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Gorakhpur News: काला जादू- बिहार व प. बंगाल भेजे जा रहे तस्करी के तोते- जानिए आखिर क्यों हैं इनकी इतनी मांग

Sat, 20 Apr 2024 05:40 PM IST
रोहित सिंह अनुराग पांडेय, गोरखपुर
अनुराग पांडेय, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Sat, 20 Apr 2024 05:40 PM IST
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These days parrots are being smuggled again from Gorakhpur.
रेती चौक स्थित एक दुकान पर बिक रहे पक्षी। - फोटो : अमर उजाला
तोते में जादूगर की जान बसती है..। पुरानी फिल्म का यह डायलाग बिहार और प. बंगाल में आज भी चरितार्थ है। इन दोनों राज्यों में काला जादू के अंधविश्वास में तोते और कबूतर की बलि आज भी दी जाती है। इसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। गोरखपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से इन तोतों को तस्कर वहां तक पहुंचा रहे हैं। गोरखपुर से 300 रुपये में खरीदकर तस्कर बिहार-प. बंगाल में मनमाने दाम पर बेचते हैं।
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जिले से बिहार और पश्चिम बंगाल तक प्रतिबंधित तोते की तस्करी हो रही है। इसका खुलासा हुआ है वन विभाग और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में। तिनकोनिया रेंज नंदानगर अंडरपास से बुधवार की रात तीन तस्करों को प्रतिबंधित 676 तोते (रोजरिंग पैराकीट) के साथ पकड़ा गया था। इनसे हुई पूछताछ में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।
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सूत्रों के मुताबिक, बिहार व पश्चिम बंगाल में तंत्र-मंत्र और काला जादू का चलन है, जिसमें तोते और कबूतर की बलि दी जाती है। इसी वजह से तोते की तस्करी कर ले जाया जा रहा था। इन बेजुबान पक्षियों की वहां अधिक मांग होती है और इन्हें बेचकर तस्करों को भी अच्छा मुनाफा होता है।
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पकड़े गए तीनों तस्करों में राजघाट थाना क्षेत्र के छोटे काजीपुर निवासी रईस अहमद, रायगंज निवासी मोहम्मद इम्तियाज और पटना बिहार के आलमगंज थाना क्षेत्र के मिस्का टोला निवासी मंसूर आलम शामिल हैं। रईस अहमद ही इस गिरोह का सरगना है। छह माह पहले भी वन विभाग की टीम ने एक गाड़ी से प्रतिबंधित तोते बरामद किए थे, लेकिन तस्कर हाथ नहीं लगे थे। छह माह पहले भी तस्करी में रईस का नाम सामने आया था।


गर्मी में अधिक पकड़े जाते हैं तोते
रईस अहमद ने बताया कि बाग और जंगलों में उसके आदमी इस बात का पता लगाते हैं कि किस पेड़ पर तोते दिखते हैं। गर्मी का समय तोतों का प्रजनन काल होता है। इसलिए इस समय अधिक संख्या में तोते पकड़ में आते हैं। फिर इन्हें बिहार व बंगाल भेज दिया जाता है। कुछ आसपास भी बिक जाते हैं।

शहर में खूब चमक रहा धंधा
शहर में प्रतिबंधित पक्षियों की खरीद-फरोख्त का धंधा खूब चमक रहा है। शाहपुर के धर्मपुर, बशारतपुर, छोटे काजीपुर, विजय चौक, रेती चौक समेत कई अन्य जगहों पर गोपनीय ढंग से बेजुबान पक्षियों के बेचने का धंधा चल रहा है। यहां देसी और विदेशी दोनों ही प्रजाति के पक्षी बिक रहे हैं।


पक्षी की कीमत
पक्षी  मूल्य
आस्ट्रेलियन पैरेट 300 रुपये जोड़ा
डायमंड डव 500 रुपये जोड़ा
अफ्रीकन लव बर्ड 1000 रुपये जोड़ा
फिच बर्ड    200 रुपये जोड़ा
जावा   200 रुपये जोड़ा
कॉकटेल बर्ड 1800 रुपये जोड़ा

डीएफओ विकास यादव ने बताया कि पक्षियों को बचाने का हर तरह से प्रयास किया जा रहा है। प्रतिबंधित पक्षियों को बेचना और खरीदना दोनों ही गलत है। इन पक्षियों को घर पर पालने की भी छूट नहीं दी जाती है। विदेशों से विलुप्त हो रहीं पक्षियों की प्रजाति को बचाने का भी प्रयास किया जा रहा है। विदेशी पक्षियों को बेचने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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