फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   professor also turned out to be colorful...he used to ask the victim to dance and dance.

यौन उत्पीड़न प्रकरण: गोरखपुर विश्वविद्यालय का यह प्रोफेसर भी निकला रंगीन मिजाज, कहता था- ठुमक के नाचो

Fri, 09 Feb 2024 10:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 09 Feb 2024 10:26 AM IST
सार

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि आंतरिक जांच कमेटी में सदस्यों का चयन तीन साल के लिए किया जाता है। उनकी अवधि पूरा हो रही है। नई कमेटी के गठन पर विचार किया जा रहा है।

विज्ञापन
professor also turned out to be colorful...he used to ask the victim to dance and dance.
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे डीडीयू के असिस्टेंट प्रोफेसर की करतूतें अब खुलने लगी हैं। जांच में पता चला है कि वह भी पहले वाले चर्चित प्रोफेसर की तरह ही रंगीन मिजाज है। वह छात्रा पर डांस करने का दबाव भी बनाता था। कहता था- ठुमक कर नाचो..।

विज्ञापन


डीडीयू लंबे समय तक एक रंगीन मिजाज प्रोफेसर की करतूत के लिए चर्चा में रहा और उस प्रकरण की जांच निपटने से पहले वैसा ही एक और मामला सामने आने से फिर चर्चाएं जोरों पर हैं। इस सबके लिए उसने स्पेशल कोर्स में अच्छी रैंकिंग का लालच भी दिया। पीड़ित छात्रा ने बीए के साथ वेटेज के लालच में स्पेशल कोर्स में भी दाखिला ले लिया था।
विज्ञापन


छानबीन में पता चला है कि आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर उस स्पेशल कोर्स का प्रभारी रह चुका है। उसके स्पेशल कोर्स के प्रभारी पद से हटने के बाद छात्रा ने राहत की सांस ली, लेकिन विभाग में उससे पीछा नहीं छूटा। गाहे-बगाहे मौका पाकर वह छात्रा को परेशान करता रहता था।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

करीब आठ माह पहले विश्वविद्यालय में हुए एक कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं का सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत होना था। रंगीनमिजाज असिस्टेंट प्रोफेसर ने छात्रा को इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने को कहा। उसने छात्रा से कहा कि दमदार डांस करो। छात्रा ने मना किया तो उसने वेटेज (भारांक) का जाल फेंका। इस पर भी उसने मना कर दिया तो आरोपी ने नंबर काट लेने की धमकी भी दी।

इसके बाद जब भी विश्वविद्यालय में कोई कार्यक्रम होता तो आरोपी इस छात्रा पर ही डांस में हिस्सा लेने का दबाव बनाता। वह चाहता कि छात्रा ठुमके लगाकर डांस करे। कुछ महीने पहले जब असिस्टेंट प्रोफेसर को पद की जिम्मेदारी से हटाया गया, तब जाकर छात्रा को राहत मिली।

professor also turned out to be colorful...he used to ask the victim to dance and dance.
DDU gorakhpur - फोटो : अमर उजाला।

ये था मामला
बता दें कि पीड़ित छात्रा 21 दिसंबर को प्रैक्टिकल फाइल जमा करने विभाग पहुंची तो आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर ने उसे प्रभाव में लेने की कोशिश की। उसी रात छात्रा के मोबाइल पर फोन कर दबाव बनाया। छात्रा ने मोबाइल फोन में करीब 29 मिनट तक की बातचीत को रिकाॅर्ड किया है। दूसरे दिन छात्रा विभाग गई तो प्रैक्टिकल फाइल जमा करने के लिए उसे अपने कमरे में बुलाया और उसकी सहेली के सामने ही अभद्र व्यवहार करने लगा। छात्रा ने इस बात का जिक्र भी अपने शिकायती पत्र में किया है।

शोध छात्रा के सुपरविजन को लेकर दो शिक्षकों में रार
गोरखपुर विश्वविद्यालय के एक अन्य विभाग में भी शोध छात्रा के सुपर विजन को लेकर दो शिक्षकों में रार चल रही है। एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर पर उसके सुपर विजन में शोध कर रही छात्रा को अपने चहेते असिस्टेंट प्रोफेसर को अघोषित रूप से सुपरवाइजर बनाने का आरोप लगाया है।

शिक्षक ने कार्य परिषद की बैठक में अध्यक्ष को यह शिकायती पत्र देकर कार्रवाई का मांग की है। यह शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वहीं बृहस्पतिवार को वरिष्ठ प्रोफेसर ने भी कुलपति को प्रार्थना पत्र देकर छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए जांच कर कार्रवाई की मांग की।

असिस्टेंट प्रोफेसर ने कार्य परिषद की बैठक में शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि वरिष्ठ प्रोफेसर कूट रचना कर शोध छात्रा के लिए दूसरा सुपरवाइजर बनाकर उसे अपने कमरे में बैठाते हैं। पत्र में उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए हैं। शिक्षक का शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा।
 

डीडीयू के आंतरिक जांच कमेटी में बदलाव के आसार
विश्वविद्यालय में लगातार आ रहे छात्राओं के शोषण के मामले के बाद अब आंतरिक जांच कमेटी में भी बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि आंतरिक जांच कमेटी ऐसे मामलों में तत्परता से जांच की कार्रवाई नहीं कर रही है, जिससे मामले उछल रहे हैं और इससे विश्वविद्यालय की छवि भी खराब हो रही है। इसके अलावा छात्र-छात्राओं का भरोसा भी इस कमेटी के प्रति कमजोर हो रहा है।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि आंतरिक जांच कमेटी में सदस्यों का चयन तीन साल के लिए किया जाता है। उनकी अवधि पूरा हो रही है। नई कमेटी के गठन पर विचार किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed