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Diwali 2023: वोकल फार लोकल को मिल रहा बढ़ावा, स्थानीय कारीगरों के एक ग्राम के आभूषणों की बढ़ी मांग
Thu, 09 Nov 2023 04:18 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 09 Nov 2023 04:18 PM IST
सार
परंपरा जेम्स एंड ज्वेलर्स निदेशक संजय अग्रवाल ने कहा कि लोकल फॉर वोकल की देन है कि इस समय एक ग्राम के भार में सोने की अंगूठी भी बाजार से खरीद सकते हैं। इस बार त्योहार में हल्के और भारी दिखने वाले आभूषणों की मांग बढ़ी है।
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देशी कारीगरों से तैयार करवाया गया सस्ता और भारी दिखने वाला आभूषण।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लोकल फॉर वोकल अभियान को शहर के सराफा कारोबारी बढ़ावा दे रहे हैं। वह स्थानीय कारीगरों से सस्ते और हल्के लेकिन भारी दिखने वाले आभूषणों को बनाकर बाजार में उतार रहे हैं। इसका फायदा है कि त्योहार में सभी वर्गों के लिए सोने और चांदी की खरीदारी संभव हो सकेगी।
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आभूषणों को दिवाली और धनतेरस पर खरीद-बिक्री के लिए और अपने स्थानीय महत्व को पहचान देने के लिए सराफा व्यापारियों ने लोकल फॉर वोकल का फैसला किया है। बाहर से मंगाने वाले आभूषणों में उसकी बनवाई पर 1500 से लेकर दो हजार रुपये का खर्च सिर्फ कारीगरी का लगता है।
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वहीं, स्थानीय कारीगर सिर्फ 500 से 700 रुपये की कारीगरी में स्थानीय पसंद के अनुसार आभूषण तैयार कर देते हैं। सराफा मंडल के संरक्षक पंकज गोयल ने बताया कि स्थानीय कारीगरी को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों ने भी इसे स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति के साथ-साथ विक्टोरिया सिक्के की उपलब्धता हमेशा रही है। अध्यक्ष गणेश वर्मा ने बताया कि इस बार सोने-चांदी के दाम कुछ महंगे हुए हैं। ऐसे में स्थानीय कारीगरी से आभूषणों के दाम, बाहर से आने वाले आभूषणों की तुलना में कम हो जाएंगे।
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पहले जो हार 20 से 22 ग्राम में, अब 10 से 12 ग्राम में
कुछ वर्ष पहले जो हार 20 से 22 ग्राम वजन में बनता था, अब 10 से 12 ग्राम में बन जा रहा है। एक ग्राम से लेकर 900 मिलीग्राम के भार में भी अंगूठी बाजार में उपलब्ध है।
घंटाघर में एक वेंडर के पास 55 कारीगर
घंटाघर में एक स्थानीय वेंडर ने स्थानीय हुनर को बढ़ावा देने के लिए अपने यहां 55 कारीगरों को रोजगार दिया। यहां प्रतिदिन सस्ते और टिकाऊ आभूषण तैयार किए जाते हैं। वह अपने यहां से आभूषण तैयार कर शहर के बड़े और प्रतिष्ठित व्यापारियों तक पहुंचाते हैं।
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परंपरा जेम्स एंड ज्वेलर्स निदेशक संजय अग्रवाल ने कहा कि लोकल फॉर वोकल की देन है कि इस समय एक ग्राम के भार में सोने की अंगूठी भी बाजार से खरीद सकते हैं। इस बार त्योहार में हल्के और भारी दिखने वाले आभूषणों की मांग बढ़ी है।
निदेशक परिवार ज्वेल्स एंड जेम्स मो. आजिब ने कहा कि ग्राहकों के पसंद का खास ख्याल रखते हुए हल्के और भारी दिखने वाले सभी वर्गों के आभूषणों की आकर्षक डिजाइन तैयार करवाई गई है।
घंटाघर में एक वेंडर के पास 55 कारीगर
घंटाघर में एक स्थानीय वेंडर ने स्थानीय हुनर को बढ़ावा देने के लिए अपने यहां 55 कारीगरों को रोजगार दिया। यहां प्रतिदिन सस्ते और टिकाऊ आभूषण तैयार किए जाते हैं। वह अपने यहां से आभूषण तैयार कर शहर के बड़े और प्रतिष्ठित व्यापारियों तक पहुंचाते हैं।
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परंपरा जेम्स एंड ज्वेलर्स निदेशक संजय अग्रवाल ने कहा कि लोकल फॉर वोकल की देन है कि इस समय एक ग्राम के भार में सोने की अंगूठी भी बाजार से खरीद सकते हैं। इस बार त्योहार में हल्के और भारी दिखने वाले आभूषणों की मांग बढ़ी है।
निदेशक परिवार ज्वेल्स एंड जेम्स मो. आजिब ने कहा कि ग्राहकों के पसंद का खास ख्याल रखते हुए हल्के और भारी दिखने वाले सभी वर्गों के आभूषणों की आकर्षक डिजाइन तैयार करवाई गई है।