बचाव ही जीवन है: बच्चों को टीबी से बचाने के लिए दी जाएगी टॉफी जैसी दवा, तीन महीने तक चलेगा अभियान
गोरखपुर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने बताया कि जल्द ही दवा का वितरण शुरू किया जाएगा। यह टीबी संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों को दी जाएगी।
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क्षय रोग (टीबी) से संक्रमित बच्चों को टीबी रोग से बचाने के लिए टॉफी जैसी दवा दी जाएगी। जल्द ही यह दवा सरकारी अस्पतालों से प्रिवेंशन ऑफ टीबी पेशेंट (पीटीपी) के जरिए मिलेगी। आइसोनियाजिड नाम की इस दवा की 100 एमजी की खुराक बच्चों को दी जाएगी। अब तक यह दवा टेबलेट के तौर पर उपलब्ध थी, जो कड़वी होती थी।
जानकारी के मुताबिक, आइसोनियाजिड नाम की दवा टॉफी के तौर पर आएगी। बच्चों के लिए यह चूसने वाला टेबलेट होगा। बच्चों के स्वाद को ध्यान में रखते हुए दवा तैयार की गई है, जो अलग-अलग स्वाद में उपलब्ध रहेगी।
गोरखपुर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने बताया कि जल्द ही दवा का वितरण शुरू किया जाएगा। यह टीबी संक्रमितों के संपर्क में आने वाले लोगों को दी जाएगी। बताया कि एक टीबी मरीज 15 अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। ऐसे में लक्षण दिखते ही टीबी मरीज की जांच होगी और तत्काल दवा दी जाएगी। टीबी की दवा बीच में छोड़ने वाले लोगों में जब ड्रग रेसिस्टेंट पैदा हो जाता है, तो इलाज काफी लंबा और महंगा हो जाता है।
तीन माह तक दी जाएगी दवा
गोरखपुर जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) के तहत, जिन घरों में टीबी के मरीज हैं, उनके परिवार के प्रत्येक सदस्य को तीन महीने तक निशुल्क दवा खिलाई जाएगी। इससे पूर्व जिन घरों में टीबी के मरीज निकलते थे, उन घरों में पांच साल से छोटे उम्र के बच्चों को ही यह दवा खिलाई जाती थी। लेकिन, तब यह दवा टॉफी के तौर पर नहीं आई थी।