद, प्रियांशी के घर भी लगा ताला
Wed, 24 Apr 2024 12:43 PM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Wed, 24 Apr 2024 12:43 PM IST
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एसी बस की दुर्घटना के बाद ट्रैवल एजेंट ने बंद किया ऑफिस।
- फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर से दिल्ली जा रही प्राइवेट एसी बस मंगलवार भोर में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर ट्रक से लड़ गई। जिसमें पादरी बाजार की प्रियांशी उर्फ अदिति श्रीवास्तव की मौत हो गई। इस घटना के बाद प्रियांशी के परिजन घर में ताला बंद कर घटनास्थल पर रवाना हो गए। वहीं नौसड़ पेट्रोल पंप पर स्थित ट्रैवेल एजेंट का ऑफिस भी हादसे के बाद बंद हो गया।
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पादरी बाजार के हनुमंतत नगर निवासी हेमंत कुमार श्रीवास्तव बेटी प्रियांशी सोमवार को प्राइवेट बस से दिल्ली के लिए निकली थी। मंगलवार सुबह उनके पास बस हादसे की खबर आई। वह परिवार के साथ घटनास्थल पर रवाना हो गए। घटना की जानकारी होने पर उनके घर कई लोग पहुंचे, लेकिन वहां कोई नहीं मिला।
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पेट्रोल पंप पर ट्रेवेल एजेंट का ऑफिस?
नौसड़ से थोड़ा आगे जाने पर एक पेट्रोल पंप पर केएन नेहरा का ऑफिस है। इसी नाम से दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद, हरिद्वार, पुणे, पंजाब, देहरादून, सूरत, लुधियाना समेत अन्य शहरों के लिए एसी बसें चलती हैं। मंगलवार को ऑफिस बंद था। फोन पर एजेंट ने बताया कि लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे बस ट्रक से लड़ गई है।
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बस में सवार घायल और मृतकों के घरवालों को इसकी सूचना दे दी गई है। ऑफिस बंद होने के बाद भी दोपहर के समय केएन नेहरा कंपनी की एक बस पेट्रोल पंप पर यात्रियों को बैठाकर दिल्ली रवाना होने की तैयारी में थी।
ट्रेवल एजेंट फरार, इसी कंपनी की बस से हुआ था हादसा।
- फोटो : अमर उजाला
कौन चलवा रहा प्राइवेट बस अड्डा
नौसड़ के पास एक वर्ष पहले एक दर्जन के लगभग ट्रैवेल एजेंट का ऑफिस था, जहां से दिल्ली और अन्य शहरों के लिए एसी बसें चलाई जा रही थीं। एक साल के अंदर ही अब यहां पचास से अधिक ट्रेवेल ऐजेंटों के ऑफिस खुल गए हैं। अधिकतर ऑफिस पेट्रोल पंप पर खोले गए हैं।
जहां से एसी बसें संचालित की जा रही हैं। इन बसों के रख-रखाव और चालकों की जांच के लिए कोई नियम नहीं है। साथ ही यह बस अड्डा किसकी पनाह में चल रहा है, यह भी सवाल उठ रहा है। इससे पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अफसर सबक नहीं ले रहे हैं।
नौसड़ के पास एक वर्ष पहले एक दर्जन के लगभग ट्रैवेल एजेंट का ऑफिस था, जहां से दिल्ली और अन्य शहरों के लिए एसी बसें चलाई जा रही थीं। एक साल के अंदर ही अब यहां पचास से अधिक ट्रेवेल ऐजेंटों के ऑफिस खुल गए हैं। अधिकतर ऑफिस पेट्रोल पंप पर खोले गए हैं।
जहां से एसी बसें संचालित की जा रही हैं। इन बसों के रख-रखाव और चालकों की जांच के लिए कोई नियम नहीं है। साथ ही यह बस अड्डा किसकी पनाह में चल रहा है, यह भी सवाल उठ रहा है। इससे पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अफसर सबक नहीं ले रहे हैं।