गोरखपुर: सरैया चीनी मिल के 600 कर्मचारियों की पीएफ की छह करोड़ की रकम फंसी, जानिए क्या है वजह
यूनियन लीडर बनारसी सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय ने कर्मचारियों के ब्याज का निर्धारण नहीं किया है। अगर इस महीने ब्याज का निर्धारण नहीं हुआ तो अगले महीने हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना की याचिका दायर की जाएगी।
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सरैया चीनी मिल के करीब 600 कर्मचारियों के पीएफ के छह करोड़ रुपये फंस गए हैं। ये रकम चार वर्षों में ब्याज के हैं। हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप कर मामले का समाधान कराने का निर्देश दिया है। बावूजद इसके अभी तक कर्मचारियाें को पीएफ अंशदान का ब्याज नहीं मिल पाया है।
सरैया चीनी मिल, सरदारनगर में करीब 600 कर्मचारी कार्यरत थे। कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय में इनका साल 2008-2009 तक अंशदान नियमित जमा हुआ। फिर मिल की स्थिति खराब होने के बाद डिफॉल्टर हो गई। इसके बाद कर्मचारियों का अंशदान जमा नहीं किया गया।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद कंपनी ने कर्मचारियों के तीन साल का अंशदान जमा किया, लेकिन इस अंशदान को 2013 से 2016 का मानकर इस पर ब्याज लगाया गया। इससे कर्मचारियों का ब्याज कम हो गया। कर्मचारी अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय में 2013 से 2016 में जमा हुए अंशदान को 2009 से 2012 में करने की मांग कर रहे है।
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इस मांग को लेकर कर्मचारी यूनियन ने कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय को कई बार पत्र लिखा, लेकिन जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो यूनियन लीडर बनारसी सिंह हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने 13 दिसंबर 2021 को इस मामले के निस्तारण कराने का आदेश दिया।
निस्तारण नहीं होने पर बनारसी सिंह फिर से हाईकोर्ट गए। इसके बाद हाईकोर्ट ने विगत 24 मई को तीन महीने के भीतर इस मामले के निस्तारण के आदेश दिए, लेकिन चार महीने बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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यूनियन लीडर बनारसी सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कार्यालय ने कर्मचारियों के ब्याज का निर्धारण नहीं किया है। अगर इस महीने ब्याज का निर्धारण नहीं हुआ तो अगले महीने हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना की याचिका दायर की जाएगी।