गोरखपुर: तीन हजार से ज्यादा डीमैट खातों में नामिनी नहीं, दर्ज करा लें वरना फंस जाएगी रकम
गोरखपुर लीड बैंक मैनेजर मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि अब जो भी निवेश किए जा रहे हैं। उनमें नामिनी अनिवार्य कर दिया गया है। चार पांच साल पूर्व जिनके फोलियो बने हैं। उनमें ही तमाम लोगों ने नामिनी का जिक्र नहीं किया है। इस लिए इस प्रक्रिया को निवेशक निर्धारित समय सीमा में पूरा कराएं।
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लावारिस खातों जैसा हाल डीमैट खातों का भी है। डीमैट खातों और म्यूचुअल फंड में अगर निवेश किए हैं तो एक बार नामिनी जरूर चेक करा लें। जिले में करीब तीन हजार से ज्यादा डीमेट खाते ऐसे हैं, जिनमें नामिनी नहीं हैं। हैं भी तो नाम व पता में गलती है। कंपनियां अपने डीमेट खातों का ब्योरा तैयार कराने में जुटी हैं।
इससे जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि पांच साल पूर्व कोई बाध्यता नहीं थी। लेकिन अब इसे अनिवार्य कर दिया गया है। अगर नामिनी नहीं है तो खातों का संचालन बंद हो सकता है। रुपये जमा रहेंगे लेकिन बीच में जरूरत पड़ने पर निकासी कर सकेंगे। ऐसे में ग्राहकों को 30 सितंबर तक नामिनी देने के लिए एक मौका भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने दिया है।
गोरखपुर में 18 हजार से अधिक डीमैट खाते हैं, जबकि करीब चार हजार करोड़ रुपये का म्यूचुअल फंड में निवेश हुआ है। 30 सितंबर तक हर किसी ग्राहक के लिए डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड में नॉमिनी को जोड़ना है। सेबी ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो एक अक्तूबर 2023 से खातों को फ्रीज कर दिया जाएगा।
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यानि कि निवेशक के फोलियो पर रोक लग जाएगी, जिससे वे खाते का संचालन नहीं कर पाएंगे। इसलिए सभी को व्यक्तिगत डीमैट खाताधारक और म्यूचुअल फंड (एमएफ) के अपने उत्तराधिकारी (नॉमिनी) को नामित करेंगे। इसके लिए संबंधित कंपनियों की ओर से लोगों को लिंक और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजे जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी दुर्घटना के बाद निवेशकों के कानूनी उत्तराधिकारियों को प्रतिभूति को लौटाने में दिक्कत न हो, इसके लिए ये कदम उठाए गए हैं।
सलाहकार म्यूचुअल फंड राकेश कुमार मिश्रा ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)ने जो आदेश दिए हैं। उससे किसी की रकम नहीं डूबेगी। लेकिन खाता का संचालन नहीं हो सकेगा। निर्धारित समय के बाद ही रकम की वापसी हो सकेगी। नामिनी को नामित करने के बाद कोई दिक्कत नहीं रहेगी। हर निवेशक को इसे अपडेट कराना चाहिए। इसके लिए अपने सलाहकार सभी संपर्क कर सकते हैं।
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गोरखपुर लीड बैंक मैनेजर मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि अब जो भी निवेश किए जा रहे हैं। उनमें नामिनी अनिवार्य कर दिया गया है। चार पांच साल पूर्व जिनके फोलियो बने हैं। उनमें ही तमाम लोगों ने नामिनी का जिक्र नहीं किया है। इस लिए इस प्रक्रिया को निवेशक निर्धारित समय सीमा में पूरा कराएं।