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Gorakhpur News: कहने को तीन बेटे...वृद्धाश्रम में गुजरा आखिरी वक्त, सांसें थमने पर मां को आग भी नसीब नहीं

Mon, 24 Nov 2025 11:18 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Nov 2025 11:18 PM IST
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Three sons to say...spent the last days in an old age home, mother didn't even get a fire when she stopped breathing.
जौनपुर वृद्धाश्रम के संचालक रवि चौबे। संवाद
- बेटे की शादी का हवाला देकर दाह संस्कार से किया इन्कार, जौनपुर के वृद्धाश्रम से कैम्पियरगंज क्षेत्र में गांव लाया गया शव घर पर उतारा नहीं जा सका
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- बेटे की बेदिली पर फूट-फूटकर रोया बुजुर्ग बाप, मजबूरी में पत्नी को करना पड़ा दफन

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। कैंपियरगंज इलाके के रहने वाले भुआल और शोभा के तीन बेटे हुए। दंपती ने खून-पसीना बहाकर बेटों को पाल-पोसकर बड़ा किया। बेटे बड़े हुए तो मां-बाप बोझ बन गए और बेटों की बदसलूकी से आहत होकर मां-बाप ने घर छोड़ दिया और जौनपुर के वृद्धाश्रम में शरण ली। मां शोभा की मौत के बाद बेटे ने अपने बेटे की शादी का हवाला देते हुए दाह संस्कार से मना कर दिया। मां का शव जौनपुर से गांव तक लाए जाने के बाद दहलीज तक नहीं ले जाया जा सका और न ही मुखाग्नि नसीब हुई। रिश्तेदारों की मदद से शव करमैनीघाट पर दफना दिया गया।
कैंपियरगंज क्षेत्र के भरोहियां ग्राम पंचायत के रहने वाले किराना व्यापारी भुआल गुप्ता के तीन बेटे संजय, जग्गू, अज्जू और तीन बेटियां हैं। भुआल ने बताया कि एक साल पहले बड़े बेटे संजय की बदसलूकी से आहत होकर वह पत्नी शोभा के साथ घर से राजघाट के पास सुसाइड करने पहुंचे थे। वहां एक व्यक्ति ने समझाकर रोका और अयोध्या में रहने का ठिकाना मिलने की बात कही। बुजुर्ग दंपती को अयोध्या में भी ठिकाना नहीं मिला तो मथुरा पहुंचे, वहां जौनपुर के वृद्धाश्रम का माेबाइल नंबर मिला। फोन पर बात करके जौनपुर विकास समिति वृद्धाश्रम पहुंचे। वहां संचालक रवि कुमार चौबे ने उन्हें शरण दी।
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रवि ने बताया कि, भुआल और शोभा कभी-कभी अपने छोटे बेटे अज्जू से बातचीत करते थे। भुआल ने बताया था कि बड़ा बेटा संजय किराना की दुकान और मेडिकल स्टोर चलाता है, कैंपियरगंज में उसका आलीशान मकान भी है। वह कभी माता-पिता से बात नहीं करता था। इस बीच शोभा के पैर में लकवा मार गया। इलाज चल ही रहा था कि बीते 19 नवंबर को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। रवि ने जौनपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां 19 की ही रात में उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि शोभा के गुर्दे में भी इंफेक्शन हो गया था। रवि ने सूचना देने के लिए भुआल से उनके बेटों का फोन नंबर मांगा तो उन्होंने पहले तो इन्कार कर दिया। बाद में उम्मीद जताई कि घर जाने पर अंतिम संस्कार अच्छे से हो सकेगा और उन्होंने छोटे बेटे अज्जू का मोबाइल नंबर दिया।
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बेटा बोला - फ्रीजर में रखवा दो लाश, शादी के बाद करेंगे दाह संस्कार
रवि के मुताबिक उन्होंने अज्जू को फोन कर उसकी मां की मौत की सूचना दी तो उसने कहा कि बड़े भैया के बेटे की 23 नवंबर को शादी है। उनसे पूछकर बताता हूं। थोड़ी देर बात कॉल कर अज्जू ने रवि से कहा कि भैया ने कहा है कि लाश फ्रीजर में रखवा दीजिए शादी के बाद दाह संस्कार करा दिया जाएगा। कुछ देर बाद बेटियों ने फोन करके भुआल से मां का शव लेकर गांव आने के लिए कहा। रवि ने एंबुलेंस का इंतजाम कराया और भुआल पत्नी का शव लेकर गांव पहुंचे। आरोप है कि संजय ने यहां अपशगुन बताते हुए शव घर ले जाने से मना कर दिया। गांव के लोगों और और रिश्तेदारों ने भुआल को समझाकर करमैनीघाट पर शोभा का शव मिट्टी में दफन करा दिया।


हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार भी नहीं हो पाया
भुआल पत्नी को याद करके रो पड़ते हैं। कहते हैं कि, तीन बेटों को पाल-पोसकर बड़ा किया। तीन बेटों के होने के बाद भी पत्नी शोभा की मिट्टी घर की दहलीज तक नहीं ले जा सका और हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार भी नहीं कर सका। उसे मिट्टी में दफनाना पड़ा। अब पुरोहित से राय ली गई है। पुरोहित ने आटे का पुतला बनाकर विधि विधान से दाह संस्कार करने का सुझाव दिया है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। कुछ लोग शोभा देवी का आखिरी समय का वीडियो भी शेयर करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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पिता की बढ़ गई थी उधारी, नाराजगी पर छोड़ गए थे घर
भुआल के बड़े बेटे संजय का कहना है कि पिता ने बहुत लोगों से उधार रुपये ले रखे थे। इसे लेकर उसका पिता से विवाद हो गया था। इसके बाद वह मां को लेकर घर छोड़कर चले गए थे। उसने कहा कि बेटे की शादी के चलते मां का शव डीप फ्रीजर में रखने की बात कही थी।
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