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Gorakhpur News: सीवर परियोजना की राह में रोड़ा बने मैत्रीपुरम के तीन मकान ध्वस्त
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अमृत 2.0 के तहत गोड़धोइया नाला-रामगढ़ताल परियोजना अंतिम चरण में
मैत्रीपुरम कॉलोनी में 1.4 किमी सीवर लाइन बिछाने का कार्य बाकी है
गोरखपुर। अमृत 2.0 के तहत सीवर परियोजना के पूरा होने की राह में बाधक बने मैत्रीपुरम के तीन मकान सोमवार को ध्वस्त कर दिए गए। जिला प्रशासन और जल निगम नगरीय की संयुक्त टीम ने ये कार्रवाई की है। अमृत 2.0 के तहत गोड़धोइया नाला एवं रामगढ़ताल पुनर्जीवन परियोजना पूरी होने के नजदीक है पर इन तीन मकानों के कारण काम टलता जा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, जिन भवनों को हटाया गया है उनके मालिकों को पूर्व में निर्धारित मुआवजा और सहायता राशि उपलब्ध कराई जा चुकी थी। परियोजना के तहत गोड़धोइया नाले के सुधार, गंदे पानी के इंटरसेप्शन और डायवर्जन के साथ-साथ उपचार व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस योजना में नाले के निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा 38 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और 61 एमएलडी क्षमता के मुख्य पंपिंग स्टेशन (एमपीएस) का निर्माण भी पूर्ण हो चुका है तथा उनका परीक्षण चल रहा है।
अब केवल मैत्रीपुरम क्षेत्र में सीवर नेटवर्क का एक हिस्सा शेष है। यह इलाका अत्यधिक घनी आबादी वाला होने के कारण निर्माण एजेंसियों के सामने चुनौती बना हुआ है। संकरी गलियों और भवनों की वजह से भारी मशीनों का संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। मैत्रीपुरम में करीब 12 और अन्य स्थानों को मिलाकर लगभग 30 भवन ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जो कार्य में रुकावट पैदा कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नाला निर्माण के दौरान प्रभावित भवनों के स्वामियों को पहले ही सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर भवन अब भी मौजूद हैं, जिससे सीवर लाइन बिछाने का कार्य प्रभावित हो रहा है।
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कई अन्य इलाकों में भी हो सकता है भूमि अधिग्रहण
जल निगम ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि मुआवजा प्राप्त कर चुके भवनों को हटाने की प्रक्रिया तेज की जाए। विभाग ने कुछ अन्य स्थानों को भी चिह्नित किया है, जहां कार्य के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर वहां भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई भी की जा सकती है। जल निगम नगरीय के अधीक्षण अभियंता रतन सेन सिंह ने बताया कि अवरोधक भवन हटने के बाद शेष सीवर लाइन का निर्माण तेजी से पूरा कराया जाएगा।
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मैत्रीपुरम कॉलोनी में 1.4 किमी सीवर लाइन बिछाने का कार्य बाकी है
गोरखपुर। अमृत 2.0 के तहत सीवर परियोजना के पूरा होने की राह में बाधक बने मैत्रीपुरम के तीन मकान सोमवार को ध्वस्त कर दिए गए। जिला प्रशासन और जल निगम नगरीय की संयुक्त टीम ने ये कार्रवाई की है। अमृत 2.0 के तहत गोड़धोइया नाला एवं रामगढ़ताल पुनर्जीवन परियोजना पूरी होने के नजदीक है पर इन तीन मकानों के कारण काम टलता जा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, जिन भवनों को हटाया गया है उनके मालिकों को पूर्व में निर्धारित मुआवजा और सहायता राशि उपलब्ध कराई जा चुकी थी। परियोजना के तहत गोड़धोइया नाले के सुधार, गंदे पानी के इंटरसेप्शन और डायवर्जन के साथ-साथ उपचार व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस योजना में नाले के निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा 38 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और 61 एमएलडी क्षमता के मुख्य पंपिंग स्टेशन (एमपीएस) का निर्माण भी पूर्ण हो चुका है तथा उनका परीक्षण चल रहा है।
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अब केवल मैत्रीपुरम क्षेत्र में सीवर नेटवर्क का एक हिस्सा शेष है। यह इलाका अत्यधिक घनी आबादी वाला होने के कारण निर्माण एजेंसियों के सामने चुनौती बना हुआ है। संकरी गलियों और भवनों की वजह से भारी मशीनों का संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। मैत्रीपुरम में करीब 12 और अन्य स्थानों को मिलाकर लगभग 30 भवन ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जो कार्य में रुकावट पैदा कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नाला निर्माण के दौरान प्रभावित भवनों के स्वामियों को पहले ही सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर भवन अब भी मौजूद हैं, जिससे सीवर लाइन बिछाने का कार्य प्रभावित हो रहा है।
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कई अन्य इलाकों में भी हो सकता है भूमि अधिग्रहण
जल निगम ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि मुआवजा प्राप्त कर चुके भवनों को हटाने की प्रक्रिया तेज की जाए। विभाग ने कुछ अन्य स्थानों को भी चिह्नित किया है, जहां कार्य के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर वहां भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई भी की जा सकती है। जल निगम नगरीय के अधीक्षण अभियंता रतन सेन सिंह ने बताया कि अवरोधक भवन हटने के बाद शेष सीवर लाइन का निर्माण तेजी से पूरा कराया जाएगा।